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चिंताजनक: खेती-किसानी से बच्चों की परवरिश तक, आंख मूंदकर एआई पर भरोसा कर रहे लोग; चीन में क्यों बढ़ी चिंता?
Sat, 03 Oct 2026 06:42 AM IST
निर्मल कांत
यान झुआंग, द न्यूयॉर्क टाइम्स, बीजिंग।
यान झुआंग, द न्यूयॉर्क टाइम्स, बीजिंग।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 03 Oct 2026 06:42 AM IST
चीन में खेती से लेकर बच्चों की परवरिश और रिश्तों तक एआई पर बढ़ती निर्भरता चिंता बढ़ा रही है। एआई की गलत सलाह से फसल बर्बाद होने और लोगों के मुसीबत में पड़ने के मामले भी सामने आए हैं। आखिर एआई पर बढ़ता यह भरोसा चीन के लिए नई चुनौती कैसे बन गया? पढ़िए इस रिपोर्ट में।
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चीन में एआई की अंधी लत पर सरकार का ब्रेक...
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की वैश्विक दौड़ में अमेरिका को पछाड़कर नंबर-1 बनने का सपना देख रहे चीन के सामने अब एक नया और अप्रत्याशित संकट खड़ा हो गया है। यह संकट किसी तकनीक की नाकामी का नहीं, बल्कि चीनी समाज में एआई पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता का है।
चीन में लोग खेती-किसानी से लेकर बच्चों की परवरिश, मनोरंजन और यहां तक कि वर्चुअल रोमांस तक के लिए आंख मूंदकर एआई का इस्तेमाल करने लगे हैं। कम्युनिस्ट पार्टी को डर सताने लगा है कि एआई की यह बेलगाम लत इंसानी रिश्तों को खोखला कर रही है, युवाओं के सोचने-समझने की क्षमता छीन रही है और देश में सामाजिक स्थिरता के लिए सीधा खतरा बन रही है। नतीजतन, चीनी सरकार ने अब एआई के उपयोग और दुरुपयोग पर कड़े नियम व न्यायिक दिशा-निर्देश लागू करने शुरू कर दिए हैं।
बढ़ते खतरे को देखते हुए टिकटॉक की पेरेंट कंपनी बाइटडांस के मशहूर एआई असिस्टेंट 'दौबाओ' पर बच्चों की लत को देखते हुए सरकार ने नाबालिगों के साथ वर्चुअल रिलेशनशिप बनाने वाले फीचर्स पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया, जिससे कंपनी को अपने 'वर्चुअल कंपेनियन' फीचर को बंद करना पड़ा।
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एआई चैटबॉट की सलाह पर किसान ने खेत में डाला कीटनाशक, 25 एकड़ फसल जली
इसका नतीजा यह हुआ कि पूर्वी अनहुई प्रांत के एक 67 वर्षीय किसान वू ने एआई चैटबॉट की सलाह पर अपनी फसल में ऐसा खरपतवारनाशक छिड़क दिया, जिससे उसकी 25 एकड़ तिल की फसल जलकर राख हो गई।
20 फीसदी बच्चों ने कहा इन्सानों से बात नहीं करनी
'चाइना यूथ एंड चिल्ड्रंस रिसर्च सेंटर' द्वारा 8,500 से अधिक नाबालिगों पर किए गए एक सर्वेक्षण में सामने आया कि 20% से ज्यादा बच्चे अब केवल एआई से चैट करना चाहते हैं और असली इन्सानों से बात करने से कतराते हैं। कई परिवारों में बच्चे इतने ज्यादा चैटबॉट्स के आदी हो चुके हैं कि वे अपने माता-पिता से शिकायत करते हैं कि वे भी एआई की तरह हमेशा मीठी और उनकी मर्जी की भाषा में ही बात करें।
ये भी पढ़ें: एक्सप्लेनर: 30 साल बाद मिला मृत्युदंड असफल; दो जहरीले इंजेक्शन के बाद भी कैसे बची क्रिस्टा पाइक?
इन घटनाओं ने चिंता में डाला
कम्युनिस्ट पार्टी की चेतावनी
कम्युनिस्ट पार्टी यह समझ रही है कि वह तकनीक को जितना आगे बढ़ाएगी, उतनी ही नई सामाजिक चुनौतियां सामने आएंगी। पार्टी हर उस चीज को लेकर बेहद संवेदनशील है जो सामाजिक ताने-बाने या रोजगार बाजार को हिला सकती है।
n पार्टी के आधिकारिक मुखपत्र 'पीपुल्स डेली' ने संपादकीय लिखकर चेतावनी दी है कि कृषि और स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में केवल आधिकारिक स्रोतों से प्रमाणित एआई डेटा का ही इस्तेमाल होना चाहिए। अखबार ने किसानों को एआई के सुझावों पर आंख मूंदकर अमल करने के बजाय 'क्रिटिकल थिंकिंग' (तार्किक सोच) अपनाने की सलाह दी है।
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चीन में लोग खेती-किसानी से लेकर बच्चों की परवरिश, मनोरंजन और यहां तक कि वर्चुअल रोमांस तक के लिए आंख मूंदकर एआई का इस्तेमाल करने लगे हैं। कम्युनिस्ट पार्टी को डर सताने लगा है कि एआई की यह बेलगाम लत इंसानी रिश्तों को खोखला कर रही है, युवाओं के सोचने-समझने की क्षमता छीन रही है और देश में सामाजिक स्थिरता के लिए सीधा खतरा बन रही है। नतीजतन, चीनी सरकार ने अब एआई के उपयोग और दुरुपयोग पर कड़े नियम व न्यायिक दिशा-निर्देश लागू करने शुरू कर दिए हैं।
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बढ़ते खतरे को देखते हुए टिकटॉक की पेरेंट कंपनी बाइटडांस के मशहूर एआई असिस्टेंट 'दौबाओ' पर बच्चों की लत को देखते हुए सरकार ने नाबालिगों के साथ वर्चुअल रिलेशनशिप बनाने वाले फीचर्स पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया, जिससे कंपनी को अपने 'वर्चुअल कंपेनियन' फीचर को बंद करना पड़ा।
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एआई चैटबॉट की सलाह पर किसान ने खेत में डाला कीटनाशक, 25 एकड़ फसल जली
इसका नतीजा यह हुआ कि पूर्वी अनहुई प्रांत के एक 67 वर्षीय किसान वू ने एआई चैटबॉट की सलाह पर अपनी फसल में ऐसा खरपतवारनाशक छिड़क दिया, जिससे उसकी 25 एकड़ तिल की फसल जलकर राख हो गई।
20 फीसदी बच्चों ने कहा इन्सानों से बात नहीं करनी
'चाइना यूथ एंड चिल्ड्रंस रिसर्च सेंटर' द्वारा 8,500 से अधिक नाबालिगों पर किए गए एक सर्वेक्षण में सामने आया कि 20% से ज्यादा बच्चे अब केवल एआई से चैट करना चाहते हैं और असली इन्सानों से बात करने से कतराते हैं। कई परिवारों में बच्चे इतने ज्यादा चैटबॉट्स के आदी हो चुके हैं कि वे अपने माता-पिता से शिकायत करते हैं कि वे भी एआई की तरह हमेशा मीठी और उनकी मर्जी की भाषा में ही बात करें।
ये भी पढ़ें: एक्सप्लेनर: 30 साल बाद मिला मृत्युदंड असफल; दो जहरीले इंजेक्शन के बाद भी कैसे बची क्रिस्टा पाइक?
इन घटनाओं ने चिंता में डाला
- एआई ऐप की पहचान पर भरोसा कर जंगली मशरूम खाया। जहरीले मशरूम से लोग बीमार; नौ साल का बच्चा आठ दिन आईसीयू में भर्ती रहा।
- एआई के दिए निर्देशों पर बिना जरूरी सामान के पहाड़ पर चढ़ा ट्रैकर। अगस्त में पहाड़ी चोटी पर फंसा, रेस्क्यू टीम ने जान बचाई।
- बिना कैमरा, क्रू और इंसानी कलाकारों के मिनटों में बने एआई शोज। 90% कंटेंट एआई जनरेटेड।
कम्युनिस्ट पार्टी की चेतावनी
कम्युनिस्ट पार्टी यह समझ रही है कि वह तकनीक को जितना आगे बढ़ाएगी, उतनी ही नई सामाजिक चुनौतियां सामने आएंगी। पार्टी हर उस चीज को लेकर बेहद संवेदनशील है जो सामाजिक ताने-बाने या रोजगार बाजार को हिला सकती है।
n पार्टी के आधिकारिक मुखपत्र 'पीपुल्स डेली' ने संपादकीय लिखकर चेतावनी दी है कि कृषि और स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में केवल आधिकारिक स्रोतों से प्रमाणित एआई डेटा का ही इस्तेमाल होना चाहिए। अखबार ने किसानों को एआई के सुझावों पर आंख मूंदकर अमल करने के बजाय 'क्रिटिकल थिंकिंग' (तार्किक सोच) अपनाने की सलाह दी है।