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Rishikesh News: नैक मूल्यांकन के लिए प्रमाण आधारित दस्तावेजीकरण पर जोर
Mon, 21 Sep 2026 07:47 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Mon, 21 Sep 2026 07:47 PM IST
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- पीएलएमएस परिसर में कार्यशाला, शिक्षकों को गुणवत्ता सुधार के बताए तरीके
- पं. ललित मोहन शर्मा परिसर में कार्यशाला आयोजित, शिक्षकों-कर्मचारियों से गुणवत्ता सुधार में सक्रिय भागीदारी का आह्वान
ऋषिकेश। नैक मूल्यांकन की तैयारियों के संबंध में श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के पं. ललित मोहन शर्मा परिसर में सोमवार को कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें शिक्षकों और कर्मचारियों को गुणवत्ता सुधार के साथ अपनी शैक्षणिक व शोध गतिविधियों का प्रमाण-आधारित दस्तावेजीकरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
आईक्यूएसी की ओर से मूल्यांकन और प्रत्यायन : उत्कृष्टता की ओर एक कदम विषय पर आयोजित कार्यशाला में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी के आईक्यूएसी निदेशक व मुख्य वक्ता प्रो. सुनील कबिया ने नैक मूल्यांकन के विभिन्न आयामों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संस्थागत गुणवत्ता सुधार के लिए गतिविधियां आयोजित करना ही पर्याप्त नहीं बल्कि उनका व्यवस्थित और प्रभावी दस्तावेजीकरण भी जरूरी है। उन्होंने शैक्षणिक, शोध, नवाचार और छात्र-केंद्रित गतिविधियों का प्रमाण आधारित रिकॉर्ड रखने पर जोर दिया। आईक्यूएसी निदेशक प्रो. जीके ढींगरा ने कहा कि नैक मूल्यांकन महज औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि संस्थागत गुणवत्ता और उत्कृष्टता में निरंतर सुधार का माध्यम है। इसके लिए प्रत्येक विभाग और शिक्षक की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। परिसर निदेशक प्रो. एमएस रावत ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थान की पहचान शिक्षण के साथ शोध, नवाचार, विद्यार्थियों के समग्र विकास और सामाजिक योगदान से होती है। उन्होंने एनएएसी की तैयारियों को नियमित शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। कार्यशाला में संकायाध्यक्ष विज्ञान प्रो. एसपी सती, संकायाध्यक्ष कला प्रो. पीके सिंह, विभिन्न एनएएसी मानदंडों के समन्वयक और संकाय सदस्य मौजूद रहे।
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- पं. ललित मोहन शर्मा परिसर में कार्यशाला आयोजित, शिक्षकों-कर्मचारियों से गुणवत्ता सुधार में सक्रिय भागीदारी का आह्वान
ऋषिकेश। नैक मूल्यांकन की तैयारियों के संबंध में श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के पं. ललित मोहन शर्मा परिसर में सोमवार को कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें शिक्षकों और कर्मचारियों को गुणवत्ता सुधार के साथ अपनी शैक्षणिक व शोध गतिविधियों का प्रमाण-आधारित दस्तावेजीकरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
आईक्यूएसी की ओर से मूल्यांकन और प्रत्यायन : उत्कृष्टता की ओर एक कदम विषय पर आयोजित कार्यशाला में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी के आईक्यूएसी निदेशक व मुख्य वक्ता प्रो. सुनील कबिया ने नैक मूल्यांकन के विभिन्न आयामों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संस्थागत गुणवत्ता सुधार के लिए गतिविधियां आयोजित करना ही पर्याप्त नहीं बल्कि उनका व्यवस्थित और प्रभावी दस्तावेजीकरण भी जरूरी है। उन्होंने शैक्षणिक, शोध, नवाचार और छात्र-केंद्रित गतिविधियों का प्रमाण आधारित रिकॉर्ड रखने पर जोर दिया। आईक्यूएसी निदेशक प्रो. जीके ढींगरा ने कहा कि नैक मूल्यांकन महज औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि संस्थागत गुणवत्ता और उत्कृष्टता में निरंतर सुधार का माध्यम है। इसके लिए प्रत्येक विभाग और शिक्षक की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। परिसर निदेशक प्रो. एमएस रावत ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थान की पहचान शिक्षण के साथ शोध, नवाचार, विद्यार्थियों के समग्र विकास और सामाजिक योगदान से होती है। उन्होंने एनएएसी की तैयारियों को नियमित शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। कार्यशाला में संकायाध्यक्ष विज्ञान प्रो. एसपी सती, संकायाध्यक्ष कला प्रो. पीके सिंह, विभिन्न एनएएसी मानदंडों के समन्वयक और संकाय सदस्य मौजूद रहे।
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