AI हौव्वा नहीं, डरने के बजाय इससे सीखें: रोबोटिक्स कंपनी के CEO का बेटियों को खुला खत, युवाओं को क्या दी सलाह?
एआई को लेकर कहीं नौकरियां जाने की चिंता है, तो कहीं इंसानों के भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं। इस बीच रोबोट बनाने वाली कंपनी Serve Robotics के CEO अली काशानी ने अपनी बेटियों को लिखे खुले खत में तकनीक से डरने के बजाय उसे समझने और इस्तेमाल करना सीखने की सलाह दी है। उन्होंने खेती से लेकर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर तक के उदाहरण देते हुए बताया कि नई तकनीक रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकती है। ऐसे में एआई के दौर में पीछे छूटने से बचने के लिए युवाओं को क्या करना चाहिए? आइए जानते हैं, इस बारे में अली काशानी की क्या राय है।

विस्तार
दुनियाभर में इन दिनों कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को लेकर जोरदार बहस छिड़ी है। कोई इसे पढ़ाई बर्बाद करने वाला बता रहा है, तो कोई इंसानियत के अंत की भविष्यवाणी कर रहा है। इस सब भ्रम और डर के बीच अमेरिका की जानी-मानी रोबोटिक्स कंपनी (सर्व रोबोटिक्स) के प्रमुख अली काशानी ने अपनी बेटियों के नाम एक खुला खत लिखा है। काशानी ने खत में साफ कहा कि एआई कोई डरने की चीज या 'हौव्वा' नहीं है। इससे डरने के बजाय बेफिक्र होकर फैसले लेने होंगे, वरना युवा पीढ़ी रेस में पिछड़ जाएगी।
डर के आगे घुटने न टेकें, यह इतिहास रचने का समय
सड़कों पर खुद चलने वाले डिलीवरी रोबोट बनाने वाली कंपनी चलाने वाले अली काशानी का मानना है कि नई तकनीक इंसानों से उनका काम छीनती नहीं, बल्कि उन्हें और बेहतर व सुरक्षित काम करने का मौका दे सकती है। युवा पीढ़ी को संदेश देते हुए उन्होंने लिखा कि डर या अफवाहों के आगे घुटने मत टेको। किनारे बैठकर तमाशा देखोगे तो जिंदगीभर पछताओगे। यह दौर डरने का नहीं, बल्कि इतिहास रचने का समय है।
रोबोट सर्वज्ञ नहीं, उन्हें इंसानों की जरूरत पड़ती ही है
काशानी ने लिखा कि लोग एआई को लेकर तरह-तरह की बातें कर रहे हैं, कोई कह रहा है कि यह कैंसर मिटा देगा, तो कोई कह रहा है कि यह दुनिया खत्म कर देगा, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि रोबोट कोई सर्वज्ञ भगवान नहीं हैं। वो भी अक्सर सड़कों पर शीशे की दीवारों से टकरा जाते हैं और अटके रह जाते हैं। उन्हें इंसानों की मदद की जरूरत पड़ती ही है।
नई तकनीक से नौकरियां खत्म ही नहीं, नए काम भी पैदा होते हैं
एआई की वजह से नौकरियां जाने को लेकर काशानी ने इतिहास का उदाहरण दिया। उनका तर्क है कि जब भी कोई बड़ी तकनीकी खोज हुई, शुरुआत में कामकाज के पुराने तरीकों में बदलाव आया। लेकिन समय के साथ नए काम और रोजगार के अवसर भी पैदा हुए। उन्होंने पेशेवर नौकरियों के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि करीब 100 साल पहले केवल 5 फीसदी लोग पेशेवर नौकरियों में थे, जबकि आज यह हिस्सा लगभग 35 फीसदी है।
काशानी ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में करीब पांच करोड़ लोग सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के तौर पर कमाई कर रहे हैं। दो दशक पहले शायद ही किसी ने इसे एक संभावित पेशे के रूप में देखा होगा। इस उदाहरण के जरिए उनका कहना है कि तकनीक केवल पुराने काम करने का तरीका नहीं बदलती, बल्कि ऐसे पेशे भी पैदा कर सकती है जिनकी कल्पना पहले करना मुश्किल था।
ट्रैक्टर और मशीनों ने खेती बदली, रोजगार के नए रास्ते खोले
काशानी ने खेती में आए बदलावों का उदाहरण देकर भी अपनी बात रखी। उनका कहना है कि अगर इंसान तकनीक को अपनाने से इंकार कर देता है तो आज भी बड़ी आबादी खेती के पारंपरिक तरीकों पर निर्भर होती। उन्होंने बताया कि अमेरिका में आज लगभग दो फीसदी लोग खेती करते हैं। ट्रैक्टर और फसल काटने वाली मशीनों ने खेती के पुराने तौर-तरीकों को बदल दिया। इससे कम लोगों के श्रम से ज्यादा काम करना संभव हुआ।
काशानी के मुताबिक, ऐसी तकनीकों ने खाद्य उत्पादन और उपलब्धता में सुधार करने, भुखमरी कम करने और इंसानों की जीवन प्रत्याशा बढ़ाने में योगदान दिया। साथ ही, तकनीकी बदलावों ने दूसरे क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसर भी पैदा किए।
उनकी दलील है कि नई तकनीक को केवल इस नजरिए से नहीं देखना चाहिए कि इससे कौन-सा पुराना काम खत्म होगा। यह भी समझना चाहिए कि इससे कौन-से नए काम और संभावनाएं पैदा हो सकती हैं।
भविष्य में आज के कई काम पुराने जमाने की बात बन जाएंगे
काशानी का मानना है कि आने वाली पीढ़ियां आज के कई थकाऊ और समय लेने वाले कामों को देखकर हैरान होंगी। उन्होंने पुराने समय में स्ट्रीट लाइट जलाने वाले कर्मचारियों और सुबह घर-घर जाकर लोगों को जगाने वाले व्यक्तियों का उदाहरण दिया, जिन्हें कभी नियमित काम के रूप में देखा जाता था।
तकनीक के विकास के साथ ऐसे कई कामों की जरूरत कम हुई या उनका तरीका बदल गया। काशानी के मुताबिक, भविष्य में भी AI और रोबोटिक्स कुछ मौजूदा कामों को बदल सकते हैं। लेकिन इसके साथ नए कौशल और नए पेशों की जरूरत भी पैदा हो सकती है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि तकनीकी बदलाव से हर व्यक्ति को अपने आप फायदा होगा। कुछ नौकरियों और कौशलों की मांग कम हो सकती है, इसलिए लोगों को समय के साथ खुद को नए कामों के लिए तैयार करना होगा।
युवाओं को एआई के बारे में पढ़ने और सवाल पूछने की सलाह
काशानी ने युवा पीढ़ी को सलाह दी कि एआई से घबराने या उसके बारे में अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय इसे समझने की कोशिश करें। उनके मुताबिक, युवाओं को एआई के बारे में पढ़ना चाहिए, सवाल उठाने चाहिए और यह सीखना चाहिए कि इस तकनीक की मदद से वास्तविक समस्याओं को कैसे हल किया जा सकता है।
उन्होनें कहा है कि भविष्य केवल तकनीक बनाने वाली कंपनियों के हाथ में नहीं है। इसका इस्तेमाल कैसे होगा और इससे कौन-सी समस्याएं हल होंगी, इसमें आज के युवाओं की भी भूमिका होगी। इसलिए एआई को केवल नौकरी छीनने वाली तकनीक मानकर उससे दूरी बनाना सही रास्ता नहीं है। इसके बजाय, इसके काम करने के तरीके, सीमाओं और संभावित इस्तेमाल को समझना जरूरी है।