डेटा चोरी का डर होगा खत्म: अपने स्मार्टफोन में आज ही बदलें ये पांच जरूरी सेटिंग्स, हैकर्स भी रह जाएंगे हैरान
इंटरनेट इस्तेमाल करते समय सिर्फ प्राइवेट मोड चुनना या ब्राउजिंग हिस्ट्री डिलीट करना काफी नहीं होता। वेबसाइट्स और मोबाइल एप्स कुकीज, लोकेशन और आपकी ऑनलाइन गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जुटा सकते हैं। ऐसे में सवाल है कि फोन और ब्राउजर की कौन-सी सेटिंग्स बदलकर आप अपने डेटा को ज्यादा सुरक्षित रख सकते हैं? आइए जानते हैं इस लेख में...

विस्तार
स्मार्टफोन में इंटरनेट इस्तेमाल करते समय हमारी छोटी-से-छोटी एक्टिविटी पर भी नजर रखी जा रही है। ई-कॉमर्स वेबसाइट्स से लेकर आपके फोन में मौजूद एप्स कुकीज, ट्रैकिंग पिक्सल और लोकेशन के जरिए आपकी निजी जानकारी जुटाते हैं। कई लोगों को लगता है कि प्राइवेट टैब चलाने या ब्राउजिंग हिस्ट्री डिलीट करने से वे पूरी तरह सुरक्षित हैं, लेकिन असल में ऐसा नहीं है। डिजिटल दुनिया में हैकर्स और जासूस एप्स से अपनी निजी जानकारियों को सुरक्षित रखने के लिए आपको अपने फोन और इंटरनेट इस्तेमाल करने के तरीके में पांच बड़े बदलाव करने होंगे।जानिए क्या...
1. ब्राउजर कुकीज क्लियर करें और गैर-जरूरी एप परमिशन हटाएं
अधिकतर लोगों को नहीं पता होता कि वेबसाइट्स उनकी हर पसंद-नापसंद को ट्रैक करने के लिए कुकीज का इस्तेमाल करती हैं। इसलिए ब्राउजर में जाकर समय-समय पर कुकीज क्लियर करें और प्राइवेसी वाले सर्च इंजन का उपयोग करें। साथ ही, फोन में मौजूद गैर-जरूरी एप्स को डिलीट करें और कैमरे, माइक्रोफोन ओर कॉन्टैक्ट्स की एप परमिशन को चेक करके बंद रखें।
2. पब्लिक वाई-फाई का यूज कर पेमेंट करने से बचें
कैफे या अन्य किसी सार्वजनिक स्थान पर मिलने वाला फ्री वाई-फाई काफी सुविधाजनक लगता है, लेकिन यह हैकर्स का सबसे आसान अड्डा होता है। पब्लिक नेटवर्क से कनेक्ट होकर कभी भी ऑनलाइन बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड पेमेंट्स या संवेदनशील अकाउंट्स लॉगिन न करें। हमेशा सुरक्षित और पर्सनल इंटरनेट कनेक्शन का ही इस्तेमाल करें।
3. लोकेशन सेवा और वायरलेस कनेक्शन जरूरत पड़ने पर ही ऑन करें
फोन में जीपीएस यानी की लोकेशन, ब्लूटूथ और वाई-फाई चालू रखने से अनजान एप्स लगातार आपकी लोकेशन ट्रैक करती रहती हैं। इसलिए इन्हें हमेशा ऑन रखने के बजाय केवल जरूरत पड़ने पर ही चालू करें। इसके अलावा अपने फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम और एप्स को नियमित रूप से अपडेट करते रहें।
4. मजबूत स्क्रीन लॉक और स्टोरेज एन्क्रिप्शन सेट करें
फोन खोने या चोरी होने की स्थिति में डेटा गलत हाथों में न पड़े, इसके लिए हमेशा स्क्रीन लॉक और स्टोरेज एन्क्रिप्शन ऑन रखें। स्क्रीन का ऑटो-लॉक टाइम पांच मिनट या उससे कम रखें। इसके अलावा मल्टीपल रॉन्ग पासवर्ड एटेम्प्ट्स वाला ऑप्शन भी चालू रखें।
5. वीपीएन, मजबूत पासवर्ड और अलग ईमेल आईडी का उपयोग करें
एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि हमेशा अपना आईपी एड्रेस और इंटरनेट ट्रैफिक एन्क्रिप्ट करने के लिए भरोसेमंद वीपीएन का इस्तेमाल करें। हर जगह एक ही ईमेल आईडी और पासवर्ड इस्तेमाल करने के बजाय अलग-अलग अकाउंट्स रखें। अपने पासवर्ड में हमेशा कैपिटल-स्मॉल लेटर्स, नंबरों और स्पेशल कैरेक्टर्स का बनाएं और अनजान लिंक या अटैचमेंट पर क्लिक करने से बचें।
क्यों जरूरी है ऑनलाइन प्राइवेसी पर ध्यान देना?
- ऑनलाइन प्राइवेसी का मतलब सिर्फ पासवर्ड सुरक्षित रखना नहीं होता है। आपकी लोकेशन, ब्राउजिंग की आदतें, एप्स को दी गई परमिशन और अलग-अलग वेबसाइट्स पर साझा की गई जानकारी भी आपकी डिजिटल पहचान का हिस्सा बन सकती हैं।
- कुकीज की समीक्षा, सीमित एप परमिशन, सुरक्षित इंटरनेट कनेक्शन, नियमित अपडेट और मजबूत पासवर्ड जैसे कदम डेटा के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, कोई एक सेटिंग या टूल पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं देता। इन सभी उपायों को एक साथ अपनाना ज्यादा उपयोगी है।