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नैनीताल: लोकायुक्त नियुक्ति मामले में हाईकोर्ट सख्त, सरकार को दो सप्ताह में प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश

Mon, 12 Oct 2026 09:10 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: Heera Updated Mon, 12 Oct 2026 09:10 PM IST
सार
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नैनीताल हाईकोर्ट ने लोकायुक्त की नियुक्ति के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद प्रदेश सरकार को दो सप्ताह के भीतर प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। 

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Uttarakhand High Court strict in Lokayukta appointment case
उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नैनीताल हाईकोर्ट ने लोकायुक्त की नियुक्ति किए जाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद प्रदेश सरकार को दो सप्ताह के भीतर प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कोर्ट ने लोकायुक्त कार्यालय में तैनात कर्मचारियों को इस वित्तीय वर्ष तक वेतन भुगतान करने को भी कहा है।

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सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कहा गया कि इस संबंध में नियम बना लिए गए हैं, सर्च कमेटी भी गठित की गई है, इसके लिए कुछ समय दिए जाने की मांग की गई।कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार हल्द्वानी निवासी रविशंकर जोशी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि राज्य सरकार ने अभी तक लोकायुक्त की नियुक्ति नही की। जबकि संस्थान के नाम पर वार्षिक दो से तीन करोड़ रुपए खर्च हो रहा है। जनहित याचिका में कहा कि कर्नाटक व मध्य प्रदेश में लोकायुक्त द्वारा भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्यवाही की जा रही है लेकिन उत्तराखंड में तमाम घोटाले हो रहे हैं। हर एक छोटे से छोटा मामला उच्च न्यायालय में लाना पड़ रहा है। जनहित याचिका में कहा गया है कि वर्तमान में राज्य की सभी जांच एजेंसी सरकार के अधीन है, जिसका पूरा नियंत्रण राज्य के राजनैतिक नेतृत्व के हाथों में है।

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वर्तमान में उत्तराखंड राज्य में कोई भी ऐसी जांच एजेंसी नही है जिसके पास यह अधिकार हो की वह बिना शासन की पूर्वानुमति के किसी भी राजपत्रित अधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार का मुकदमा पंजीकृत कर सके। स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के नाम पर प्रचारित किया जाने वाला विजिलेंस विभाग भी राज्य पुलिस का ही हिस्सा है, जिसका सम्पूर्ण नियंत्रण पुलिस मुख्यालय, सतर्कता विभाग या मुख्यमंत्री कार्यालय के पास ही रहता है। एक पूरी तरह से पारदर्शी, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच व्यवस्था राज्य के नागरिकों के लिए कितनी महत्वपूर्ण है। इसलिए रिक्त पड़े लोकायुक्त की नियुक्ति शीघ्र की जाए। जिससे राज्य में हो रहे भ्रष्टाचार पर रोक लग सके। याचिका में कहा कि यह पद वर्ष 2013 से खाली पड़ा है।

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