फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Chamoli News ›   Pitru Tarpan Badrinath Foreign Devotees Reach for Pitru Tarpan at Brahma Kapal Shraddh Paksha

बदरीनाथ: श्राद्ध पक्ष में ब्रह्मकपाल पहुंचे विदेशी श्रद्धालु, विधि-विधान से कराया पितरों का तर्पण और पिंडदान

Wed, 30 Sep 2026 02:57 PM IST
Renu Saklani संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली Published by: Renu Saklani Updated Wed, 30 Sep 2026 02:57 PM IST
सार
Register For Event

श्राद्ध पक्ष में बदरीनाथ का ब्रह्मकपाल तीर्थ देश ही नहीं, विदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। रूस से पहुंचे आठ श्रद्धालुओं के दल ने यहां धार्मिक परंपराओं को समझा और विधि-विधान के साथ पितरों का तर्पण व पिंडदान कराया।

विज्ञापन
Pitru Tarpan Badrinath Foreign Devotees Reach for Pitru Tarpan at Brahma Kapal Shraddh Paksha
श्राद्ध पक्ष में बदरीनाथ के ब्रह्मकपाल पहुंचे विदेशी श्रद्धालु, - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

श्राद्ध पक्ष में पितरों के पिंडदान और तर्पण के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु बदरीनाथ धाम पहुंच रहे हैं। इस वर्ष पूर्व की अपेक्षा अधिक संख्या में श्रद्धालु ब्रह्मकपाल तीर्थ में पिंडदान करा रहे हैं।

विज्ञापन

उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और कर्नाटक सहित विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। विदेशी श्रद्धालु भी पूरे विधि-विधान से पितरों का तर्पण और पिंडदान करा रहे हैं। साथ ही ब्रह्मकपाल तीर्थ के धार्मिक महत्व की जानकारी ले रहे हैं।

विज्ञापन


ये भी पढे़ं...देहरादून: भाजपा पार्षद के घर सनसनीखेज वारदात, नौकर ने परिवार को विषाक्त पदार्थ पिलाकर की लूट, फरार

विज्ञापन
विज्ञापन

तीर्थ पुरोहित सुरेश हटवाल, संजय हटवाल, हरीश सती और मदन कोठियाल ने बताया कि मंगलवार को रूस से आठ श्रद्धालुओं का दल पिंडदान के लिए ब्रह्मकपाल पहुंचा।

बदरीनाथ में यहां पिंडदान व तर्पण करने का है विशेष महत्व, सात पीढ़ियों का होता है उद्धार

बदरीनाथ धाम में स्थित ब्रह्मकपाल में पिंडदान और तर्पण का विशेष महत्व है। मान्यता है कि यहां पिंडदान व तर्पण करने से सात पीढि़यों का उद्धार हो जाता है। मंगलवार (आज) से 15 दिनों तक यहां पिंडदान व तर्पण करने वालों का तांता लगा रहेगा।

बदरीनाथ धाम स्थित ब्रह्मकपाल को कपालमोचन तीर्थ भी कहा जाता है। मान्यता है कि जब भगवान ब्रह्मा का पांचवां सिर विचलित हो गया था तब भगवान शिव ने उसे काट दिया था जो बदरीनाथ के पास अलकनंदा नदी के किनारे गिरा। यह आज भी यहां पर शिला के रूप में अवस्थित है। बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने से लेकर बंद होने तक यहां देश से लोग पितरों का पिंडदान व तर्पण करने आते हैं लेकिन श्राद्ध पक्ष में यहां भीड़ लग जाती है।

ब्रह्मकपाल को लेकर मान्यता है कि यदि किसी व्यक्ति ने कभी भी पितरों का कहीं भी पिंडदान या तर्पण नहीं किया तो वह यहां आकर कर सकता है। यहां पिंडदान व तर्पण करने के बाद अन्यत्र कहीं भी पिंडदान या तर्पण नहीं करना चाहिए क्योंकि यह पिंडदान करने का श्रेष्ठ स्थान माना गया है। ब्रह्मकपाल के तीर्थ पुरोहित हरीश सती ने बताया कि श्राद्ध पक्ष में यहां पिंडदान व तर्पण करने वालों की भीड़ लगी रहती है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed