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आगरा में कुत्ते और बंदरों का आतंक: किसी के चेहरे तो किसी की गर्दन पर दिया जख्म, 3619 लोग हुए शिकार
Thu, 17 Sep 2026 10:04 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 17 Sep 2026 10:04 AM IST
आगरा में कुत्ते और बंदरों के हमले बढ़ने से जिला अस्पताल में एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। अगस्त में 3619 नए मरीज पहुंचे, इनमें 2390 को कुत्तों और 740 को बंदरों ने काटा, जबकि 467 को कई घाव मिले।
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एंटी रैबीज वैक्सीन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
कुत्ते और बंदर हिंसक हो रहे हैं। ये लोगों पर हमला कर घायल कर रहे हैं। जिला अस्पताल में एंटी रैबीज वैक्सीन (एआरवी) लगवाने आ रहे मरीजों के मल्टीपल घाव मिल रहे हैं। इनमें बच्चे और बुजुर्गों की संख्या अधिक है। बीते दो सप्ताह से जिला अस्पताल में 15 फीसदी तक मरीज बढ़ गए हैं।
जिला अस्पताल में रोजाना औसतन 550 मरीज एआरवी लगवाने आते हैं। इनमें नए मरीजों की संख्या करीब 250 हैं, बाकी के मरीज विभिन्न डोज लगवाने आ रहे हैं। सबसे ज्यादा बच्चे और बुजुर्गों की संख्या है। अगस्त में 3619 नए मरीज आए, इनमें से 3152 को एक घाव और 467 के दो से अधिक घाव मिले। इनके पेट, कमर, छाती यहां तक कि गर्दन-चेहरे पर भी घाव पाए गए। इनको एआरवी के साथ सीरम की डोज भी दी जा रही है। हालत गंभीर होने पर दो-तीन मरीजों को भर्ती भी करने की नौबत आ रही है।
इनमें गलियों, सड़क और चौराहों पर घूमने वाले कुत्ते ज्यादा हमलावर हैं। इसमें 2663 लोगों को कुत्ते, 740 को बंदर, 183 को बिल्ली और 33 को चूहे, सियार, घोड़ा-गधा आदि पशुओं ने काटा। प्रमुख अधीक्षिका डॉ. सुनीता राठौर ने बताया कि कुत्ता काटने के मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा हैं। बढ़ते मरीजों को देखते हुए एआरवी का स्टॉक भी कर लिया है।
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नमक-मिर्च न लगाएं, संक्रमण बढ़ने का खतरा
एंटी रैबीज वैक्सीन के नोडल अधिकारी डॉ. मोहित बंसल ने बताया कि भूख-प्यास और बदलते मौसम में कुत्ते-बंदर हिंसक होकर हमला करते हैं। ऐसे में कई मरीज घाव पर नमक-मिर्च समेत अन्य घरेलू उपचार करते हैं, ये बेहद खतरनाक है। मिर्च-नमक से रक्तसंचार तेजी से बढ़ने से वायरस खून में तेजी से प्रवाहित होता है, इससे मर्ज और बढ़ जाता है। संक्रमण का खतरा भी है। 24 घंटे में एआरवी जरूर लगवानी चाहिए।
यह करें उपाय
घाव को पानी की तेज धार से साबुन से 10-15 मिनट तक धोएं।
घाव साफ करने के बाद एंटीसेप्टिक क्रीम लगा सकते हैं।
तत्काल विशेषज्ञ के पास जाकर एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाएं।
अगस्त में नए मरीजों की स्थिति:
3619: जानवरों के काटने से घायल मरीज
2390: लोगों को घुमंतू कुत्तों ने काटा।
273: लोगों को पालतू कुत्तों ने काटा।
740: लोगों को बंदरों ने काटकर घायल किया।
183: को बिल्लियों ने काटा।
33: को चूहे, सियार समेत अन्य पशुओं ने काटा।
3152: लोगों के एक घाव।
467: मरीजों को मल्टीपल और गहरे जख्म मिले।
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जिला अस्पताल में रोजाना औसतन 550 मरीज एआरवी लगवाने आते हैं। इनमें नए मरीजों की संख्या करीब 250 हैं, बाकी के मरीज विभिन्न डोज लगवाने आ रहे हैं। सबसे ज्यादा बच्चे और बुजुर्गों की संख्या है। अगस्त में 3619 नए मरीज आए, इनमें से 3152 को एक घाव और 467 के दो से अधिक घाव मिले। इनके पेट, कमर, छाती यहां तक कि गर्दन-चेहरे पर भी घाव पाए गए। इनको एआरवी के साथ सीरम की डोज भी दी जा रही है। हालत गंभीर होने पर दो-तीन मरीजों को भर्ती भी करने की नौबत आ रही है।
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इनमें गलियों, सड़क और चौराहों पर घूमने वाले कुत्ते ज्यादा हमलावर हैं। इसमें 2663 लोगों को कुत्ते, 740 को बंदर, 183 को बिल्ली और 33 को चूहे, सियार, घोड़ा-गधा आदि पशुओं ने काटा। प्रमुख अधीक्षिका डॉ. सुनीता राठौर ने बताया कि कुत्ता काटने के मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा हैं। बढ़ते मरीजों को देखते हुए एआरवी का स्टॉक भी कर लिया है।
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नमक-मिर्च न लगाएं, संक्रमण बढ़ने का खतरा
एंटी रैबीज वैक्सीन के नोडल अधिकारी डॉ. मोहित बंसल ने बताया कि भूख-प्यास और बदलते मौसम में कुत्ते-बंदर हिंसक होकर हमला करते हैं। ऐसे में कई मरीज घाव पर नमक-मिर्च समेत अन्य घरेलू उपचार करते हैं, ये बेहद खतरनाक है। मिर्च-नमक से रक्तसंचार तेजी से बढ़ने से वायरस खून में तेजी से प्रवाहित होता है, इससे मर्ज और बढ़ जाता है। संक्रमण का खतरा भी है। 24 घंटे में एआरवी जरूर लगवानी चाहिए।
यह करें उपाय
घाव को पानी की तेज धार से साबुन से 10-15 मिनट तक धोएं।
घाव साफ करने के बाद एंटीसेप्टिक क्रीम लगा सकते हैं।
तत्काल विशेषज्ञ के पास जाकर एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाएं।
अगस्त में नए मरीजों की स्थिति:
3619: जानवरों के काटने से घायल मरीज
2390: लोगों को घुमंतू कुत्तों ने काटा।
273: लोगों को पालतू कुत्तों ने काटा।
740: लोगों को बंदरों ने काटकर घायल किया।
183: को बिल्लियों ने काटा।
33: को चूहे, सियार समेत अन्य पशुओं ने काटा।
3152: लोगों के एक घाव।
467: मरीजों को मल्टीपल और गहरे जख्म मिले।