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Lalitpur News: बिस्तर में सोते बालक को सांप ने डसा, मौत
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ललितपुर। घर में बिस्तर पर सोते समय सात वर्षीय कक्षा दो के छात्र प्रियांश निवासी ग्राम पटना थाना नाराहट को सांप ने डस लिया। हालत बिगड़ी तो परिजनों ने गांव में झाड़फूंक कराई। हालत में सुधार न होने पर मेडिकल कॉलेज लेकर आए। यहां से झांसी रेफर कर दिया गया। झांसी ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई। मृतक के परिजनों ने बताया कि प्रियांश के माता-पिता राजस्थान में मजदूरी करने के लिए गए हुए हैं। प्रियांश अपनी बहन रागनी के साथ दादा अमर और दादी गणेश के साथ घर पर रह रहा था। वह कक्षा दो में पढ़ाई कर रहा था। शनिवार की शाम को प्रियांश अपने दादा अमर और दादी गणेश सहित बहन रागिनी के साथ घर में सो गया था। रात करीब 11 बजे प्रियांश को सांप ने डस लिया। प्रियांश रोने लगा तो उसका दादा व दादी नींद से जाग गए। उन्होंने कमरे में रोशनी की तो बिस्तर में सांप दिखाई दिया। परिजन आनन-फानन में उसे गांव के ही पास में झाड़फूंक कराने ले गए। यहां कुछ देर झाड़फूंक कराने के बाद हालत में सुधार नहीं हुआ तो मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। यहां चिकित्सकों ने उसकी हालत गंभीर देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद झांसी रेफर कर दिया। झांसी ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई। परिजन वापस लौटकर आए और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई की। मृतक अपनी इकलौती बहन का इकलौता भाई था। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अनुराग अवस्थी ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। आगे की कार्रवाई की जा रही है।
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बोले डॉक्टर
जिला एपीडेमियोलॉजिस्ट डॉ. देशराज सिंह ने बताया कि सांप काटने की घटना पर मरीज को आश्वस्त करें कि घबराने से दिल की धड़कन तेज होती है और जहर तेजी से फैलता है। काटे गए हाथ या पैर को बिल्कुल वैसे ही रखें जैसे फ्रैक्चर में रखते हैं। इसे दिल के स्तर से नीचे रखें।सूजन आने से पहले मरीज की घड़ी, अंगूठी, कंगन या टाइट कपड़े तुरंत उतार दें। दंश वाले स्थान को हल्के साबुन और पानी से साफ करें और सूखे कपड़े से ढक दें। यदि संभव हो, तो सांप का रंग और आकार याद रखें, लेकिन उसे पकड़ने या मारने की बिल्कुल कोशिश न करें।
उन्होंने बताया कि झाड़-फूंक के चक्कर में तांत्रिक, ओझा या सपेरे के पास जाकर समय बर्बाद न करें। जहां सांप ने काटा है, उस जगह पर ब्लेड या चाकू से चीरा न लगाएं। मुंह से जहर चूसकर निकालने का प्रयास न करें, इससे संक्रमण और बढ़ जाता है। घाव के ऊपर रस्सी या तार से कसकर न बांधें, क्योंकि खून का दौरा रुकने से अंग खराब हो सकता है। बर्फ या केमिकल (जैसे पोटेशियम परमैंगनेट) का इस्तेमाल न करें।डॉक्टर से पूछे बिना कोई भी दवा (जैसे एस्पिरिन या इबुप्रोफेन) न दें, इससे ब्लीडिंग का खतरा बढ़ जाता है।
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बोले डॉक्टर
जिला एपीडेमियोलॉजिस्ट डॉ. देशराज सिंह ने बताया कि सांप काटने की घटना पर मरीज को आश्वस्त करें कि घबराने से दिल की धड़कन तेज होती है और जहर तेजी से फैलता है। काटे गए हाथ या पैर को बिल्कुल वैसे ही रखें जैसे फ्रैक्चर में रखते हैं। इसे दिल के स्तर से नीचे रखें।सूजन आने से पहले मरीज की घड़ी, अंगूठी, कंगन या टाइट कपड़े तुरंत उतार दें। दंश वाले स्थान को हल्के साबुन और पानी से साफ करें और सूखे कपड़े से ढक दें। यदि संभव हो, तो सांप का रंग और आकार याद रखें, लेकिन उसे पकड़ने या मारने की बिल्कुल कोशिश न करें।
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उन्होंने बताया कि झाड़-फूंक के चक्कर में तांत्रिक, ओझा या सपेरे के पास जाकर समय बर्बाद न करें। जहां सांप ने काटा है, उस जगह पर ब्लेड या चाकू से चीरा न लगाएं। मुंह से जहर चूसकर निकालने का प्रयास न करें, इससे संक्रमण और बढ़ जाता है। घाव के ऊपर रस्सी या तार से कसकर न बांधें, क्योंकि खून का दौरा रुकने से अंग खराब हो सकता है। बर्फ या केमिकल (जैसे पोटेशियम परमैंगनेट) का इस्तेमाल न करें।डॉक्टर से पूछे बिना कोई भी दवा (जैसे एस्पिरिन या इबुप्रोफेन) न दें, इससे ब्लीडिंग का खतरा बढ़ जाता है।
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