जल त्रासदी: नेपाल की प्रलयंकारी बाढ़ में अपनों की तलाश, फोन की घंटी बजने के इंतजार में कटी परिजनों की रातें
नेपाल में ग्लेशियर फटने से आई भीषण बाढ़ में सैकड़ों लोग लापता हैं, जिनमें कई भारतीय-अमेरिकी तीर्थयात्री भी शामिल हैं। बचाव अभियान की पूरी जानकारी और भावुक कर देने वाली रिपोर्ट पढ़ें।
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नेपाल-तिब्बत सीमा पर रसुवा जिले में संदिग्ध ग्लेशियर फटने से आई प्रलयंकारी बाढ़ ने एक पवित्र यात्रा को भीषण त्रासदी में बदल दिया है। भोटे कोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों में मलबे व पत्थरों के तेज बहाव से मची तबाही इतनी भयंकर थी कि भूकंपीय मॉनिटरों पर भी कुछ पल के लिए हलचल दर्ज की गई। इस भीषण प्राकृतिक आपदा ने न केवल स्थानीय लोगों को, बल्कि सात समंदर पार अमेरिका में बसे भारतीय-अमेरिकी परिवारों को भी असहनीय इंतजार और गहरे संकट में धकेल दिया है।
इस हिमालयी तबाही ने नेपाल में कितना नुकसान पहुंचाया है?
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) की छठी स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, भोटे कोशी बाढ़ के बाद अब तक 389 शव बरामद किए जा चुके हैं और 977 लोग अब भी लापता हैं। लापता लोगों में नेपाली सेना, पुलिस व आव्रजन विभाग के 105 सुरक्षाकर्मियों के साथ 517 विदेशी नागरिक और विदेशों में रहने वाले 127 नेपाली शामिल हैं। इस अचानक आई भीषण बाढ़ की आपदा में 73 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, और परिवहन से लेकर बिजली व संचार के बुनियादी ढांचे को भारी क्षति पहुंची है।
अपनों की तलाश में भटक रहे परिवारों पर क्या गुजर रही है?
अमेरिका में रह रहे कई भारतीय-अमेरिकी परिवार इस समय गहरे मानसिक आघात और अपनों की खोज में पल-पल तड़प रहे हैं। न्यूयॉर्क के शशिधरन श्रीधरन की पत्नी रेखा और 14 वर्षीय बेटी राशि कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी कर बुधवार को नेपाल लौटने वाली थीं, लेकिन तभी यह आपदा आ गई। श्रीधरन ने इसे अपने जीवन के सबसे बुरे 48 घंटे बताया है। इसी तरह वर्जीनिया के ऋत्विक रंगू अपने पिता और डॉ. राधिका शर्मा अपने बुजुर्ग माता-पिता (65 वर्षीय रमेश शर्मा और 64 वर्षीय नीलम शर्मा) की सुरक्षित वापसी के लिए गुहार लगा रही हैं। न्यूयॉर्क में नेपाल के महावाणिज्य दूत दधिराम भंडारी ने बताया कि उन्होंने 25 से अधिक लापता अमेरिकी नागरिकों (जिनमें से अधिकांश भारतीय मूल के हैं) की सूची नेपाल के विदेश मंत्रालय को भेजी है।
राहत और बचाव के लिए जमीनी स्तर पर क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के अनुसार स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण है और पूरी सरकारी मशीनरी खोज और बचाव में जुटी है। खोज अभियान में 13,295 सुरक्षाकर्मियों और 15 हेलीकॉप्टरों को लगाया गया है। इनकी मदद से अब तक 1,976 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। नेपाल सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों के राहत कार्य के लिए तत्काल 2.5 करोड़ नेपाली रुपये (एनपीआर) भेजे हैं। इसके साथ ही, नेपाल के विदेश मंत्रालय ने प्रभावित विदेशियों की मदद और समन्वय के लिए एक 'आपातकालीन नियंत्रण कक्ष' (ईसीआर) स्थापित किया है।
लापता भारतीयों की तलाश और सामाजिक संगठनों की क्या भूमिका है?
भारतीय विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, अब तक 84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। इनमें त्रिशूली-I परियोजना में कार्यरत 63 भारतीय कर्मचारी और कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्री शामिल हैं। इस संकट में जयपुर फुट यूएसए जैसे संगठनों के नेता प्रेम भंडारी ने एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया है जो चौबीसों घंटे काम कर रहा है। वहीं, अध्यात्मिक गुरु स्वामी अवधेशानंद गिरि ने न्यूयॉर्क में राहत कार्यों की समीक्षा की और नेपाल को सहायता की पेशकश के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संवेदनशीलता की सराहना की।
आगे की राह और परिवारों की उम्मीदें
यह त्रासदी दिखाती है कि प्रकृति के रौद्र रूप के सामने मानवीय तंत्र कितने लाचार हो जाते हैं। फिलहाल, भारत, अमेरिका और नेपाल की सरकारें प्रभावितों तक पहुंचने की हरसंभव कोशिश कर रही हैं। मलबे के बीच अपनों को सुरक्षित ढूंढने की यह जंग जारी है, और उनके परिवार इस उम्मीद में फोन थामे बैठे हैं कि जल्द ही कोई अच्छी खबर मिलेगी।