इंस्पेक्टर अरुण राय हत्याकांड: आरोपी महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा को हाईकोर्ट से जमानत, सात माह बाद होगी रिहाई
Jalaun News: जालौन के बहुचर्चित कुठौंद थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अरुण कुमार राय हत्याकांड में आरोपी महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। न्यायमूर्ति समीर जैन की एकल पीठ ने मामले के गुण-दोष के आधार पर उनकी जमानत याचिका मंजूर कर ली।
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जालौन जिले के बहुचर्चित कुठौंद थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अरुण कुमार राय हत्याकांड में आरोपी महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बहुत बड़ी राहत मिली है। न्यायमूर्ति समीर जैन की एकल पीठ ने मामले के गुण-दोष के आधार पर आरोपी महिला सिपाही की जमानत याचिका को मंजूर कर लिया है। करीब 07 महीने से न्यायिक हिरासत में जेल में बंद मीनाक्षी शर्मा की अब आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद जेल से रिहाई की राह साफ हो गई है।
सरकारी पिस्टल से लगी थी गोली, पत्नी ने दर्ज कराई थी हत्या की FIR
उल्लेखनीय है कि 05 दिसंबर 2025 को कुठौंद थाने में तैनात तत्कालीन थाना प्रभारी अरुण कुमार राय की संदिग्ध परिस्थितियों में सरकारी पिस्टल की गोली लगने से दर्दनाक मौत हो गई थी। घटना के अगले दिन मृतक इंस्पेक्टर की पत्नी माया राय की तहरीर पर महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया था।
जालौन पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विवेचना के बाद 07 दिसंबर को आरोपी मीनाक्षी शर्मा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बाद में जिला कारागार में अन्य बंदियों से हुए विवाद के चलते सुरक्षा कारणों से उन्हें झांसी जिला जेल स्थानांतरित कर दिया गया था, जहां वे अब तक निरुद्ध थीं।
383 पन्नों की चार्जशीट में 39 गवाह और वैज्ञानिक साक्ष्य शामिल
इलाहाबाद हाईकोर्ट में 04 मई 2026 को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने 22 जुलाई को जमानत मंजूर करने का फैसला सुनाया। इस सनसनीखेज हत्याकांड में पुलिस अपनी विवेचना पूरी कर आरोपी मीनाक्षी शर्मा के खिलाफ 383 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट जिला एवं सत्र न्यायालय में दाखिल कर चुकी है।
अभियोजन पक्ष ने मामले को मजबूत करने के लिए 39 गवाहों को सूचीबद्ध किया है, जिनमें पुलिस अधिकारी, फॉरेंसिक विशेषज्ञ और प्रत्यक्षदर्शी शामिल हैं। इसके साथ ही फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक-तकनीकी साक्ष्यों को भी चार्जशीट का आधार बनाया गया है।
हाईकोर्ट से मिली जमानत, सेशन कोर्ट में जारी रहेगा ट्रायल
हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बावजूद इस चर्चित हत्याकांड का कानूनी ट्रायल जिला एवं सत्र न्यायालय में लगातार जारी रहेगा। जमानत केवल कानूनी औपचारिकता के तहत रिहाई का जरिया है, जबकि अभियुक्त के दोषी या निर्दोष होने का अंतिम फैसला ट्रायल कोर्ट में साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर ही तय होगा।