गूगल का बड़ा खुलासा: पिक्सल स्मार्टफोन्स में मिला खतरनाक जीरो-क्लिक बग, बिना फोन छुए कैसे चोरी हो रहा था डेटा?

जागृति शुक्ला
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीजागृति शुक्ला
Thu, 17 Sep 2026 04:25 PM IST
सार

अगर आप गूगल पिक्सल स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए अहम हो सकती है। कंपनी के अनुसार, पिक्सल डिवाइसेज के सॉफ्टवेयर में मौजूद एक खामी (बग) के जरिए टारगेटेड साइबर अटैक किए गए हैं। आइए समझते हैं कि यह पूरा मामला क्या है।

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Google Pixel Smartphone Modem Bug CVE-2026-58704 Patched, Zero Click Cyber Attack Threat
गूगल पिक्सल साइबर अटैक - फोटो : एआई जनरेटेड

    विस्तार

    गूगल ने आधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि की है कि उसके पिक्सल स्मार्टफोन्स के सॉफ्टवेयर में मौजूदा एक गंभीर बग का फायदा उठाकर सीमित और टारगेटेड साइबर हमले किए गए हैं। इस कमजोरी को CVE-2026-58704 के तौर पर ट्रैक किया जा रहा है। हालांकि, गूगल ने इस बग को पैच (Patch) कर दिया है।

    स्मार्टफोन में क्या कमजोरी थी?

    • फिलहाल सामने आई जानकारियों के अनुसार, यह सुरक्षा खामी पिक्सल फोन के मॉडेम में मौजूद थी। मॉडेम वह प्रमुख हिस्सा है जो फोन को मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट से कनेक्ट करने में मदद करता है।
    • इस कमजोरी का फायदा उठाकर हमलावर मॉडेम के सैंडबॉक्स की सुरक्षा सीमाओं को पार कर सकते थे। इसके बाद उन्हें फोन के व्यापक डेटा और सिस्टम तक पहुंच हासिल करने का रास्ता मिल सकता था। इस तरह की कमजोरी को प्रिविलेज एस्केलेशन यानी मौजूदा सीमित अधिकारों से ज्यादा सिस्टम एक्सेस हासिल करने वाली खामी कहा जाता है।

    कितना खतरनाक था यह साइबर अटैक?

    • इस बग की सबसे डरावनी बात यह थी कि इसका इस्तेमाल जीरो क्लिक अटैक के रूप में किया जा सकता था। इसका फायदा उठाने के लिए फोन मालिक की किसी तरह की इंटरैक्शन जरूरी नहीं थी। यानी यूजर को किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने, फाइल खोलने या कोई एप इंस्टॉल करने के लिए भी नहीं कहा गया, जिससे वह सावधान हो जाए।
    • ऐसे हमले को जीरो-क्लिक अटैक कहा जाता है। इसमें हमलावर किसी खास सिस्टम या सॉफ्टवेयर की कमजोरी का फायदा उठाकर पीड़ित की सक्रिय भागीदारी के बिना ही हमला करने की कोशिश कर सकता है।

    किसने किया हमला?

    • गूगल ने अभी यह जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। CVE-2026-58704 का इस्तेमाल करने वाले हमलावर कौन थे या उनके पीछे कौन सा समूह था। कंपनी के प्रवक्ता ने इस मामले पर कमेंट के अनुरोध का जवाब भी नहीं दिया।
    • हालांकि इस तरह की सुरक्षा कमजोरियों का इस्तेमाल सर्विलांस वेंडर्स की ओर से किए जाने की आशंका रहती है। ऐसी कंपनियां निगरानी और डेटा हासिल करने वाले सॉफ्टवेयर विकसित करती हैं और कई मामलों में उनकी तकनीक सरकारों या कानून प्रवर्तन एजेंसियों को बेची जाती है।
    • हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर इस खास पिक्सल बग के पीछे किसी विशेष कंपनी या समूह की भूमिका की पुष्टि नहीं हुई है। गूगल ने भी यह नहीं बताया है कि इसका फायदा किसने उठाया।

    गूगल ने जारी किया पैच

    कंपनी का कहना है कि CVE-2026-58704 को अब पैच कर दिया गया है। इस मामले से यह भी पता चलता है कि स्मार्टफोन में मौजूद हार्डवेयर-संबंधित सॉफ्टवेयर, जैसे मॉडेम, में सुरक्षा खामियां भी साइबर हमलों का रास्ता बन सकती हैं।

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    यूजर्स के लिए सलाह

    एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर आप गूगल पिक्सल स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं, तो सबसे पहले अपने की फोन की सेटिंग्स में जांए, वहां पर सिस्टम पर क्लिक करके सिस्टम अपडेट में जाकर सिक्योरिटी अपडेट डाउनलोड और इंस्टॉल कर लें, ताकि आपका फोन पूरी तरह सुरक्षित हो सके।

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