₹399 में साल भर की वैलिडिटी?: सस्ते रिचार्ज के लालच में न करें ये गलती, खाली हो सकता है बैंक खाता; ऐसे बचें आप

जागृति शुक्ला
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीजागृति शुक्ला
Thu, 05 Nov 2026 02:46 PM IST
सार

अगर आपको भी सोशल मीडिया पर सिर्फ 399 रुपये में पूरे साल का मोबाइल रिचार्ज देने वाला विज्ञापन दिखाई दे रहा है, तो जल्दबाजी में क्लिक करने से आपका बैंक बैलेंस साफ हो सकता है। आखिर कैसे काम करता है यह रिचार्ज स्कैम और इससे बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है? आइए जानते हैं।

₹399 for Year Recharge? Beware Fake Jio, Airtel Offers
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एआई जनरेटेड

    विस्तार

    आजकल सोशल मीडिया का इस्तेमाल सिर्फ मनोरंजन तक सीमिन नहीं रह गया है, बल्कि साइबर ठगों ने इसे ठगी का नया अड्डा बना लिया है। इन दिनों फेसबुक और इंस्टाग्राम पर एक नया और खतरनाक स्कैम तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें यूजर्स को बेहद कम कीमत पर पूरे साल का मोबाइल रिचार्ज देने का लालच दिया जा रहा है। अगर आपके सामने भी ऐसा कोई ऑफर आया है, तो सावधान हो जाइए क्योंकि यह आपका बैंक खाता खाली करने की साजिश हो सकती है।

    क्या है ₹399 वाले रिचार्ज ऑफर वाला नया फ्रॉड?

    • साइबर दोस्त 14 सी ने एक्स पर पोस्ट शेयर कर इस स्कैम की जानकारी दी है। इनके अनुसार, सोशल मीडिया पर कम कीमत में लंबी वैलिडिटी वाले रिचार्ज का लालच देकर लोगों को फंसाने की कोशिश की जा रही है। इन विज्ञापनों में दावा किया जा सकता है कि सिर्फ 399 रुपये खर्च करके पूरे साल मोबाइल रिचार्ज की सुविधा मिल जाएगी।
    • ऐसे विज्ञापनों में जियो, एयरटेल, वोडा और बीएसएनएल जैसी टेलीकॉम कंपनियों के नाम और लोगो का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे यूजर्स को लगता है कि यह ऑफर किसी टेलीकॉम कंपनी की तरफ से ही दिया जा रहा है।
    • हालांकि, ऐसे विज्ञापनों के पीछे फर्जी वेबसाइट और साइबर ठगी का खेल हो सकता है। इसलिए किसी भी आकर्षक ऑफर को देखकर बिना जांच-पड़ताल भुगतान करना नुकसानदायक हो सकता है।

    कैसे काम करता है रिचार्ज के नाम पर ठगी का यह नया खेल?

    इस तरह के स्कैम में ठग यूजर्स को एक के बाद एक कई चरणों में फंसाते हैं।

    1. सोशल मीडिया पर दिखता है फर्जी विज्ञापन

    सबसे पहले फेसबुक और इंस्टाग्राम पर सस्ते रिचार्ज का स्पॉन्सर्ड एड दिखाया जा सकता है। इसमें 399 रुपये में पूरे साल की वैलिडिटी देने जैसा आकर्षक दावा किया जाता है। कम कीमत देखकर यूजर विज्ञापन पर क्लिक कर देता है।

    2. खुलती है नकली रिचार्ज वेबसाइट

    विज्ञापन पर क्लिक करने के बाद यूजर ऐसी वेबसाइट पर पहुंच सकता है, जो देखने में मोबाइल रिचार्ज एप जैसी लगती है। वेबसाइट का डिजाइन और उसमें मौजूद टेलीकॉम कंपनियों के लोगो इसे असली दिखाने की कोशिश करते हैं।

    3. मोबाइल नंबर और प्लान की जानकारी मांगी जाती है

    इसके बाद यूजर से मोबाइल नंबर दर्ज करने और पसंदीदा रिचार्ज प्लान चुनने के लिए कहा जाता है। इस प्रक्रिया से वेबसाइट यूजर को भुगतान के अगले चरण तक ले जाती है।

    4. क्यूआर कोड या यूपीआई से कराया जाता है भुगतान

    प्लान चुनने के बाद यूजर के सामने क्यूआर कोड या यूपीआई के जरिए पेमेंट करने का विकल्प आता है। सस्ते रिचार्ज के लालच में यूजर भुगतान कर देता है।

    5. पैसे कट जाते हैं, लेकिन रिचार्ज नहीं मिलता

    भुगतान पूरा होने के बाद रकम ठगों के खाते में पहुंच जाती है। इसके बावजूद यूजर को वादा किया गया रिचार्ज नहीं मिलता। इस तरह सस्ते ऑफर के चक्कर में यूजर को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

    यूजर्स कैसे रहें सुरक्षित?

    अगर आप के सोशल मीडिया अकाउंट पर भी ऐसे विज्ञापन दिख रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। ऑनलाइन रिचार्ज करते समय कुछ सावधानियां बरतकर इस तरह की ठगी से बचा जा सकता है।

    • मोबाइल रिचार्ज हमेशा संबंधित टेलीकॉम कंपनी की आधिकारिक एप या वेबसाइट से करें।
    • फेसबुक और इंस्टाग्राम पर दिखने वाले अनजान रिचार्ज विज्ञापनों पर भरोसा न करें।
    • किसी अनजान वेबसाइट पर मोबाइल नंबर और भुगतान से जुड़ी जानकारी दर्ज न करें।
    • क्यूआर कोड या यूपीआई के जरिए भुगतान करने से पहले प्राप्तकर्ता की जानकारी जरूर जांचें।
    • किसी भी असामान्य रूप से सस्ते रिचार्ज ऑफर की पुष्टि कंपनी के आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर करें।
    • रिचार्ज के लिए भरोसेमंद पेमेंट प्लेटफॉर्म का ही इस्तेमाल करें।

    रिचार्ज करते समय किन बातों का रखें ध्यान?

    • साइबर विशेषज्ञ कहते हैं कि सालभर की वैलिडिटी और बेहद कम कीमत का दावा देखकर तुरंत भुगतान करने से बचें। किसी भी ऑफर की वास्तविकता जांचना जरूरी है। खासतौर पर तब, जब विज्ञापन आपको किसी अनजान वेबसाइट पर ले जा रहा हो।
    • याद रखें, रिचार्ज के लिए हमेशा टेलीकॉम ऑपरेटर की आधिकारिक एप या वेबसाइट व भरोसेमंद पेमेंट प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करें। सोशल मीडिया पर दिखने वाला हर स्पॉन्सर्ड एड असली नहीं होता।