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यूपी: मिठाई कितने दिन तक खाने लायक? रसमलाई 12 घंटे, सोनपापड़ी पांच दिन; काजू कतली खरीदने वाले भी ये रखें ध्यान
Fri, 16 Oct 2026 09:52 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 16 Oct 2026 09:52 AM IST
एफएसएसएआई की नई व्यवस्था के तहत प्रमुख मिठाई दुकानों पर निर्माण तिथि और बेस्ट बिफोर डेट के टैग लगाए जा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, शहर के 2500 से अधिक मिष्ठान्न भंडारों में से करीब 200 बड़े आउटलेट्स ही नियम का पालन कर रहे हैं।
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मिठाइयों की मियाद तय
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
आगरा में हलवाई की दुकानों पर मिठाइयों की मियाद तय कर दी गई है। काजू कतली आठ दिन तक खाई जा सकती है। जबकि रसमलाई 12 घंटे में खराब हो जाएगी। मावा की बर्फी तीन दिन चलेगी। बेसन के लड्डू, सोनपापड़ी व अन्य मैदा मिश्रित मिठाइयां अधिकतम पांच दिन तक खाने के लिए सुरक्षित हैं।
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खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की नई व्यवस्था बृहस्पतिवार से लागू हो गई। प्रमुख दुकानों पर खुली मिठाइयों की ट्रे पर निर्माण तिथि और उपयोग की अंतिम समय सीमा (बेस्ट बिफोर डेट) के टैग लग गए हैं। मावा व दूध से बनी रसमलाई जैसी मिठाइयों का उपभोग 12 घंटे के भीतर जरूरी है, जबकि काजू कतली 8 दिन तक सुरक्षित मानी गई है।
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हालांकि, इस व्यवस्था का लाभ फिलहाल सीमित है। शहर के 2500 से अधिक मिष्ठान्न भंडारों में से महज 200 बड़े और संगठित आउटलेट्स ही इस नियम का पालन कर रहे हैं। टेढ़ी बगिया, रामबाग, सिकंदरा, मधु नगर और लोहामंडी, शाहगंज, बेलनगंज, कमला नगर जैसे बाजारों में करीब 2000 हलवाइयों ने दुकानों पर रखीं मिठाइयों पर बेस्ट बिफोर डेट के टैग नहीं लगाए हैं।
मिलावटी मिठाइयों से मिलेगा छुटकारा
आगरा स्वीट्स एंड नमकीन मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजकुमार भगत ने कहा कि इस टैग से उपभोक्ताओं को बासी, खराब या मिलावटी मिठाइयों से सुरक्षा मिलेगी। दुकानदारों में गुणवत्ता बनाए रखने की जवाबदेही तय होती है। फेडरेशन ऑफ उद्योग व्यापार एसोसिएशन के अध्यक्ष हरेश अग्रवाल ने कहा कि छोटे व असंगठित दुकानदारों के पास खाद्य विशेषज्ञों या तापमान नियंत्रण (कोल्ड चेन) की व्यवस्था नहीं होती। सख्त नियमों के कारण असंगठित क्षेत्र में नियमों की अनदेखी या चोरी-छिपे पुराना स्टॉक खपाने की आशंका रहती है।
आगरा स्वीट्स एंड नमकीन मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजकुमार भगत ने कहा कि इस टैग से उपभोक्ताओं को बासी, खराब या मिलावटी मिठाइयों से सुरक्षा मिलेगी। दुकानदारों में गुणवत्ता बनाए रखने की जवाबदेही तय होती है। फेडरेशन ऑफ उद्योग व्यापार एसोसिएशन के अध्यक्ष हरेश अग्रवाल ने कहा कि छोटे व असंगठित दुकानदारों के पास खाद्य विशेषज्ञों या तापमान नियंत्रण (कोल्ड चेन) की व्यवस्था नहीं होती। सख्त नियमों के कारण असंगठित क्षेत्र में नियमों की अनदेखी या चोरी-छिपे पुराना स्टॉक खपाने की आशंका रहती है।
गिने चुने लोगों तक सीमित है खाद्य सुरक्षा
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के जिलाध्यक्ष अनिल शर्मा ने आरोप लगाए कि खाद्य सुरक्षा विभाग सैंपलिंग और सर्वे के नाम पर चुनिंदा दुकानों पर ही कार्रवाई करता है। शहर में 2000 से अधिक दुकानों की कभी जांच और सैंपलिंग नहीं होती। जब तक विभाग पूरे शहर में एक समान निगरानी और छोटे विक्रेताओं को जागरूक नहीं करेगा, तब तक उपभोक्ताओं की सेहत से खिलवाड़ होता रहेगा।
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के जिलाध्यक्ष अनिल शर्मा ने आरोप लगाए कि खाद्य सुरक्षा विभाग सैंपलिंग और सर्वे के नाम पर चुनिंदा दुकानों पर ही कार्रवाई करता है। शहर में 2000 से अधिक दुकानों की कभी जांच और सैंपलिंग नहीं होती। जब तक विभाग पूरे शहर में एक समान निगरानी और छोटे विक्रेताओं को जागरूक नहीं करेगा, तब तक उपभोक्ताओं की सेहत से खिलवाड़ होता रहेगा।