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Sant Kabir Nagar News: विशेषज्ञ के अभाव में बढ़ा रहा हड्डियों का दर्द
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सीएचसी सेमरियावां में उपचार कराने पहुंचे लोग। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
सेमरियावां। बीएमसीटी मार्ग से जुड़े सीएचसी सेमरियावां में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है। इस स्थिति में हादसों में घायलों और हड्डी के गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है।
ऑर्थोपेडिक चिकित्सक न होने से हड्डी रोगियों का उपचार नहीं हो पाता है। टूटी-हड्डी व घायलों के इलाज के पुख्ता इंतजाम न होने की हालत में गंभीर मरीज सीएचसी से सीधे जिला अस्पताल भेजे जाते हैं। मरीजों के इलाज का समय बर्बाद होता है। इससे तीमारदार भी परेशान होते हैं।
अस्पताल से हड्डी रोग के मरीज लौट रहे हैं। दरअसल बीएमसीटी मार्ग के चौड़ीकरण व राजमार्ग बनने से ट्रक, ट्रेलर जैसे भारी वाहनों का आना जाना बढ़ गया है। इसके अलावा सेमरियावां- टेमारहमत मार्ग, सेमरियावां- पिपरा प्रथम मार्ग, पैड़ी- दानोकुइयां मार्ग पर आए दिन दुर्घटनाएं भी होती रहती हैं। बाइक सवार, आटो रिक्शा व ई रिक्शा चालक भी सड़क पर तेज रफ्तार फर्राटा भरते हैं।
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क्षेत्र के इरशाद अहमद, संतोष प्रजापति, दयाराम, बाबुद्दीन चौधरी, मिस्बाहुद्दीन, रिजवान अहमद, अबूजर चौधरी, मोहम्मद आजम चौधरी आदि ने बताया कि लचर व्यवस्था के कारण सीएचसी सिर्फ रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एक्स-रे मशीन मुहैया हो गई है। घायल मरीजों को इलाज के लिए सीएचसी सेमरियावां लेकर पहुंचते हैं, यहां से जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
फर्स्ट रेफरल यूनिट का प्राप्त है दर्जा ः सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) का दर्जा प्राप्त है। यहां ओटी, एक्स-रे समेत जांच व दवाओं की बेहतर सुविधा है। मरीजों को भर्ती करने के लिए 30 बेडों की सुविधा भी है।
महिला सर्जन, फिजीशियन, गाइनी समेत विशेषज्ञ हैं लेकिन ऑर्थोपेडिक फिजीशियन व सर्जन की तैनाती न होने से मरीजों को हड्डी व जोड़ों के दर्द के उपचार के लिए जिला अस्पताल या निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। ओपीडी, वार्ड व ओटी से लेकर लेबर रूम सहित करीब 20 से ज्यादा कक्ष हैं। इसके अलावा डाॅक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों का आवास बना है। इसके अलावा लैब सेंटर भवन बना है।
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सेमरियावां। बीएमसीटी मार्ग से जुड़े सीएचसी सेमरियावां में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है। इस स्थिति में हादसों में घायलों और हड्डी के गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है।
ऑर्थोपेडिक चिकित्सक न होने से हड्डी रोगियों का उपचार नहीं हो पाता है। टूटी-हड्डी व घायलों के इलाज के पुख्ता इंतजाम न होने की हालत में गंभीर मरीज सीएचसी से सीधे जिला अस्पताल भेजे जाते हैं। मरीजों के इलाज का समय बर्बाद होता है। इससे तीमारदार भी परेशान होते हैं।
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अस्पताल से हड्डी रोग के मरीज लौट रहे हैं। दरअसल बीएमसीटी मार्ग के चौड़ीकरण व राजमार्ग बनने से ट्रक, ट्रेलर जैसे भारी वाहनों का आना जाना बढ़ गया है। इसके अलावा सेमरियावां- टेमारहमत मार्ग, सेमरियावां- पिपरा प्रथम मार्ग, पैड़ी- दानोकुइयां मार्ग पर आए दिन दुर्घटनाएं भी होती रहती हैं। बाइक सवार, आटो रिक्शा व ई रिक्शा चालक भी सड़क पर तेज रफ्तार फर्राटा भरते हैं।
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क्षेत्र के इरशाद अहमद, संतोष प्रजापति, दयाराम, बाबुद्दीन चौधरी, मिस्बाहुद्दीन, रिजवान अहमद, अबूजर चौधरी, मोहम्मद आजम चौधरी आदि ने बताया कि लचर व्यवस्था के कारण सीएचसी सिर्फ रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एक्स-रे मशीन मुहैया हो गई है। घायल मरीजों को इलाज के लिए सीएचसी सेमरियावां लेकर पहुंचते हैं, यहां से जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
फर्स्ट रेफरल यूनिट का प्राप्त है दर्जा ः सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) का दर्जा प्राप्त है। यहां ओटी, एक्स-रे समेत जांच व दवाओं की बेहतर सुविधा है। मरीजों को भर्ती करने के लिए 30 बेडों की सुविधा भी है।
महिला सर्जन, फिजीशियन, गाइनी समेत विशेषज्ञ हैं लेकिन ऑर्थोपेडिक फिजीशियन व सर्जन की तैनाती न होने से मरीजों को हड्डी व जोड़ों के दर्द के उपचार के लिए जिला अस्पताल या निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। ओपीडी, वार्ड व ओटी से लेकर लेबर रूम सहित करीब 20 से ज्यादा कक्ष हैं। इसके अलावा डाॅक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों का आवास बना है। इसके अलावा लैब सेंटर भवन बना है।