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एक्सप्लेनर: दुश्मन की सेना से चीन के इंसान जैसे रोबोट करेंगे युद्ध, ड्रैगन के खतरनाक इरादे का कैसे हुआ खुलासा?

Mon, 07 Sep 2026 05:53 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 07 Sep 2026 05:53 PM IST
सार
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चीन के ह्यूमनॉइड रोबोट्स अब जंग के मैदान में उतरने को तैयार। पीएलए के दस्तावेज, इंसान जैसे दिखने वाले रोबोट्स और 1.9 लाख पेटेंट्स। जानिए ड्रैगन की रोबोटिक सेना का सच, विशेषज्ञों की राय और इसका दुनिया पर असर।

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China Humanoid Robots Army PLA Military Warfare Technology Explainer Behind Enemy Lines
चीन की ह्यूमनॉइड रोबोट सेना। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इस साल फरवरी में एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। इस वीडियो के चीन के होने का दावा करते हुए कहा गया था कि चीन की सेना- पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) अब इंसान जैसे दिखने वाले रोबोट्स, जिन्हें 'ह्यूमनॉइड रोबोट्स' भी कहा जाता है, को असॉल्ट राइफल जैसे हथियार चलाने की ट्रेनिंग दे रही है। इस वायरल पोस्ट में यह भी दावा था कि चीन ने आधिकारिक तौर पर रोबोट्स को सैन्य सेवा के लिए तैयार करना शुरू कर दिया है। इस वीडियो के तब असली होने की पुष्ट नहीं हुई। कुछ चर्चित चैटबॉट्स ने इसे एआई से जेनरेटेड वीडियो तक बताया था। खुद चीन ने इस वायरल वीडियो या रोबोट्स के सैन्य इस्तेमाल को लेकर कुछ नहीं कहा है। हालांकि, उसके एक कदम ने जंग के लिए रोबोट्स इस्तेमाल करने की मंशा और तैयारियों का खुलासा कर दिया है। 
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चीन के किस कदम ने उसकी रोबोटिक क्षेत्र में बढ़त और इसके सैन्य युद्ध में इस्तेमाल की मंशा को दुनिया के सामने रख दिया है? मौजूदा समय में चीन रोबोट्स के इस्तेमाल में कितना आगे निकल चुका है? सैन्य स्तर पर ड्रैगन अभी रोबोट्स के इस्तेमाल में कहां है? चीन की इस बढ़त को लेकर विशेषज्ञों और सैन्य जानकारों का क्या कहना है? आइये जानते हैं...
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चीन के किस कदम ने रोबोट्स के युद्ध में इस्तेमाल किए जाने की मंशा की पोल खोली?

दरअसल, हुआ कुछ यूं कि चीन में पिछले महीने वर्ल्ड ह्यूमनॉइड रोबोट गेम्स का आयोजन किया गया। इसमें इंसान जैसे दो पैरों पर चलने वाले रोबोट्स के कई एथलेटिक खेल रखे गए थे। रोबोट्स ने इनमें अपनी दौड़ने, कूदने और बॉक्सिंग क्षमताओं का प्रदर्शन किया था। इतना ही नहीं रोबोट्स ने अपनी नाचने और स्केटिंग की क्षमताएं भी प्रदर्शित कीं। गेम्स के कुछ वीडियो में तो एक वर्ग के रोबोट को 100 मीटर की रेस में उसैन बोल्ट से तेज दौड़ते देखा गया था। इन वीडियोज की दुनियाभर में काफी चर्चा भी हुई। 

हालांकि, जैसे ही यह गेम्स खत्म हुए। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के आधिकारिक अखबार ने इन्हें लेकर एक टिप्पणी छापी। अखबार में छपी टिप्पणी में रिसर्चर्स से आह्वान किया गया कि वे रोबोट्स के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक और कटिंग-एज तकनीक को लैबोरेट्री से जल्द सैन्य ट्रेनिंग संस्थानों तक पहुंचाएं, ताकि 'रोबोटिक लड़ाके' तैयार किए जा सकें।

ये भी पढ़ें: अब सेना में तकनीक का इस्तेमाल: रोबोट सैनिकों की फौज तैयार कर रहा चीन, भविष्य के युद्ध की खतरनाक तस्वीर दिखाई

China Humanoid Robots Army PLA Military Warfare Technology Explainer Behind Enemy Lines
चीन में ह्यूमनॉइड रोबोट्स बनाने की जबरदस्त क्षमता। - फोटो : अमर उजाला
चीन की सेना के अपने अखबार में खुले तौर पर युद्ध के लिए ह्यूमनॉइड रोबोट्स की मांग किए जाने का खुलासा न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की ओर से किया गया है। एजेंसी ने चीन की सेना, अकादमिक स्टडीज, पेटेंट्स, आधिकारिक प्रकाशन, सरकारी रिकॉर्ड्स और रक्षा से जुड़े सैकड़ों दस्तावेजों की समीक्षा के बाद दावा किया है कि चीन के रक्षा संस्थान ह्यूमनॉइड रोबोट्स के सैन्य इस्तेमाल पर रिसर्च को बढ़ा रहे हैं और जल्द ही उनकी युद्ध के लिए तैनाती की तैयारी में भी जुट गए हैं। 


मौजूदा समय में चीन रोबोट्स बनाने-इस्तेमाल में कितना आगे?

1. ह्यूमनॉइड रोबोट्स निर्माण में एकछत्र राज
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चीन में ह्यूमनॉइड रोबोट्स बनाने की जबरदस्त क्षमता। - फोटो : अमर उजाला
इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रोबोटिक्स के मुताबिक, चीन दुनिया का सबसे बड़ा औद्योगिक रोबोट बाजार बना हुआ है और साल 2024 में दुनिया भर में स्थापित हुए कुल रोबोटों में से आधे से ज्यादा हिस्सेदारी अकेले चीन की थी। विशेषज्ञों के मुताबिक, इसकी एक वजह यह है कि चीन की ह्यूमनॉइड रोबोट्स बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी यूनिट्री अपना जी1 वर्जन महज 16,000 डॉलर (करीब 15,00,000 रुपये) में बेचती है, जो पश्चिमी देशों में बन रहे रोबोट्स की तुलना में लगभग 10 गुना सस्ता है।

2. डेटा संग्रह का मजबूत बुनियादी ढांचा 

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चीन में ह्यूमनॉइड रोबोट्स बनाने की जबरदस्त क्षमता। - फोटो : अमर उजाला
चीन की ई-कॉमर्स दिग्गज कंपनी JD.com ने अपने एक लाख कर्मचारियों और पांच लाख अन्य लोगों को अपनी शारीरिक गतिविधियों को ट्रैक करने की अनुमति के लिए भुगतान करना शुरू किया है, ताकि आने वाले दो साल में एक करोड़ घंटे का वास्तविक इंसानी मूवमेंट डेटा जुटाया जा सके और रोबोट्स के दिमाग यानी एआई मॉडल को ज्यादा स्मार्ट बनाया जा सके।


सैन्य स्तर पर ड्रैगन अभी रोबोट्स के इस्तेमाल में कहां है?

विशेषज्ञों की मानें तो चीन सिर्फ खेल, डांस या होटलों में खाना सर्व करने के लिए ही नहीं, बल्कि सैन्य स्तर पर काफी तेजी से प्रगति कर चुका है। ऑस्ट्रेलियाई रक्षा बल से रिटायर हुए ब्रिगेडियर इयान लैंगफोर्ड के मुताबिक, अब यह कुछ ही समय की बात है, जब चीन अपनी सेना में इंसानों की जगह रोबोट्स को तैनात कर देगा। 

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ऑस्ट्रेलियाई सेना के पूर्व ब्रिगेडियर और रक्षा विशेषज्ञ इयान लैंगफोर्ड। - फोटो : अमर उजाला
1. जमीनी तैनाती और सैन्य अभ्यास में चीन कहां?
  • पीएलए शहरी युद्ध अभ्यास में मशीन गन से लैस चार पैरों वाले रोबोटिक कुत्तों, पक्षी जैसे दिखने वाले ड्रोन्स के बड़े झुंडों और मानवरहित जमीनी वाहनों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहा है। पीएलए शहरों की तंग गलियों, बेसमेंट और छतों पर टोह लेने और हमला करने के लिए एआई से चलने वाले भेड़ियों (वुल्फ पैक्स) का भी परीक्षण कर रहे हैं, जिससे आपराधिक घटनाओं को रोकने का काम भी रोबोट्स ही कर सकें।
  • चीन की विवादित हिमालयी सीमा और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास टर्मिनेटर जैसे शुरुआती ऑटोमेटेड रोबोट्स को सेना की पेट्रोलिंग के लिए तैनात किए जाने की खबरें हैं। इसके अलावा चीन-वियतनाम सीमा पर रसद, सीमा प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण जैसे असैन्य कार्यों के लिए बैटरी तकनीक से लैस यूबीटेक वॉकर एस2 जैसे ह्यूमनॉइड रोबोट्स का पायलट प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है।
ये भी पढ़ें: 'सीमा पर चीनी रोबोट से लड़ना पड़ सकता है' : मनीष तिवारी बोले-भारत रहे सतर्क; भाजपा ने राहुल को घेरा

ह्यूमनॉइड रोबोट्स के सैन्य इस्तेमाल की चीन की मंशा पर क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट (एईआई) के फेलो रायन फेदासियुक का कहना है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रोबोटिक्स को देश के आर्थिक विकास मॉडल का केंद्र बना दिया है। आज रोबोटिक्स से जुड़ी सभी बड़ी तकनीक और रोबोट्स के उत्पादन में चीन अग्रणी बना है और पश्चिमी देश इस मामले में पिछड़ रहे हैं।

लंदन के इंपीरियल कॉलेज के प्रोफेसर थ्रिशानंत ननायक्कारा ने बीजिंग रोबोटिक्स गेम्स 2026 में चीनी रोबोट्स की शारीरिक प्रगति को आश्चर्यजनक बताया। 

हालांकि, नेशनल रोबोटारियम (एडिनबर्ग) के प्रमुख इंगो केलर और अन्य विशेषज्ञों का मानना है कि ये रोबोट अभी सिर्फ विशिष्ट कार्यों, जैसे- तेज दौड़ने या मुक्केबाजी में ही माहिर हैं, न कि सामान्य व्यावहारिक कामों में। खुद यूनिट्री के संस्थापक वांग जिंगजिंग ने माना है कि रोबोटिक्स का चैटजीपीटी मूमेंट, यानी जब रोबोट आम घरों या कामों में पूरी तरह स्वायत्त और जरूरी हो जाएंगे, आने में अभी  लगभग एक दशक का समय और लगेगा।

शंघाई की रोबोटिक्स कंपनी एजी बॉट (AG BOT) के रोबोटिक्स इंजीनियर यांग कुन, जिनका एथलेटिक रोबोट ए3 मुक्केबाजी स्पर्धा में शामिल हुआ था, ने खुलकर स्वीकार किया है कि उनकी कंपनी का मकसद सैन्य संघर्षों के लिए रोबोट्स को अंतिम रूप देना है। 

China Humanoid Robots Army PLA Military Warfare Technology Explainer Behind Enemy Lines
चीन में ह्यूमनॉइड रोबोट्स बनाने की जबरदस्त क्षमता। - फोटो : अमर उजाला
उधर इयान लैंगफोर्ड का कहना है कि चीन अपनी गिरती जन्मदर और कम होती मैनपावर की कमी से निपटने के लिए रोबोटिक्स को इंसानी सैनिकों के एक विकल्प के तौर पर देख रहा है। भविष्य की सैन्य ताकतों को डिजाइन करने में यह दृष्टिकोण अब बेहद अहम हो चुका है। ब्रिगेडियर लैंगफोर्ड का कहना है कि जब सैन्य कमांडर इंसानों के बजाय रोबोटों को सीमा पर भेजेंगे, तब इंसानों के जीवन को बचाने और युद्ध की गरिमा बनाए रखने की चिंता काफी कम हो जाएगी। 

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ऑस्ट्रेलियाई सेना के पूर्व ब्रिगेडियर और रक्षा विशेषज्ञ इयान लैंगफोर्ड। - फोटो : अमर उजाला
लैंगफोर्ड ने चेतावनी देते हुए कहा कि जंग में रोबोट्स के इस्तेमाल से युद्ध के अचानक नियंत्रण से बाहर हो जाने का खतरा बढ़ जाता है। यह परमाणु हथियार इस्तेमाल न करने से जुड़े समीकरणों को भी बदल देगा। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा है कि क्या होगा अगर रोबोट्स की मचाई तबाही के बीच इनकी सेना को खत्म करने के लिए परमाणु हथियारों का इस्तेमाल हो, क्या इसे स्वीकार्य माना जाएगा और इसके प्रतिशोध में सामने वाला देश इंसानों पर परमाणु हमला करने का फैसला नहीं करेगा?

दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया के ही सामरिक नीति संस्थान के डॉ. मैल्कम डेविस का मानना है कि सेना में ह्यूमनॉइड रोबोट्स को शुरुआत में परिवहन, रसद और आपूर्ति जैसे उबाऊ व कठिन कामों में लगाया जाएगा, ताकि मानव सैनिकों को सीधे तौर पर युद्ध लड़ने के लिए आजाद रखा जा सके। उन्होंने भी कहा कि युद्ध क्षेत्र में स्वायत्त किलर रोबोटों के इस्तेमाल को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सख्त कानूनों की कमी ने चीन को इस घातक तकनीक को अपनी सेना में शामिल करने और इस्तेमाल की पूरी छूट दे दी है।
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