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एक्सप्लेनर: अमेरिका को छोड़ हजारों किमी दूर यूरोप से क्यों गठबंधन बना रहा कनाडा, 'खास सदस्य' बनने का क्या मकसद
Fri, 18 Sep 2026 11:19 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Fri, 18 Sep 2026 11:19 AM IST
अमेरिका से तनातनी के बीच यूरोपीय संघ ने कनाडा को दिया 'सहयोगी सदस्य' बनने का प्रस्ताव। जानें इसके मायने, चुनौतियां और ट्रंप की ओर से दी गई भारी टैरिफ की धमकी की इनसाइड स्टोरी।
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कनाडा को ईयू का खास सदस्य बनने का प्रस्ताव।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
यूरोपीय आयोग (ईसी) की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन ने हाल ही में कहा है कि वह सहयोगी के तौर पर कनाडा को यूरोपीय संघ (ईयू) से जोड़ने के दरवाजे खोलना चाहती हैं। उर्सुला के मुताबिक, यह कदम कनाडा को ईयू का पूर्ण सदस्य बनाए बिना एक सहयोगी सदस्य का दर्जा देगा, जो कि दोनों के संबंधों में एक खास पहल होगी। मजेदार बात यह है कि पड़ोसी अमेरिका से लगातार खराब होते रिश्तों के बीच कनाडा के राष्ट्रपति मार्क कार्नी ने भी स्वीकार किया कि वह यूरोपीय संघ के साथ करीबी रिश्तों के मौके तलाश रहे हैं, वह भी देश को यूरोपीय संघ का पूर्ण सदस्य बनाए बिना।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष और कनाडा के राष्ट्रपति का दिया यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि यूरोपीय संघ में फिलहाल 27 सदस्य हैं और यह सभी पूर्ण और स्थायी हैं। हालांकि, कनाडा को पहली बार ईयू के सहयोगी सदस्य के तौर पर इस गठबंधन से जुड़ने की पेशकश हुई है, जो अपने आप में खास है।
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यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष और कनाडा के राष्ट्रपति का दिया यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि यूरोपीय संघ में फिलहाल 27 सदस्य हैं और यह सभी पूर्ण और स्थायी हैं। हालांकि, कनाडा को पहली बार ईयू के सहयोगी सदस्य के तौर पर इस गठबंधन से जुड़ने की पेशकश हुई है, जो अपने आप में खास है।
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर ईयू का महासागर के पार हजारों किलोमीटर दूर स्थित किसी देश को 'सहयोगी सदस्य' बनाने का प्रस्ताव क्या है और इसके अंतर्गत कनाडा से उसके रिश्ते कैसे होंगे? कनाडा इसके जरिए ईयू से क्या चाहता है? क्यों यह स्थिति दोनों ही पक्षों के लिए जटिल हो सकती है? अमेरिका ने अपने पड़ोसी देश को इस प्रस्तावित व्यवस्था का न्योता मिलने पर क्या कहा है? ईयू की सदस्यता का इंतजार कर रहे यूक्रेन जैसे बाकी देशों के लिए इसके क्या मायने हैं? आइये जानते हैं...
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वोन डेर लेयन की तरफ से कनाडा को सहयोगी सदस्य बनाने का प्रस्ताव दोनों पक्षों के बीच तनावपूर्ण वैश्विक माहौल में रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को गहरा करने के मकसद से पेश किया गया है। खासकर ऐसे समय में जब डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की वजह से यूरोपीय संघ और कनाडा दोनों के ही अमेरिका से रिश्ते तनावपूर्ण हुए हैं।
ये भी पढ़ें: ट्रंप की ‘51वें राज्य’ वाली जिद: कनाडा ईयू के करीब, कार्नी ने मिलाया हाथ; अब यूरोप को टैरिफ की धमकी
पहले जानें- ईयू का कनाडा को सहयोगी सदस्य बनाने का प्रस्ताव क्या है?
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वोन डेर लेयन की तरफ से कनाडा को सहयोगी सदस्य बनाने का प्रस्ताव दोनों पक्षों के बीच तनावपूर्ण वैश्विक माहौल में रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को गहरा करने के मकसद से पेश किया गया है। खासकर ऐसे समय में जब डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की वजह से यूरोपीय संघ और कनाडा दोनों के ही अमेरिका से रिश्ते तनावपूर्ण हुए हैं।
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- न्यूज एजेंसी- रॉयटर्स के मुताबिक, यूरोपीय संघ अब कनाडा के साथ एक साझा समृद्धि और आर्थिक क्षेत्र का निर्माण करना चाहता है। इसमें अहम खनिजों, रक्षा औद्योगिक क्षमता, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), कंप्यूटिंग, ऊर्जा सुरक्षा, अंतरिक्ष, और डिजिटल व्यापार में गहरा सहयोग शामिल है।
- दोनों पक्ष एक ऐसी व्यवस्था पर भी विचार कर रहे हैं जिससे कनाडाई नागरिकों को बिना वीजा के यूरोप में रहने और काम करने की सुविधा मिल सके। इसका मकसद अमेरिका और चीन के आर्थिक वर्चस्व का मुकाबला करना और लोकतंत्र, खुले बाजारों और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की रक्षा का होगा।
- कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने स्पष्ट किया कि कनाडा, ईयू की पूर्ण सदस्यता नहीं मांग रहा है, बल्कि वह एक अद्वितीय गठबंधन बनाना चाहते हैं, जो कनाडा की संप्रभुता को मजबूत करे। कार्नी का कहना है कि गठबंधन को क्या नाम दिया जाता है, उससे ज्यादा अहम सहयोग की वास्तविकता होगी।
यूरोपीय देशों की कनाडा से दूरी। (अनुमानित)
- फोटो : अमर उजाला
क्यों कनाडा के ईयू के सहयोगी सदस्य बनने की राह जटिल?
कनाडा के यूरोपीय संघ का सहयोगी सदस्य बनने की राह में कई कानूनी, राजनीतिक, नियामक और भौगोलिक चुनौतियां हैं।1. यूरोपीय संघ में सहयोगी सदस्य जैसा ढांचा ही नहीं
मौजूदा समय में यूरोपीय संघ की संधियों में 'सहयोगी सदस्य' जैसा कोई कानूनी दर्जा या स्थापित ढांचा मौजूद नहीं है। इस तरह के किसी भी नए दर्जे को मंजूरी देने या लागू करने के लिए ईयू के सभी 27 सदस्य देशों की सर्वसम्मति और घरेलू संसदों की ओर से इस फैसले को मंजूरी दिलाने की जरूरत होगी। हालांकि, यह काफी मुश्किल हो सकता है। उदाहरण के लिए- कनाडा और ईयू के बीच सीईटीए व्यापार समझौता होने के एक दशक बाद भी कई ईयू देशों ने इसे अब तक पूरी तरह से अपनी संसद से मंजूरी नहीं दिलवायी है।
2. ईयू सदस्य देशों का आंतरिक संशय
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वोन डेर लेयन ने यह प्रस्ताव अपनी क्षमता में दिया था, लेकिन अंतिम फैसला सदस्य देशों के हाथ में है। कई ईयू कूटनीतिज्ञों ने इस प्रस्ताव पर आश्चर्य जताया है कि सदस्य देशों से चर्चा किए बिना यह घोषणा की गई और इसका वास्तविक व्यावहारिक स्वरूप अभी पूरी तरह से अस्पष्ट है।
3. कनाडा को ईयू के कानून मानने होंगे, वोट का अधिकार नहीं मिलेगा
- ईयू के एकल बाजार में गहरी पहुंच पाने के लिए कनाडा को अपने नियमों और मानकों को ईयू कानूनों के अनुकूल बनाना होगा, जबकि ऐतिहासिक रूप से कनाडा के नियम उसके सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार अमेरिका से जुड़े रहे हैं।
- कनाडा के लिए सबसे जटिल बात यह रहेगी कि पूर्ण सदस्य न होने की वजह से उसे ईयू के नियमों का पालन तो करना पड़ेगा, लेकिन ईयू की नीतियों को तय करने या वोट देने का अधिकार नहीं मिलेगा।
4. अन्य उम्मीदवार देशों की असहमति
ईयू सदस्यता की कतार में खड़े उम्मीदवार देशों (जैसे यूक्रेन, अल्बानिया, मोंटेनेग्रो, मोल्दोवा) में यह संदेश जा सकता है कि कनाडा को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। यूक्रेन ने पहले भी इसी तरह के सहयोगी सदस्यता के विचार को अन्याय करने वाला बताया था, क्योंकि इसमें वोटिंग का अधिकार नहीं होता।
पड़ोसी देश को प्रस्तावित व्यवस्था का न्योता मिलने पर अमेरिका का क्या रुख?
चूंकि कनाडा की अर्थव्यवस्था और कूटनीति दशकों से मुख्य तौर पर अपने पड़ोसी देश अमेरिका पर निर्भर रही हैं, इसलिए अब उसे ईयू के सहयोगी सदस्य बनने का प्रस्ताव अमेरिका को कुछ खास रास नहीं आया। मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तो इसे लेकर आक्रामक रुख अपनाया है।डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को ईयू का सहयोगी सदस्य बनाने के विचार को हास्यास्पद करार दिया। ट्रंप ने धमकी दी कि यदि यूरोपीय संघ इस प्रस्ताव पर आगे बढ़ता है और अमेरिका को लगता है कि यह हमारे खिलाफ एक शत्रुतापूर्ण कदम है, तो हम यूरोप पर बहुत भारी आयात शुल्क (टैरिफ) लगाएंगे या यूरोप के साथ कई मामलों में व्यापार पूरी तरह रोक देंगे। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, "अगर यह अच्छी नीयत से किया गया है तो ठीक है, लेकिन यदि इसके पीछे खराब नीयत है तो हम यूरोप पर बहुत भारी टैरिफ लगाएंगे।"
अमेरिका के रुख पर ईयू-कनाडा का क्या जवाब?
अमेरिका को ईयू-कनाडा का जवाब।
- फोटो : अमर उजाला
ईयू की सदस्यता का इंतजार कर रहे बाकी देशों के लिए इसके क्या मायने?
यूरोपीय संघ ने कहा है कि वह 2030 तक नए सदस्यों को शामिल कर सकता है। इस दौड़ में फिलहाल मोंटेनेग्रो, अल्बानिया, यूक्रेन और मोल्दोवा सबसे आगे चल रहे हैं। इनकी आवेदन प्रक्रिया पर ईयू में शामिल देश विचार कर रहे हैं।ये भी पढ़ें: कनाडा-ईयू की नजदीकी से भड़के ट्रंप: यूरोपीय देशों को टैरिफ की नई धमकी में क्या? कहा- व्यापार भी रोकेगा अमेरिका
यूरोप मामलों के जानकारों के मुताबिक, यूं तो कनाडा और ईयू के बीच गहरे गठबंधन की यह कोशिश यूरोपीय उम्मीदवार राज्यों के ईयू में शामिल होने की आधिकारिक प्रक्रिया को सीधे तौर पर प्रभावित नहीं करेगी। हालांकि, उम्मीदवार देशों को यह लग सकता है कि कनाडा को बिना लंबी औपचारिक प्रक्रियाओं से गुजरे खास तरजीह दी जा रही है। यह उनके लिए नाराजगी की वजह बन सकता है।
सदस्यता के इस पूरे मुद्दे का एक पक्ष यह है कि ईयू की पूर्ण सदस्यता केवल यूरोपीय देशों को ही मिल सकती है, जिसके तहत उन्हें ईयू के लगभग 18 ट्रिलियन यूरो वाले एकल बाजार, ईयू की बैठकों में वोटिंग और प्रतिनिधित्व, ईयू फंडिंग, तथा यूरोपीय कोर्ट ऑफ जस्टिस (ईसीजे) तक कानूनी पहुंच मिलती है। चूंकि कनाडा भौगोलिक तौर पर किसी तरह यूरोप से नहीं जुड़ा है, इसलिए वह पूर्ण सदस्यता का दावेदार नहीं हो सकता है।
वहीं, एक सहयोगी सदस्य के तौर पर उसे वह अधिकार नहीं मिलेंगे, जो पूर्ण सदस्यों को मिलते हैं। जैसे ईयू के प्रस्तावों पर वोटिंग का अधिकार। ऐसे में सहयोगी सदस्य के तौर पर कनाडा को इस गठबंधन को सिर्फ बाहर से ही देखने का मौका मिलेगा और इसकी नीति निर्धारण में वह फैसला नहीं कर सकेगा।
सदस्यता के इस पूरे मुद्दे का एक पक्ष यह है कि ईयू की पूर्ण सदस्यता केवल यूरोपीय देशों को ही मिल सकती है, जिसके तहत उन्हें ईयू के लगभग 18 ट्रिलियन यूरो वाले एकल बाजार, ईयू की बैठकों में वोटिंग और प्रतिनिधित्व, ईयू फंडिंग, तथा यूरोपीय कोर्ट ऑफ जस्टिस (ईसीजे) तक कानूनी पहुंच मिलती है। चूंकि कनाडा भौगोलिक तौर पर किसी तरह यूरोप से नहीं जुड़ा है, इसलिए वह पूर्ण सदस्यता का दावेदार नहीं हो सकता है।
वहीं, एक सहयोगी सदस्य के तौर पर उसे वह अधिकार नहीं मिलेंगे, जो पूर्ण सदस्यों को मिलते हैं। जैसे ईयू के प्रस्तावों पर वोटिंग का अधिकार। ऐसे में सहयोगी सदस्य के तौर पर कनाडा को इस गठबंधन को सिर्फ बाहर से ही देखने का मौका मिलेगा और इसकी नीति निर्धारण में वह फैसला नहीं कर सकेगा।