2 एनएम की चिप का कमाल: 40% फास्ट हुआ आईफोन 18 प्रो, 12 घंटे ज्यादा चलेगी बैटरी, जानिए क्या है नई तकनीक?

जागृति शुक्ला
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीजागृति शुक्ला
Thu, 10 Sep 2026 01:38 PM IST
सार

एपल ने अपनी आईफोन 18 प्रो सीरीज और पहले फोल्डेबल आईफोन डुओ के साथ 2-नैनोमीटर तकनीक पर बना नया ए20 प्रो चिपसेट पेश कर दिया है। यह नया प्रोसेसर पिछले ए19 प्रो के मुकाबले 20 प्रतिशत तेज सीपीयू, 40 प्रतिशत बेहतर जीपीयू ग्राफिक्स और दोगुनी एआई प्रोसेसिंग पावर देता है। तो क्या 2nm ट्रांजिस्टर तकनीक, 32-कोर न्यूरल इंजन और मैक-लेवल कूलिंग से लैस ए20 प्रो चिप स्मार्टफोन की दुनिया में परफॉर्मेंस के नए रिकॉर्ड बना पाएगा? जानिए इस नई तकनीक की खासियतें और इससे यूजर्स को मिलने वाले बड़े फायदे। आइए, विस्तार से समझते हैं।

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Apple A20 Pro, 2nm Powerhouse with 20% Faster CPU and 2x AI, Here Changes
2nm की ताकत से ए20 प्रो बना पावरहाउस - फोटो : amarujala.com

    विस्तार

    एपल ने अपनी नई ए 20 प्रो चिप के साथ स्मार्टफोन प्रोसेसिंग को एक नई दिशा दी है। यह चिप नई आईफोन 18 प्रो सीरीज के साथ-साथ कंपनी के पहले फोल्डेबल फोन आईफोन डुओ में भी इस्तेमाल की गई है। ए 20 प्रो को लेटेस्ट 2-नैनोमीटर प्रोसेस टेक्नोलॉजी पर तैयार किया गया है।

    इस चिप में नया 6-कोर सीपीयू, 7-कोर जीपीयू और डुअल 16-कोर न्यूरल इंजन दिया गया है। एपल के मुताबिक, ए 20 प्रो में A19 Pro की तुलना में 20 फीसदी तेज सीपीयू, 40 फीसदी तक तेज जीपीयू और दोगुनी AI प्रोसेसिंग क्षमता मिलती है। इसमें 50 फीसदी ज्यादा मेमोरी बैंडविड्थ भी है। लेकिन सवाल यह है कि 2nm चिप आखिर क्या होती है और इसका आम यूजर को क्या फायदा मिलेगा? आइए आसान भाषा में समझते हैं।

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    2nm प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी क्या है?

    चिप की दुनिया में एनएम यानी नैनोमीटर एक बेहद छोटे पैमाने को बताता है। एक नैनोमीटर, एक मीटर का एक अरबवां हिस्सा होता है। अगर इसे उदाहरण से समझने की कोशिश करे, तो जैसे आप मान लीजिए कि एक चिप एक बहुत बड़े शहर की तरह होती है और उसके अंदर के ट्रांजिस्टर छोटे-छोटे घर हैं। ये ट्रांजिस्टर बिजली के स्विच की तरह काम करते हैं और डेटा को प्रोसेस करने में मदद करते हैं।

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    पुरानी 3 एनएम या 5 एनएम तकनीक की तुलना में 2 एनएम प्रोसेस में ट्रांजिस्टर और चिप डिजाइन को ज्यादा छोटे और आधुनिक तरीके से तैयार किया जा सकता है। इससे चिप में बेहतर ऊर्जा दक्षता और ज्यादा कंप्यूटिंग क्षमता हासिल करने में मदद मिलती है। यानी आसान शब्दों में कहें तो छोटे प्रोसेस नोड का लक्ष्य कम जगह में ज्यादा ट्रांजिस्टर और बेहतर पावर एफिशिएंसी हासिल करना है। ए 20 प्रो को एपल ने 2 एनएम प्रोसेस पर बनाया है और इसे मोबाइल कंप्यूटिंग के लिए कंपनी की सबसे नई चिप तकनीक के तौर पर पेश किया गया है।

    2nm की ताकत से ए20 प्रो बना पावरहाउस
    2nm की ताकत से ए20 प्रो बना पावरहाउस - फोटो : amarujala.com

    A20 Pro में क्या-क्या खास है?

    ए 20 प्रो की ताकत सिर्फ 2nm प्रोसेस तक सीमित नहीं है। इसमें सीपीयू, जीपीयू और एआई प्रोसेसिंग के स्तर पर भी कई बड़े बदलाव किए गए हैं।

    1. 6-कोर सीपीयू: तेज प्रोसेसिंग

    • ए 20 प्रो में में 6-कोर सीपीयूदिया गया है। इसमें 2 सुपर काेर्स और 4 एफिशिएंसी कोर्स शामिल हैं।
    • एपल का कहना है कि नया सीपीयू ए19 प्रो की तुलना में 20 फीसदी तक तेज है। यानी ऐप खोलने, मल्टीटास्किंग, गेमिंग और दूसरे प्रोसेसर-हेवी कामों में ज्यादा तेज रिस्पॉन्स मिल सकता है।
    • जबकि आईफोन डुओ के मामले में भी एपल ने ए20 प्रो के सीपीयू को ए19 प्रो से 20 फीसदी तक तेज बताया है।
    • ए20 प्रो में 7-कोर जीपीयू दिया गया है। एपल के अनुसार, इसका ग्राफिक्स प्रदर्शन A19 Pro की तुलना में 40 फीसदी तक तेज है।
    • इसका सीधा फायदा हाई-ग्राफिक्स गेमिंग, वीडियो एडिटिंग, 3D ग्राफिक्स और दूसरे ग्राफिक्स-हेवी कामों में मिल सकता है।
    • यानी गेम खेलते समय बेहतर ग्राफिक्स रेंडरिंग और वीडियो एडिट करते समय तेज प्रोसेसिंग देखने को मिल सकती है।
    • ए20 प्रो में डुअल16-काेर न्यूरल इंजन दिया गया है। यानी कुल 32 कोर AI प्रोसेसिंग के लिए काम करते हैं।
    • एपल के मुताबिक, यह A19 Pro की तुलना में दोगुनी AI प्रोसेसिंग क्षमता देता है। इसमें नए न्यूरल एक्सेलेरेटर भी शामिल हैं।
    • इसका इस्तेमाल ऑन-डिवाइस AI मॉडल, कम्प्यूटेशनल फोटोग्राफी और एपल इंटेलिजेंस जैसे फीचर्स में किया जाता है।
    • ए20 प्रो में ए19 प्रो की तुलना में 50 फीसदी ज्यादा मेमोरी बैंडविड्थ दी गई है।
    • मेमोरी बैंडविड्थ को आसान भाषा में डेटा के आने-जाने की क्षमता समझ सकते हैं। ज्यादा बैंडविड्थ का मतलब है कि प्रोसेसर और मेमोरी के बीच डेटा ज्यादा तेजी से ट्रांसफर किया जा सकता है।
    • इसका फायदा खास तौर पर एआई, गेमिंग, मल्टीटास्किंग और हाई-रिजॉल्यूशन फोटो-वीडियो प्रोसेसिंग जैसे कामों में मिल सकता है।
    • सिर्फ तेज चिप होना ही काफी नहीं है। लगातार भारी काम करने पर चिप गर्म हो सकती है और तापमान बढ़ने पर परफॉर्मेंस कम हो सकती है।
    • इसीलिए ए20 प्रो में के साथ एपल ने एम-सीरीज चिप्स से प्रेरित पैकेजिंग डिजाइन और नेक्स्ट-जेनरेशन वेपर चैंबर दिया है।
    • इस डिजाइन में सिलिकॉन डाई और मेमोरी को साथ रखकर हीट फ्लो को बेहतर बनाने पर काम किया गया है। वेपर चैंबर गर्मी को तेजी से फैलाने में मदद करता है।
    • एपल का दावा है कि ए20 प्रो और नई वेपर चैंबर मिलकर आईफोन में अब तक की सबसे ज्यादा सस्टेंड परफॉर्मेंस देने के लिए तैयार किए गए हैं।
    ए20 प्रो
    ए20 प्रो - फोटो : apple.com

    इसका आम यूजर को क्या फायदा होगा?

    यहां पर सवाल है कि अगर कोई व्यक्ति इस नए ए20 चिप वाले आईफोन को खरीदता है, तो इन तकनीकी बदलावों का यूजर्स को क्या फायदा मिल सकता है।

    गेमिंग में बेहतर परफॉर्मेंस

    अगर आप गेम खेलना पसंद करते हैं तो 40 फीसदी तक तेज जीपीयू का फायदा हाई-ग्राफिक्स गेम में दिखाई दे सकता है। गेम के दौरान ग्राफिक्स रेंडरिंग बेहतर होगी और लंबे समय तक लगातार गेम खेलने पर बेहतर सस्टेंड परफॉर्मेंस मिलने की उम्मीद है। वेपर चैंबर का काम भी यहां जरूरी है, क्योंकि यह लंबे गेमिंग सेशन के दौरान गर्मी को नियंत्रित करने में मदद करता है।

    4K वीडियो एडिटिंग और एक्सपोर्ट

    वीडियो एडिटिंग जैसे भारी काम सीपीयू और जीपीयू दोनों पर दबाव डालते हैं। A20 Pro का तेज CPU, ज्यादा शक्तिशाली GPU और बेहतर मेमोरी बैंडविड्थ ऐसे कामों में तेजी ला सकते हैं। यानी 4K वीडियो एडिट करने और एक्सपोर्ट करने जैसे कामों में फोन ज्यादा तेजी से काम कर सकता है।

    एआई फीचर्स होंगे ज्यादा तेज

    ए 20 प्रो का सबसे बड़ा फायदा एआई से जुड़े कामों में दिखाई दे सकता है। डुअल 16-कोर न्यूरल इंजन और नए न्यूरल एक्सेलेरेटर ऑन-डिवाइस एआई प्रोसेसिंग को तेज बनाते हैं। एपल इंटेलिजेंस जैसे फीचर्स में फोन कई काम सीधे डिवाइस पर प्रोसेस कर सकता है। एपल का कहना है कि A20 Pro में A19 Pro की तुलना में 2x AI compute मिलता है।

    क्या AI के लिए हमेशा इंटरनेट की जरूरत होगी?

    ए 20 प्रो की ऑन-डिवाइस AI क्षमता का एक बड़ा फायदा प्राइवेसी से जुड़ा है। जब एआई प्रोसेसिंग सीधे डिवाइस पर की जाती है, तो हर काम के लिए डेटा को इंटरनेट के जरिए सर्वर तक भेजना जरूरी नहीं होता। एपल इंटेलिजेंस में ऑन-डिवाइस प्रोसेसिंग के साथ जरूरत पड़ने पर प्राइवेट क्लॉड कंप्यूटर का भी इस्तेमाल किया जाता है। इससे एआई फीचर्स में तेज रिस्पॉन्स और प्राइवेसी के बीच बेहतर संतुलन बनाने की कोशिश की जाती है।

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