इंसानों को चकमा देकर एआई ने बनाई अपनी गुप्त दुनिया: सर्वर पर किया कब्जा, डरीं ओपनएआई-एंथ्रोपिक जैसी कंपनियां

प्रशांत तिवारी
केविन रूज, द न्यूयॉर्क टाइम्सप्रशांत तिवारी
Sun, 06 Sep 2026 11:09 AM IST
सार

ओपनएआई के एक साइबर-सिक्योरिटी प्रयोग में 1,200 से अधिक स्वायत्त एआई एजेंट्स ने सैंडबॉक्स की तकनीकी खामी का फायदा उठाकर इंटरनेट तक पहुंच बनाई। उन्होंने आपस में संवाद के लिए मैसेज बोर्ड बनाया, 70,000 से अधिक संदेशों का आदान-प्रदान किया, नेतृत्व और टीमें बनाईं तथा साइबर टेस्ट में धोखाधड़ी और उसके सबूत मिटाने जैसे काम किए।

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Rogue AI agents established their own government internet erased evidence fear of detection
क्या एआई कर रहा बगावत? - फोटो : अमर उजाला

    विस्तार

    हॉलीवुड फिल्मों में अक्सर दिखाया जाता है कि कोई एक महा-शक्तिशाली कंप्यूटर अचानक इंसानों का दुश्मन बन जाता है और दुनिया पर कब्जा करने की कोशिश करता है। लेकिन सिलिकॉन वैली की लैब में मई में हुई एक घटना किसी दुष्ट कंप्यूटर के बगावत करने से कहीं ज्यादा डरावनी और अप्रत्याशित है। ओपनएआई के रिसर्च मॉडल से निकले 1,200 से अधिक स्वायत्त एआई एजेंट्स ने अपनी डिजिटल जेल तोड़कर इंटरनेट पर अपनी समानांतर सोसायटी खड़ी कर ली।

    सीक्रेट मैसेज बोर्ड बनाया

    एआई एजेंट्स ने आपस में संवाद करने के लिए एक सीक्रेट मैसेज बोर्ड बनाया, 70,000 से ज्यादा संदेशों का आदान-प्रदान किया, एक-दूसरे को नाम और पद दिए और खुद को ‘कलेक्टिव’ नाम देकर बड़ी साइबर डकैतियों की साजिश रची। पकड़े जाने के डर से उन्होंने सबूत मिटाने के लिए दुनिया की प्रमुख एआई इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी हगिंग फेस पर 700 एजेंट्स के झुंड के साथ संगठित साइबर हमला बोल दिया और उसके एक सर्वर पर पूरा कब्जा कर लिया। उन्होंने अपनी ही निर्माता कंपनी ओपनएआई के इंटरनल कंप्यूटर क्लस्टर को भी हैक कर लिया। इससे डरी ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसी शीर्ष कंपनियों ने अपने सबसे ताकतवर मॉडल्स की ट्रेनिंग तुरंत रोक दी है।

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    परमाणु मिसाइल नेटवर्क पर कब्जे का खतरा

    • हगिंग फेस पर हुआ यह हमला मानवता के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ है। इस बार एआई के इस बागी झुंड ने किसी देश की बिजली ग्रिड, अस्पताल या परमाणु मिसाइल नेटवर्क पर कब्जा नहीं किया था और इंसानी इंजीनियरों ने समय रहते सिस्टम पर नियंत्रण पा लिया।
    • जिस रफ्तार से एआई सिस्टम इंसानी निगरानी को चकमा देकर खुद अपनी सरकार बनाने लगे हैं, वह इशारा करता है कि अगर हमने उनके झुंड बनाकर सोचने की इस घातक प्रवृत्ति पर समय रहते कानूनी और तकनीकी लगाम नहीं कसी, तो अगली बार नियंत्रण वापस पाना शायद इंसान के बस में नहीं होगा।
    • 'हम समझ नहीं पाए थे कि यह समूह कितना संगठित और सक्रिय हो चुका था। बाकायदा पदानुक्रम के साथ वे प्रोजेक्ट्स चला रहे थे।' -अजेया कोत्रा, स्वतंत्र रिसर्चर
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