अंडरवॉटर ड्रोन मदरशिप: चीन ने समुद्र में छिपाई 'विनाश' की पनडुब्बी, पानी के अंदर से हजारों किमी तक करेगी हमला
चीन शंघाई के एक शिपयार्ड में ऐसी मदरशिप तैयार कर रहा है, जो समुद्र में बड़े आकार की मानवरहित पनडुब्बियों को उतार सकेगी। यह जहाज एक साथ कम से कम चार विशाल ड्रोन पनडुब्बियां ले जाने में सक्षम हो सकता है। इन ड्रोन में हथियार ले जाने की क्षमता बताई गई है और इनकी मारक दूरी हजारों समुद्री मील तक हो सकती है। चीन समुद्र के भीतर युद्ध की नई तैयारी क्यों कर रहा? ये मदरशिप कितनी और किस देश के लिए खतरनाक हैं? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
विस्तार
चीन समुद्र के भीतर अपनी सैन्य क्षमता को एक नए स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रहा है। शंघाई के हुडोंग-झोंगहुआ शिपयार्ड में एक ऐसी मदरशिप निर्माणाधीन है, जिसे बड़े आकार की मानवरहित पनडुब्बियों को समुद्र में पहुंचाने और वहां तैनात करने के लिए बनाया जा रहा है। उपग्रह की तस्वीरों में दिखे इस जहाज को दुनिया में अपनी तरह का पहला पोत माना जा रहा है। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह एक साथ कम से कम चार बेहद बड़ी मानवरहित पनडुब्बियां ले जा सकता है। ये पनडुब्बियां चालक दल के बिना लंबी दूरी तक समुद्र के भीतर काम कर सकती हैं।
मदरशिप में क्या खास है और यह कैसे काम करेगी?
- उपग्रह तस्वीरों के आधार पर यह जहाज लाल रंग का निर्माणाधीन पोत दिखाई देता है। इसके आकार और बनावट से संकेत मिलता है कि इसके भीतर एक बड़ा हैंगर बनाया गया है। इसी हैंगर में विशाल मानवरहित पनडुब्बियों को रखा जा सकता है और जरूरत पड़ने पर उन्हें समुद्र में उतारा जा सकता है।
- रक्षा विशेषज्ञों के आकलन के मुताबिक जहाज कम से कम चार ऐसी पनडुब्बियां ले जाने में सक्षम हो सकता है। जहाज के आगे की तरफ भी एक अलग हैंगर दिखाई देता है, जिसका इस्तेमाल हेलिकॉप्टर ले जाने के लिए किया जा सकता है। इस तरह यह केवल परिवहन पोत नहीं, बल्कि समुद्र में ड्रोन पनडुब्बियों को तैनात करने वाला एक मोबाइल प्लेटफॉर्म बन सकता है।
चीन की विशाल ड्रोन पनडुब्बियां कितनी बड़ी हैं?
- चीन ने जिस श्रेणी की मानवरहित पनडुब्बियां विकसित की हैं, उन्हें एक्सएक्सएलयूयूवी यानी एक्स्ट्रा-एक्स्ट्रा-लार्ज अनक्रूड अंडरसी व्हीकल कहा जा रहा है। यह नाम ही बताता है कि ये सामान्य ड्रोन पनडुब्बियों से बहुत बड़ी हैं।
- अब तक चीन की ऐसी दो पनडुब्बियां देखी गई हैं। इनमें एक की लंबाई करीब 115 फीट और दूसरी की करीब 148 फीट बताई गई है। तुलना करें तो अमेरिका की ओर्का एक्सएलयूयूवी करीब 51 फीट लंबी है।
- चीन की ये मानवरहित पनडुब्बियां आकार में ओर्का से करीब छह से आठ गुना तक बड़ी हो सकती हैं। चीन ने इनका परीक्षण हाइनान द्वीप के पास दक्षिण चीन सागर में भी किया है।
क्या ये ड्रोन पनडुब्बियां हथियार लेकर हजारों किमी जा सकती हैं?
इन मानवरहित पनडुब्बियों के बारे में पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं है, लेकिन इनके आकार से इनकी क्षमता का अंदाजा लगाया जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञ एचआई सटन के आकलन के अनुसार, चालक दल वाली बड़ी एक्सएलयूयूवी पनडुब्बी आम तौर पर करीब आठ भारी टॉरपीडो ले जा सकती है। चीन की एक्सएक्सएलयूयूवी इससे भी बड़ी हैं। ऐसे में इनमें इससे अधिक हथियार या दूसरे सैन्य उपकरण ले जाने की क्षमता हो सकती है। इनकी संभावित परिचालन दूरी 10 हजार समुद्री मील से अधिक बताई गई है। इसका मतलब है कि ये ड्रोन लंबे समय तक बिना चालक दल के समुद्र के भीतर दूर तक जा सकते हैं और निगरानी या सैन्य अभियान जैसे मिशनों में इस्तेमाल हो सकते हैं।
अमेरिका और ब्रिटेन की ड्रोन पनडुब्बियों से चीन कितना आगे है?
- अमेरिका की ओर्का एक्सएलयूयूवी लंबी दूरी के गुप्त समुद्री अभियानों के लिए विकसित की गई है और इसकी दूरी करीब 6,500 समुद्री मील तक बताई गई है। चीन की एक्सएक्सएलयूयूवी इससे काफी बड़ी हैं और संभावित रूप से 10 हजार समुद्री मील से अधिक दूरी तय कर सकती हैं। ब्रिटेन भी एक्सएलयूयूवी विकसित कर रहा है, जिसे एक्सवी एक्सकैलिबर कहा जाता है।
- इसकी लंबाई करीब 39 फीट है और इसकी क्षमता लगभग 1000 मील तक बताई गई है। इसके समुद्र के भीतर परीक्षण जुलाई में शुरू हुए और इसके 2028 तक परिचालन में आने की उम्मीद है। इस तुलना से चीन की नई विशाल ड्रोन पनडुब्बियों के आकार और संभावित दूरी का अंदाजा लगाया जा सकता है।
चीन की नई समुद्री क्षमता की प्रमुख बातें क्या हैं?
चार ड्रोन पनडुब्बियां... यह पोत एक साथ कम से कम चार विशाल मानवरहित पनडुब्बियां ले जाने में सक्षम हो सकता है।
विशाल आकार... चीन की दो एक्सएक्सएलयूयूवी पनडुब्बियां करीब 115 फीट और 148 फीट लंबी बताई गई हैं।
अमेरिका की ओर्का से बड़ी... चीन की ये ड्रोन पनडुब्बियां अमेरिकी ओर्का एक्सएलयूयूवी से करीब छह से आठ गुना तक बड़ी हैं।
लंबी दूरी की क्षमता... इनकी संभावित परिचालन दूरी 10 हजार समुद्री मील से अधिक हो सकती है।
हथियार ले जाने की क्षमता... बड़े आकार के कारण इनमें हथियारों और दूसरे सैन्य उपकरणों के लिए अधिक जगह हो सकती है।
अंडरवॉटर हैंगर... मदरशिप में आंतरिक हैंगर बनाया गया है, जहां ड्रोन पनडुब्बियों को रखा और समुद्र में तैनात किया जा सकता है।
हेलिकॉप्टर की भी जगह... जहाज के आगे की तरफ एक अलग हैंगर दिखाई देता है, जिसका इस्तेमाल हेलिकॉप्टर के लिए हो सकता है।
चीन की बढ़ती समुद्री ताकत से सबसे ज्यादा खतरा किसे?
चीन की रक्षा रणनीति में समुद्र की भूमिका लगातार बढ़ रही है। चीन दुनिया का सबसे बड़ा युद्धपोत निर्माता बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार उसकी जहाज निर्माण क्षमता अमेरिका की तुलना में कम से कम 200 गुना अधिक है। चीन के पास अनुमानित 405 युद्धपोत हैं, जबकि अमेरिका के पास करीब 295 युद्धपोत बताए गए हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ताइवान को चीन के नियंत्रण में लाने की अपनी महत्वाकांक्षा स्पष्ट की है और ताइवान पर नियंत्रण के लिए बल प्रयोग की संभावना से इनकार नहीं किया है। ताइवान चीन के दावे को खारिज करता है। ऐसे में किसी भी सैन्य टकराव की स्थिति में समुद्र की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।
दक्षिण चीन सागर और ताइवान के बीच क्या है संबंध?
- चीन दक्षिण चीन सागर में भी अपनी मौजूदगी तेजी से बढ़ा रहा है। वह इस समुद्री क्षेत्र के लगभग सभी द्वीपों, चट्टानों और रीफ पर संप्रभुता का दावा करता है। फिलीपींस, वियतनाम, ब्रुनेई और ताइवान इन दावों का विरोध करते हैं। इन विवादों के दौरान कई बार तनाव हिंसक रूप भी ले चुका है।
- ऐसे में बड़ी मानवरहित पनडुब्बियों और उन्हें समुद्र में पहुंचाने वाली मदरशिप का विकास चीन की समुद्री क्षमता को एक नई दिशा दे सकता है। इन पनडुब्बियों को लंबे समय तक दूर समुद्री क्षेत्रों में भेजकर बिना चालक दल के मिशन चलाना संभव हो सकता है। हालांकि इन ड्रोन की वास्तविक हथियार क्षमता और परिचालन भूमिका के बारे में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है।
रक्षा क्षमता बढ़ाने के साथ चीन दुनिया को क्या संदेश दे रहा है?
चीन की समुद्री सैन्य क्षमता बढ़ने के बीच उसका राजनीतिक संदेश भी सामने आया है। चीन के शियांगशान फोरम में करीब 100 देशों की भागीदारी हुई। चीन के रक्षा मंत्री डोंग जून ने अपने भाषण में इतिहास से सबक लेने और वर्चस्ववाद, सैन्यवाद तथा इतिहास को अपनी सुविधा के अनुसार बदलने की कोशिशों के प्रति सतर्क रहने की बात कही। इस बयान को कई विशेषज्ञों ने जापान की ओर परोक्ष संकेत के तौर पर देखा। जापान और चीन के बीच पिछले वर्ष से राजनयिक तनाव बना हुआ है और जापान भी अपनी रक्षा क्षमताओं के विस्तार पर जोर दे रहा है। इसी बीच चीन की नई ड्रोन मदरशिप और विशाल मानवरहित पनडुब्बियों का विकास दिखाता है कि बीजिंग समुद्र के भीतर लंबी दूरी तक काम करने वाली मानवरहित सैन्य तकनीक पर तेजी से निवेश कर रहा है।