महाअष्टमी: मां विंध्यवासिनी के दर्शन कर निहाल हुए श्रद्धालु, देवी धाम में गूंजे जयकारे; अनुष्ठानों का चला दौर
शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी पर विंध्याचल में मां विंध्यवासिनी के दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। भक्तों ने गंगा स्नान के बाद माता के चरणों में शीश नवाया। अष्टभुजा पहाड़ पर त्रिकोण परिक्रमा हुई। देवी मंदिरों में हवन-पूजन और अनुष्ठान चलते रहे। प्रशासन और श्री विंध्य पंडा समाज श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे रहे।
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शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी पर रविवार को विंध्य धाम में मां विंध्यवासिनी के दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। माता के दिव्य स्वरूप का दर्शन कर भक्त निहाल हो उठे। श्रद्धालुओं ने मां के चरणों में शीश झुकाकर सुख-समृद्धि की कामना की। देवी धाम में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन और धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला दिनभर चलता रहा।
महाअष्टमी पर सुबह से ही देवी धाम में व्रती महिला-पुरुषों और साधकों के पहुंचने का क्रम शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई और इसके बाद मंदिर पहुंचकर मां भगवती की चौखट पर मत्था टेका। दर्शन-पूजन के बाद भक्तों ने हवन कुंड और मंदिर के गुंबद की परिक्रमा कर पुण्य अर्जित किया। फूल-पत्तियों और चुनरी से सजे देवी मंदिरों की छटा देखते ही बन रही थी।
मंदिर परिसर में रही सुरक्षा
मां विंध्यवासिनी के दर्शन के बाद श्रद्धालु अष्टभुजा पहाड़ पर विराजमान महाकाली माता, अष्टभुजी देवी और माता तारा देवी धाम पहुंचे। यहां भी भक्तों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद मांगा। नवरात्र की अष्टमी पर अष्टभुजा पहाड़ की त्रिकोण परिक्रमा के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही।
देवी धाम में पूरे दिन घंटा-घड़ियाल, शंख, नगाड़ा और शहनाई की धुनों के बीच मां भगवती के जयकारे गूंजते रहे। मंदिरों में दर्शन-पूजन के बाद श्रद्धालुओं ने विंध्याचल की गलियों में सजी दुकानों से जरूरत का सामान खरीदा। इससे स्थानीय दुकानदारों में भी उत्साह नजर आया।
नवरात्र मेले को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन सक्रिय रहा। वहीं, श्री विंध्य पंडा समाज के सदस्य भी श्रद्धालुओं की सेवा और सहयोग में जुटे रहे। महाअष्टमी पर विंध्य धाम का पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।