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यूपी: स्कूलों की स्टार रेटिंग की खुलेगी पोल, पोर्टल के दावों की होगी पड़ताल; 31 अक्तूबर तक जांच
Wed, 21 Oct 2026 01:10 PM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Wed, 21 Oct 2026 01:10 PM IST
स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग 2026-27 के तहत आगरा में स्कूलों को मिली स्टार रेटिंग का भौतिक सत्यापन किया जाएगा। मूल्यांकनकर्ता पोर्टल पर दर्ज स्वच्छता, हरित वातावरण और जल-ऊर्जा संरक्षण संबंधी दावों की जांच कर 31 अक्तूबर तक रिपोर्ट दर्ज करेंगे।
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प्राइमरी स्कूल/परिषदीय स्कूल/सरकारी स्कूल (सांकेतिक)
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
विस्तार
स्वच्छ एवं हरित विद्यालय (एसएचवीआर रेटिंग ) 2026-27 में स्कूलों को मिली स्टार रेटिंग की हकीकत परखी जाएगी। दूसरे चरण में मूल्यांकनकर्ता विद्यालयों में पहुंचकर पोर्टल पर दर्ज स्वच्छता, हरित वातावरण, जल और ऊर्जा संरक्षण से संबंधित दावों का भौतिक सत्यापन करेंगे। इसके लिए 31 अक्तूबर तक की समय सीमा तय की गई है। संयुक्त शिक्षा निदेशक राकेश कुमार ने बताया कि मूल्यांकन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए विद्यालयों में मौके पर जाकर सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं।
मूल्यांकन कार्य के लिए जिलाधिकारी या उनके नामित अधिकारी की अध्यक्षता में जिलास्तरीय समीक्षा समिति गठित की जाएगी। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) समिति के सदस्य सचिव होंगे। जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) के साथ पंचायतीराज, स्वास्थ्य, आईसीडीएस और संबंधित विभागों के अधिकारी भी इसमें शामिल होंगे। शिक्षकों और दो प्रतिष्ठित गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों को भी समिति में जगह दी जाएगी।
विद्यालयों के सत्यापन के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के डायट प्रशिक्षुओं, एआरपी, एसआरजी और शिक्षक संकुल के साथ पंचायतीराज, राजस्व, मनरेगा, स्वास्थ्य और आईसीडीएस विभाग के कर्मियों और प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की मदद ली जाएगी। प्रत्येक मूल्यांकनकर्ता को अधिकतम 15 से 25 विद्यालय आवंटित किए जाएंगे। कोशिश होगी कि मूल्यांकनकर्ता को उसके आसपास या उसी ब्लॉक के विद्यालय दिए जाएं, ताकि समय पर सत्यापन पूरा हो सके।
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जिले में विद्यालयों की संख्या अधिक होने पर पांच स्टार वाले विद्यालयों को पहली, चार स्टार वाले विद्यालयों को दूसरी और तीन स्टार वाले विद्यालयों को तीसरी प्राथमिकता दी जाएगी। मूल्यांकनकर्ता को संबंधित विद्यालय में स्वयं पहुंचकर निरीक्षण करना होगा और पोर्टल पर दर्ज विवरणों का मौके पर मिलान करना होगा। पूरी प्रक्रिया एसएचवीआर वेब पोर्टल या मोबाइल एप के जरिये ऑनलाइन दर्ज की जाएगी। लॉगिन के लिए ओटीपी आधारित प्रमाणीकरण अनिवार्य रहेगा। राज्य परियोजना कार्यालय ने सभी मूल्यांकन कार्य 31 अक्तूबर 2026 तक पूरे करने के निर्देश दिए हैं। जिले में इसकी प्रगति की रोजाना समीक्षा जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में की जाएगी।
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मूल्यांकन कार्य के लिए जिलाधिकारी या उनके नामित अधिकारी की अध्यक्षता में जिलास्तरीय समीक्षा समिति गठित की जाएगी। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) समिति के सदस्य सचिव होंगे। जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) के साथ पंचायतीराज, स्वास्थ्य, आईसीडीएस और संबंधित विभागों के अधिकारी भी इसमें शामिल होंगे। शिक्षकों और दो प्रतिष्ठित गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों को भी समिति में जगह दी जाएगी।
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विद्यालयों के सत्यापन के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के डायट प्रशिक्षुओं, एआरपी, एसआरजी और शिक्षक संकुल के साथ पंचायतीराज, राजस्व, मनरेगा, स्वास्थ्य और आईसीडीएस विभाग के कर्मियों और प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की मदद ली जाएगी। प्रत्येक मूल्यांकनकर्ता को अधिकतम 15 से 25 विद्यालय आवंटित किए जाएंगे। कोशिश होगी कि मूल्यांकनकर्ता को उसके आसपास या उसी ब्लॉक के विद्यालय दिए जाएं, ताकि समय पर सत्यापन पूरा हो सके।
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जिले में विद्यालयों की संख्या अधिक होने पर पांच स्टार वाले विद्यालयों को पहली, चार स्टार वाले विद्यालयों को दूसरी और तीन स्टार वाले विद्यालयों को तीसरी प्राथमिकता दी जाएगी। मूल्यांकनकर्ता को संबंधित विद्यालय में स्वयं पहुंचकर निरीक्षण करना होगा और पोर्टल पर दर्ज विवरणों का मौके पर मिलान करना होगा। पूरी प्रक्रिया एसएचवीआर वेब पोर्टल या मोबाइल एप के जरिये ऑनलाइन दर्ज की जाएगी। लॉगिन के लिए ओटीपी आधारित प्रमाणीकरण अनिवार्य रहेगा। राज्य परियोजना कार्यालय ने सभी मूल्यांकन कार्य 31 अक्तूबर 2026 तक पूरे करने के निर्देश दिए हैं। जिले में इसकी प्रगति की रोजाना समीक्षा जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में की जाएगी।