बड़ा खुलासा: एआई से जैविक हथियार बनाने की कोशिश! एंथ्रोपिक ने कई खतरनाक मामले समय रहते रोके

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Fri, 11 Sep 2026 10:19 AM IST
सार

एआई की मदद से जैविक हथियार तैयार करने की कोशिश का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एंथ्रोपिक के मुताबिक, उसके क्लॉड मॉडल से वायरस में बदलाव, मिसाइल और ड्रोन सॉफ्टवेयर से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियां हुईं। कंपनी ने कई अकाउंट बंद कर खतरनाक इस्तेमाल को रोकने का दावा किया है।

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एआई से बॉयोलॉजिकल हथियार बनाने की हुई कोशिश। - फोटो : अमर उजाला

    विस्तार

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की ताकत जितनी बढ़ रही है, उसके गलत इस्तेमाल का खतरा भी उतना ही गंभीर होता जा रहा है। अब एआई के जरिए सिर्फ साइबर हमले या फर्जी कंटेंट तैयार करने का खतरा नहीं है, बल्कि जैविक हथियारों से जुड़ी रिसर्च में भी इसके दुरुपयोग की आशंका सामने आई है। एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने दावा किया है कि उसने अपने क्लॉड मॉडल के जरिए जैविक हथियार विकसित करने से जुड़ी कई संदिग्ध गतिविधियों को समय रहते रोक दिया।

    एंथ्रोपिक के मुताबिक, इस साल सामने आए कुछ मामलों में उसके मॉडल का इस्तेमाल ऐसी वैज्ञानिक रिसर्च के लिए करने की कोशिश की गई, जिसका इस्तेमाल खतरनाक जैविक एजेंट तैयार करने में किया जा सकता था। कंपनी ने संदिग्ध अकाउंट्स पर कार्रवाई करते हुए उन्हें स्थायी रूप से बंद कर दिया।

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    चिकनगुनिया वायरस से जुड़ा गंभीर मामला

    • एंथ्रोपिक के सामने सबसे चिंताजनक मामला मई में सामने आया। कंपनी के अनुसार, एक वैज्ञानिक ने क्लॉड की मदद से चिकनगुनिया वायरस के जीनोम में ऐसे बदलावों की दिशा में काम करने की कोशिश की, जिनसे वायरस का असर ज्यादा गंभीर हो सकता था।
    • जांच के दौरान इस गतिविधि से जुड़ा संस्थान एक विदेशी सैन्य शोध केंद्र पाया गया। इसके बाद एंथ्रोपिक के सुरक्षा सिस्टम ने मामले को चिन्हित किया और संदिग्ध गतिविधि को रोक दिया।

    वैज्ञानिक रिसर्च और गलत इरादे में फर्क करना मुश्किल

    एंथ्रोपिक के थ्रेट इंटेलिजेंस प्रमुख जैकब क्लेन ने बताया कि इन मामलों में इस्तेमाल की गई वैज्ञानिक भाषा बेहद जटिल थी। शुरुआत में यह तय करना आसान नहीं था कि एआई से मांगी गई जानकारी किसी वैक्सीन, बीमारी के इलाज या दूसरे मेडिकल शोध के लिए है या इसके पीछे नुकसान पहुंचाने का इरादा है।यही वजह एआई के दुरुपयोग को पकड़ना मुश्किल बनाती है। किसी वायरस या रोगाणु पर किया जा रहा शोध चिकित्सा के लिए उपयोगी भी हो सकता है और उसी जानकारी का इस्तेमाल नुकसान पहुंचाने के लिए भी किया जा सकता है।

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    एआई की दोहरी क्षमता बन रही बड़ी चुनौती

    • इस पूरे मामले में सबसे बड़ी चिंता एआई की तथाकथित दोहरी उपयोग वाली क्षमता को लेकर है। वैज्ञानिक ज्ञान का इस्तेमाल एक तरफ नई दवाएं, इलाज और वैक्सीन विकसित करने में किया जा सकता है, वहीं दूसरी तरफ उसी जानकारी का इस्तेमाल खतरनाक जैविक एजेंटों पर काम करने के लिए भी किया जा सकता है।
    • माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. सुसान मोनारेज ने रिपोर्ट की समीक्षा के बाद चेतावनी दी कि उन्नत एआई सिस्टम ऐसे लोगों को भी जटिल वैज्ञानिक काम में मदद कर सकते हैं, जिनके पास पहले इस स्तर की विशेषज्ञता नहीं थी। उनका मानना है कि खतरनाक रोगाणुओं से जुड़े प्रयोगों को नियंत्रित करना और उनकी निगरानी करना बेहद जरूरी है।

    मिसाइल और ड्रोन से जुड़े मामलों का भी जिक्र

    • एंथ्रोपिक ने जैविक हथियारों के अलावा सैन्य और हथियार प्रणालियों से जुड़े कई अन्य संदिग्ध मामलों की जानकारी भी दी है। कंपनी के अनुसार, चीन से जुड़े तीन मामलों में मिसाइल, पारंपरिक हथियार और बम के डिजाइन से संबंधित सॉफ्टवेयर विकसित करने की कोशिशों का पता चला।
    • रूस से जुड़े दो मामलों में चुनावी दुष्प्रचार के लिए सामग्री तैयार करने और घातक हथियारों के डिजाइन से जुड़ी गतिविधियां सामने आईं। वहीं यमन में ईरान समर्थित हूती नेटवर्क से जुड़े एक मामले में ड्रोन और मिसाइल प्रणालियों के लिए सॉफ्टवेयर कोड तैयार कराने की कोशिश का पता चला।
    • एंथ्रोपिक ने ऐसे मामलों में संबंधित अकाउंट्स को बंद करने और संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े आईपी पतों को ब्लॉक करने की बात कही है। यह घटनाएं बताती हैं कि एआई की क्षमताएं बढ़ने के साथ उसके इस्तेमाल पर सुरक्षा नियंत्रण और निगरानी की जरूरत भी तेजी से बढ़ रही है।
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