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सलाह: आपने क्या सहा होगा..., पुरानी पीढ़ी के संघर्ष को इतना भी कम न आंकें
Wed, 14 Oct 2026 05:24 AM IST
नितिन गौतम
अमर उजाला, न्यूयॉर्क
अमर उजाला, न्यूयॉर्क
Published by: नितिन गौतम
Updated Wed, 14 Oct 2026 05:24 AM IST
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आज की पीढ़ी को लगता है कि उनके जीवन में बहुत तनाव है और उन्हें बहुत कुछ झेलना पड़ता है। हालांकि स्तंभकार और लेखक डान कैडलक का दावा है कि पुरानी पीढ़ी ने भी अपने जीवन में बहुत कुछ झेला है।
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विस्तार
अपने जमाने में हम नदी पार करके स्कूल जाते थे या पहाड़ चढ़कर काम करने जाया करते थे, जैसे जुमले अपने बड़ों से सुनकर अक्सर आप शायद यही सोचते होंगे कि ये सब बातें बढ़ा-चढ़ाकर बताई जा रही हैं। जबकि असली संघर्ष तो वही है जो आज की युवा पीढ़ी झेल रही है। लेकिन हकीकत पर गौर करें तो यही पाएंगे कि हमारे माता-पिता या दादा-दादी ने अपने समय में अलग तरह के संघर्ष झेले थे।लेखक और स्तंभकार डान कैडलक ने अपने एक हालिया लेख में सोच के इस पीढ़ीगत अंतर को रेखांकित करते हुए बताया कि बेबी बूमर्स यानी 1950-60 के दशक में जन्मी पीढ़ी ने अपनी युवावस्था में जो कठिन समय देखा था वो किसी भी तरह से आज के युवाओं के संघर्ष से कमतर नहीं था। आज मिलेनियल्स और जेन-जी महंगाई, तनाव और एआई के कारण उपजी चिंताओं से जूझ रही है। आज की युवा पीढ़ी को यही लगता है कि वही सबसे कठिन वक्त का सामना कर रही है लेकिन कैडलक बाकायदा आंकड़ों का हवाला देते हुए बताते हैं कि बेबी बूमर्स ने क्या कुछ झेला।
नौकरियां तलाशना भी नहीं था कोई आसान काम
आज की तरह इंटरनेट, गूगल, लिंक्डइन या वर्क-फ्रॉम-होम की सुविधा नहीं थी। नौकरी के लिए अखबारों के छोटे विज्ञापन देखने पड़ते थे, दौड़ धूप होती थी।
महंगाई, जंग और अपराध...कम नहीं थी चुनौतियां
बेबी बूमर्स जब अपने 20 और 30 के दशक यानी युवावस्था में थे, तब महंगाई और मंदी एक बड़ा संकट था। 1980 के दशक की शुरुआत में अमेरिका में आर्थिक मंदी के दौरान होम लोन की ब्याज दरें बढ़कर 19% तक पहुंच गई थीं, जिससे पहली बार घर खरीदने वालों के लिए जीवन बेहद मुश्किल हो गया था। वियतनाम युद्ध और उस दौरान देश में चल रही सेना में अनिवार्य भर्ती का तनाव भी कम बड़ी चुनौती नहीं थी।
शीत युद्ध के दौरान परमाणु युद्ध का खतरा लगातार मंडरा रहा था। 1980 के दशक में हिंसक अपराधों और हत्याओं की दर आज के मुकाबले दोगुनी से अधिक थी।
आज सुविधाएं...फिर भी युवा पीढ़ी परेशान
- मौजूदा समय में तकनीक ने तमाम सुविधाएं दी हैं लेकिन बुनियादी समस्याएं बरकरार हैं। 1985 में एक नए घर की कीमत उस समय के युवाओं की सालाना कमाई का 4.6 गुना हुआ करती थी जो अब बढ़कर 7 गुना से भी अधिक हो गई है।
- उच्च शिक्षा के लिए भारी-भरकम लोन, महंगी स्वास्थ्य सेवाएं, बच्चों की परवरिश का खर्च भी पिछले कुछ दशकों में बेहद तेजी से बढ़ना, युवाओं को तनावग्रस्त बना रहा है। एआई के कारण नौकरियों को लेकर बढ़ती अनिश्चितता भी समस्याओं को बढ़ा रही है।
- कैडलक खुद बेबी बूमर्स पीढ़ी से आते हैं और युवाओं को यह समझाने के लिए हर इंसान को अपनी युवावस्था में संघर्ष झेलने ही पड़ते हैं, थोड़े मजाकिया अंदाज में कहते हैं-आप भी अपने नाती-पोतों को ऐसे ही किस्से सुनाएंगे।