फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   'Double standards' in fight against terrorism 'unacceptable': SCO declaration

'आतंकवाद पर दोहरा मापदंड स्वीकार नहीं': एससीओ देशों के घोषणापत्र में क्या-क्या कहा गया; ईरान के साथ खड़े हुए?

Wed, 02 Sep 2026 02:36 AM IST
निर्मल कांत पीटीआई, बिश्केक।
पीटीआई, बिश्केक। Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 02 Sep 2026 02:36 AM IST
विज्ञापन
'Double standards' in fight against terrorism 'unacceptable': SCO declaration
एससीओ शिखर सम्मेलन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में एससीओ देशों के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक हुई। इसके बाद एक संयुक्त बयान जारी किया गया। इसे 'बिश्केक घोषणापत्र' कहा गया है। इसमें सदस्य देशों ने पश्चिम एशिया में जारी घटनाक्रम पर गहरी चिंता जताई।
विज्ञापन


शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों ने मंगलवार को आतंकवाद से लड़ाई में 'दोहरा मापदंड' अपनाने को 'अस्वीकार्य' बताया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई तेज करने की अपील की। इसमें आतंकवादियों की एक देश से दूसरे देश में सीमा पार आवाजाही रोकना भी शामिल है।
विज्ञापन


बिश्केक घोषणापत्र में क्या कहा गया?
बिश्केक में एससीओ देशों के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक हुई। इसके बाद एक संयुक्त बयान जारी किया गया। इसे 'बिश्केक घोषणापत्र' कहा गया है। इसमें सदस्य देशों ने पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रम पर गहरी चिंता जताई। साथ ही ईरान पर अमेरिका के हमलों की निंदा की।
विज्ञापन
विज्ञापन


एससीओ सदस्य देशों ने हर तरह के आतंकवाद की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद से लड़ाई में 'दोहरा मापदंड' अपनाना 'अस्वीकार्य' है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी इस संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर किए। बयान में कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र को इसमें केंद्रीय भूमिका निभानी चाहिए। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों और संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक आतंकवाद रोधी रणनीति को पूरी तरह लागू करना चाहिए।

इन देशों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई की अपील की। इसमें आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही को रोकना भी शामिल है। बयान में कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र को इसमें अहम भूमिका निभानी चाहिए। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों और संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक आतंकवाद रोधी रणनीति को पूरी तरह लागू करना चाहिए। यह काम संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के अनुसार होना चाहिए।

कौन-कौन देश हैं एससीओ के सदस्य?
एससीओ में रूस, चीन, भारत, पाकिस्तान, ईरान, बेलारूस, उज्बेकिस्तान, कजाखस्तान, ताजिकिस्तान और किर्गिज गणराज्य शामिल हैं।

आतंकवाद के लिए इंटरनेट इस्तेमाल रोकना जरूरी
घोषणापत्र में कहा गया कि आतंकवाद, अलगाववाद और कट्टरपंथी गतिविधियों के लिए इंटरनेट के इस्तेमाल को रोकना जरूरी है। सदस्य देश अंतरराष्ट्रीय सूचना सुरक्षा और सूचना की सुरक्षा के क्षेत्र में आपसी तालमेल बढ़ाएंगे। साथ ही, वे नए तरह के अपराधों से लड़ने के लिए भी मिलकर काम करेंगे।

घोषणापत्र में कहा गया कि एससीओ देश आतंकवाद, अलगाववाद और कट्टरपंथ के खिलाफ लड़ाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवादी, अलगाववादी और कट्टरपंथी संगठनों का अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करना स्वीकार नहीं किया जा सकता।

ईरान पर अमेरिकी हमले को लेकर क्या कहा?
पश्चिम एशिया को लेकर संयुक्त बयान में ईरान पर अमेरिकी सैन्य हमलों की निंदा की गई। बयान में कहा गया कि इन हमलों में बड़ी संख्या में आम नागरिकों की मौत हुई है। साथ ही, ईरान की अर्थव्यवस्था को भी काफी नुकसान पहुंचा है।

बयान में कहा गया कि इस तरह की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों और नियमों का उल्लंघन है। इससे अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए गंभीर खतरे पैदा होते हैं।

ईरान को लेकर एससीओ देशों का क्या रुख है?
एससीओ देशों ने ईरान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष का समाधान केवल राजनीतिक और कूटनीतिक तरीकों से होना चाहिए। उन्होंने क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए किए जा रहे सभी प्रयासों का स्वागत किया।

अली खामेनेई की मौत पर जताया शोक
एससीओ सदस्य देशों ने ईरान के सर्वोच्च नेता सैयद अली खामेनेई की मौत पर भी शोक जताया। घोषणापत्र में कहा गया कि मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता कायम करने का एकमात्र संभव रास्ता फिलिस्तीन के मुद्दे का व्यापक और न्यायपूर्ण समाधान है।


वैश्विक व्यवस्था में क्या बदलाव चाहते हैं एससीओ देश?
एससीओ देशों ने वैश्विक शासन और नियमों की व्यवस्था में सुधार और उसे बेहतर बनाने की वकालत की। घोषणापत्र में कहा गया कि सदस्य देश अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय विकास से जुड़े मुद्दों को हल करने के लिए गुटों पर आधारित और टकराव वाले तरीकों को स्वीकार नहीं करते। वे देशों के बीच मतभेदों और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं। एससीओ के राष्ट्राध्यक्षों की अगली बैठक 2027 में पाकिस्तान में होगी।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed