यूपी: आयुर्वेद डॉक्टर का दिया छुट्टी प्रमाण पत्र अब मान्य होगा, सभी संस्थानों पर लागू होंगे नियम; जानें खास
बीएचयू में चल रहे कार्यक्रम में इंटर्न डॉक्टरों को बताया गया कि आयुर्वेद चिकित्सक की ओर से जारी चिकित्साअवकाश और फिटनेस प्रमाण पत्र सभी संस्थानों में मान्य होंगे। अधिकारियों ने कहा कि प्रमाण पत्रों को मान्यता नहीं देने पर संबंधित संस्थान के खिलाफ आयोग स्तर से कार्रवाई की जाएगी। इंटर्न डॉक्टरों से नियमों का पालन करने की अपील की गई।
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आयुर्वेद चिकित्सकों की ओर से दिया जाने वाला चिकित्सा अवकाश, फिटनेस प्रमाण पत्र सभी शासकीय एवं प्राइवेट संस्थानों में मान्य होगा। इसको न मानने वालों के खिलाफ एनसीआईएसएम (भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग) की ओर से कार्रवाई की जा रही है। बीएचयू आयुर्वेद संकाय में इंटर्न डॉक्टरों के लिए चल रहे कार्यक्रम शीशीक्षा में प्रो.आनंद चौधरी ने इसकी जानकारी दी।
आयुर्वेद संकाय के रसशास्त्र विभाग के प्रो. आनंद चौधरी ने सभी इंटर्न डॉक्टरों को बताया कि अब आयुर्वेद चिकित्सक के द्वारा निर्गत चिकित्सा प्रमाण पत्र सरकारी सेवाओं, आरटीओ, बीमा कंपनी के साथ-साथ सभी प्राइवेट संस्थाओं में मान्य होगा। कहा कि यदि कोई संस्था इन प्रमाण पत्रों को मानने से इनकार करती है तो वह नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है।
संबंधित आयुर्वेद चिकित्सक जिसके द्वारा दिये गये प्रमाण पत्र को कोई सरकारी या प्राइवेट संस्था नहीं मानती है तो चिकित्सक तत्काल एनसीआईएसएम को इसकी जानकारी दे सकता है। इसके बाद एनसीआईएसएम की ओर से नोटिस जारी कर कारण पूछा जा रहा है।
प्रोफेसर आनन्द चौधरी ने आयुर्वेद औषधियों के भ्रामक विज्ञापनों के रोकथाम के लिये बने नियमों से इंटर्न को अवगत कराया । कहा कि एक बाजार व्यवस्था में भ्रामक विज्ञापनों से जनता का सामाजिक एवं आर्थिक शोषण निरन्तर हो रहा है। इंटर्न को यह संदेश दिया कि वो अपने चिकित्सकीय जीवन में बिना प्रमाण के, सिर्फ विज्ञापन के आधार वाली औषधियों का प्रयोग न करें।
कार्यक्रम में संकाय प्रमुख प्रोफेसर के एन मूर्ति ने इंटर्न को उपदेशित करते हुये कहा कि समाज में आयुर्वेद चिकित्सकों की जिम्मेदारी पुनः प्रतिष्ठित हो चुकी है अतः आयुर्वेद स्नातकों को एनसीआईएसएम द्वारा प्रदत्त सभी कर्तव्यों एवं अधिकारों का पूर्ण पालन करना चाहिये। कार्यक्रम में प्रो.सीएस पांडेय,डॉ. शिखा सिंह, डॉ. शालिनी आदि लोग मौजूद रहे।