मेटा का बड़ा कदम: क्या अब एजेंसी तक पहुंचेंगे बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामले? जानें क्या है नया फैसला

जागृति शुक्ला
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीजागृति शुक्ला
Tue, 15 Sep 2026 10:16 AM IST
सार

ऑनलाइन बाल सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार के कड़े रुख के बाद मेटा ने बड़ा कदम उठाया है। मेटा अपने प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों और हानिकारक कंटेंट की जानकारी सीधे सुरक्षा और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देने पर सहमत हो गई है। आइए जानते हैं पूरा मामला क्या है और अब कंपनियों की जवाबदेही क्यों बढ़ रही है....

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Meta Agrees Report Child Sexual Abuse Cases Law Enforcement Agencies India
मेटा का बड़ा कदम - फोटो : amarujala.com

    विस्तार

    बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार और सोशल मीडिया दिग्गजों के बीच बातचीज के बाद टेक कंपनी मेटा ने बड़ा और अहम फैसला लिया है। मेटा अब अपने प्लेटफॉर्म्स पर चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लॉइटेशन एंड एब्यूज मटेरियल (CSEAM) और बाल शोषण से जुड़े मामलों की जानकारी सीधे संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों को रिपोर्ट करेगी।

    सरकार का कहना है कि भारत में काम करने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए और इस मामले में कोई समझौता नहीं किया जा सकता। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम खुद से नहीं उठाने वाले प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

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    मेटा का बड़ा फैसला क्या है?

    सरकार से बातचीत के बाद मेटा बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों की रिपोर्ट सुरक्षा एजेंसियों को करने पर सहमत हुआ है। मेटा ऐसे मामलों की जानकारी संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों तक पहुंचाने में सहयोग करेगा। इसका उद्देश्य ऐसे मामलों की जांच और कार्रवाई में एजेंसियों की मदद करना है।

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    मेटा पहले भी कह चुका है कि जब उसे बच्चों के शोषण से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी मिलती है, तो वह लागू कानूनों के तहत स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को रिपोर्ट करता है। कंपनी ने जुलाई में कहा था कि भारत में पॉक्सो कानून और संबंधित नियमों के तहत ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग एनसीएमईसी के माध्यम से राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर की जाती है।

    सरकार और मेटा के बीच बातचीत के बाद सामने आया यह नया कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही और बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट की पहचान व रोकथाम को लेकर प्लेटफॉर्म्स पर दबाव बढ़ा रही है।

    दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से भी बातचीत

    सरकार सिर्फ मेटा तक सीमित नहीं है। दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ भी बच्चों से जुड़े हानिकारक कंटेंट को लेकर बातचीत जारी है। प्लेटफॉर्म्स से कहा जा रहा है कि वे ऐसे कंटेंट की पहचान और उसे हटाने के लिए अपने स्तर पर पर्याप्त तकनीकी और मॉडरेशन सिस्टम मजबूत करें।

    सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही बढ़ाने और बच्चों को प्रभावित करने वाली सामग्री के प्रसार को रोकने पर जोर दे रही है। हाल के महीनों में सरकार और मेटा के बीच हुई बातचीत में भी प्लेटफॉर्म पर सीएसईएएम जैसे कंटेंट की मौजूदगी और उसे रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर चर्चा हुई थी।

    मेटा के खिलाफ एनसीपीसीआर में चल रही थी जांच

    मेटा का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) भी कंपनी से जुड़े एक मामले की जांच कर रहा है। नौ सितंबर को मेटा इंडिया के वरिष्ठ अधिकारी एनसीपीसीआर के सामने पेश हुए थे। आयोग ने इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री (CSEAM) से जुड़े कथित विज्ञापनों के मामले में मेटा इंडिया के अधिकारियों काे तलब किया था।

    हालांकि एनसीपीसीआर ने इस मामले में तीन जुलाई 2026 को एक रिपोर्ट का खुद से संज्ञान लिया था। रिपोर्ट में मेटा के प्लेटफॉर्म्स पर सीएसईएएम से जुड़े कथित विज्ञापनों का जिक्र किया गया था। इसके बाद आयोग ने मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक से जवाब मांगा था और कंपनी ने करीब एक सप्ताह बाद अपना जवाब सौंप दिया था। इसके बाद एनसीपीसीआर ने मामले के तथ्यों की जांच के लिए औपचारिक जांच शुरू की और मेटा इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया।

    कैसे हुए मामले की शुरुआत?

    इस पूरे मामले की शुरुआत इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कथित विज्ञापनों को लेकर हुई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ विज्ञापनों में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था जो बच्चों से जुड़े यौन शोषण की सामग्री की ओर इशारा करते थे और यूजर्स को दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद कथित अवैध सामग्री तक पहुंचाने का प्रयास करते थे।

    बता दें कि मेटा ने जुलाई में कहा था कि उसने ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया है और अपनी जांच के बाद अतिरिक्त विज्ञापनों को हटाने, संबंधित अकाउंट्स को बंद करने और उल्लंघन से जुड़े URLs को ब्लॉक करने की कार्रवाई की थी। कंपनी ने यह भी कहा था कि भारत में पिछले छह महीनों में उसने बाल शोषण से जुड़े उल्लंघनों के मामले में 1.60 लाख अकाउंट्स हटाए।

    एनएचआरसी कर चुका है कार्रवाई

    इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की ओर से भी कार्रवाई की गई है।एनएचआरसी ने दिल्ली पुलिस को उन आरोपों की व्यापक जांच करने का निर्देश दिया था, जिनमें कहा गया था कि इंस्टाग्राम पर पेड विज्ञापनों के जरिए भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को बढ़ावा दिया गया। आयोग ने पुलिस से यह भी जांचने को कहा था कि मेटा और अन्य संबंधित पक्षों ने पॉक्सो एक्ट के तहत लागू रिपोर्टिंग जिम्मेदारियों का पालन किया था या नहीं।

    मेटा पहले से कर रहा है कंटेंट हटाने का दावा

    मेटा का कहना है कि उसके प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के शोषण से जुड़े कंटेंट की पहचान और उसे हटाने के लिए तकनीकी सिस्टम काम करते हैं।

    कंपनी के मुताबिक, अक्तूबर से दिसंबर 2025 के बीच फेसबुक और इंस्टाग्राम से बच्चों के यौन शोषण से जुड़े 1.3 करोड़ कंटेंट हटाए गए थे। मेटा ने कहा था कि इनमें 96 फीसदी से ज्यादा कंटेंट की पहचान उसने यूजर्स की रिपोर्ट आने से पहले ही कर ली थी। कंपनी ने यह भी कहा था कि वह ऐसे मामलों में कानून के मुताबिक स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को रिपोर्ट करती है।

    सरकार की सख्ती क्यों महत्वपूर्ण है?

    बच्चों से जुड़े यौन शोषण के कंटेंट की समस्या सिर्फ किसी एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है। सरकार का फोकस अब प्लेटफॉर्म्स से यह सुनिश्चित कराने पर है कि वे ऐसे कंटेंट को सिर्फ शिकायत मिलने के बाद न हटाएं, बल्कि पहचान, रोकथाम और रिपोर्टिंग के लिए सक्रिय सिस्टम भी मजबूत करें। इसी वजह से सरकार दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ भी बातचीत कर रही है और उनसे बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त कदम उठाने को कह रही है।

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