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मैक्रों का ट्रंप-नेतन्याहू पर निशाना: बोले- फ्रांस के खिलाफ अभियान चला रहे विदेशी नेता; क्या है पूरा विवाद?
Thu, 22 Oct 2026 08:33 AM IST
राकेश कुमार
एएनआई, दोहा।
एएनआई, दोहा।
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 22 Oct 2026 08:33 AM IST
फ्रांस में हिंसा और लूटपाट के बाद राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के बयानों पर नाराजगी जताई है। मैक्रों ने आरोप लगाया कि विदेशी नेता फ्रांस के हालात का इस्तेमाल अपने राजनीतिक अभियान के लिए कर रहे हैं और एआई से बनाई गई फर्जी तस्वीरों के जरिए गलत सूचना फैलाई गई। वहीं, ट्रंप ने हिंसा के लिए आव्रजन को जिम्मेदार ठहराया, जबकि नेतन्याहू ने इसे चरमपंथी इस्लाम से जोड़कर फ्रांसीसी सरकार की आलोचना की। हिंसा के बाद फ्रांस में गिरफ्तारियां, सुरक्षा व्यवस्था सख्त करने और कर्फ्यू लगाने जैसी कार्रवाइयां की गई हैं।
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मैक्रों ने ट्रंप पर साधा निशाना
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
फ्रांस में हिंसा और लूटपाट के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बयानों पर फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने नाराजगी जताई है। मैक्रों ने कहा कि विदेशी नेता फ्रांस के हालात का इस्तेमाल अपने राजनीतिक अभियान के लिए कर रहे हैं।
मैक्रों ने विदेशी नेताओं को क्या कहा?
फ्रांस में हालिया हिंसा को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बयानों के बीच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने विदेशी नेताओं की आलोचना की है। बुधवार को कतर की राजधानी दोहा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि कुछ नेता फ्रांस की कीमत पर अपना राजनीतिक अभियान चला रहे हैं। मैक्रों ने किसी का नाम लिए बिना कहा कि अटलांटिक के इस पार और उस पार, दोनों तरफ के नेता चुनावी अभियान की मुद्रा में हैं।
उन्होंने कहा, 'कुछ लोग फ्रांस की कीमत पर अपना अभियान चलाते हैं। इनमें ऐसे नेता भी हैं, जो यहां इस क्षेत्र में या अटलांटिक के दूसरी तरफ अपने राजनीतिक अभियान में जुटे हैं।' मैक्रों तीन दिन की कतर और खाड़ी क्षेत्र की यात्रा पर हैं। इस यात्रा का उद्देश्य फ्रांस में जीवनयापन की बढ़ती लागत के संकट के बीच देश की ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित करना भी है।
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ट्रंप ने फ्रांस के हालात पर क्या दावा किया?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को फ्रांस में जारी विरोध प्रदर्शनों और हिंसा के लिए आव्रजन को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने दावा किया कि पेरिस जल्द ही एक मुस्लिम शहर बन जाएगा। ट्रंप ने फ्रांस की सीमाएं बंद नहीं करने के लिए मैक्रों की आलोचना भी की।
ट्रंप ने व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से कहा कि फ्रांस में जो हो रहा है, उसका संबंध स्कूलों या किसी दूसरी समस्या से नहीं, बल्कि आव्रजन से है। उन्होंने कहा कि मैक्रों उनके दोस्त हैं, लेकिन दुनिया भर से लोगों को फ्रांस में आने देने का फैसला गलत था। ट्रंप ने अमेरिकी मतदाताओं को चेतावनी देते हुए फ्रांस के हालात को अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत के संभावित नतीजों से भी जोड़ा।
मैक्रों ने ट्रंप के दावों और एआई तस्वीरों पर क्या कहा?
मैक्रों ने कहा कि फ्रांस में हुई घटनाओं के पीछे किसी विदेशी हस्तक्षेप के स्पष्ट संकेत नहीं हैं। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि घटनाओं के बाद गलत सूचनाएं फैलाने के लिए विदेशी स्तर पर हेरफेर किया गया। उनके मुताबिक, इससे कई विदेशी नेताओं की ओर से गलत और गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियां सामने आईं।
मैक्रों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार ऐसी तस्वीरों पर भी आपत्ति जताई, जिनमें फ्रांस में ऐसी घटनाएं दिखाई गईं जो वास्तव में हुई ही नहीं थीं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने फ्रांस में प्रवासियों और इस्लामवादियों की भारी भीड़ के घुस आने का दावा किया। जब एक पत्रकार ने सीधे पूछा कि क्या उनकी टिप्पणी ट्रंप के लिए थी, तो मैक्रों ने जवाब दिया हां। उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा हालात में पता चलता है कि फ्रांस से कौन प्यार करता है और कौन नहीं। उनके मुताबिक, जो लोग अभी उनके देश के बारे में बुरा बोल रहे हैं, वे फ्रांस से प्यार नहीं करते।
यह भी पढ़ें: पश्चिम एशिया में फिर भड़केगी जंग?: खामेनेई ने गालिबाफ से की मुलाकात, अमेरिका को जवाबी कार्रवाई की दी चेतावनी
नेतन्याहू ने क्या कहा?
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मंगलवार को फ्रांस के हालात को 'चरमपंथी इस्लाम का आक्रमण' बताया। टाइम्स ऑफ इस्राइल के मुताबिक, फ्रेंच भाषा के समाचार चैनल आई24न्यूज को दिए साक्षात्कार में नेतन्याहू ने फ्रांसीसी अधिकारियों पर हालात का पहले से आकलन करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया। नेतन्याहू ने कहा, 'उन्होंने समय रहते तैयारी नहीं की। उन्होंने बस हार मान ली। वे चरमपंथी इस्लाम के आक्रमण के आगे झुक गए।' फ्रांस को सलाह देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उसे चरमपंथियों के खिलाफ लड़ना चाहिए और तुष्टीकरण की नीति नहीं अपनानी चाहिए।
फ्रांस में कैसे हैं हालात?
सप्ताहांत में फ्रांस के कई इलाकों में प्रदर्शन हुए। ज्यादातर मार्च शांतिपूर्ण थे, लेकिन शनिवार को लूटपाट और सुरक्षा बलों के साथ झड़पों ने हालात बिगाड़ दिए। इसके बाद अधिकारियों ने सुरक्षा बढ़ाई और कुछ जगहों पर कर्फ्यू लगाया। बोर्दो शहर में अकेले बाहर निकलने वाले नाबालिगों के लिए एक सप्ताह का रात का कर्फ्यू लगाया गया है। गिरोंद और नोवेल-अकितेन की प्रीफेक्ट सोफी ब्रोका की ओर से सोमवार को घोषित आदेश मंगलवार से 26 अक्टूबर की सुबह तक लागू रहेगा। इसके तहत 18 वर्ष से कम उम्र के नाबालिग रात 10 बजे से सुबह सात बजे तक माता-पिता या कानूनी अभिभावक के बिना सार्वजनिक स्थानों पर नहीं रह सकेंगे।
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मैक्रों ने विदेशी नेताओं को क्या कहा?
फ्रांस में हालिया हिंसा को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बयानों के बीच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने विदेशी नेताओं की आलोचना की है। बुधवार को कतर की राजधानी दोहा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि कुछ नेता फ्रांस की कीमत पर अपना राजनीतिक अभियान चला रहे हैं। मैक्रों ने किसी का नाम लिए बिना कहा कि अटलांटिक के इस पार और उस पार, दोनों तरफ के नेता चुनावी अभियान की मुद्रा में हैं।
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उन्होंने कहा, 'कुछ लोग फ्रांस की कीमत पर अपना अभियान चलाते हैं। इनमें ऐसे नेता भी हैं, जो यहां इस क्षेत्र में या अटलांटिक के दूसरी तरफ अपने राजनीतिक अभियान में जुटे हैं।' मैक्रों तीन दिन की कतर और खाड़ी क्षेत्र की यात्रा पर हैं। इस यात्रा का उद्देश्य फ्रांस में जीवनयापन की बढ़ती लागत के संकट के बीच देश की ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित करना भी है।
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ट्रंप ने फ्रांस के हालात पर क्या दावा किया?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को फ्रांस में जारी विरोध प्रदर्शनों और हिंसा के लिए आव्रजन को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने दावा किया कि पेरिस जल्द ही एक मुस्लिम शहर बन जाएगा। ट्रंप ने फ्रांस की सीमाएं बंद नहीं करने के लिए मैक्रों की आलोचना भी की।
ट्रंप ने व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से कहा कि फ्रांस में जो हो रहा है, उसका संबंध स्कूलों या किसी दूसरी समस्या से नहीं, बल्कि आव्रजन से है। उन्होंने कहा कि मैक्रों उनके दोस्त हैं, लेकिन दुनिया भर से लोगों को फ्रांस में आने देने का फैसला गलत था। ट्रंप ने अमेरिकी मतदाताओं को चेतावनी देते हुए फ्रांस के हालात को अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत के संभावित नतीजों से भी जोड़ा।
मैक्रों ने ट्रंप के दावों और एआई तस्वीरों पर क्या कहा?
मैक्रों ने कहा कि फ्रांस में हुई घटनाओं के पीछे किसी विदेशी हस्तक्षेप के स्पष्ट संकेत नहीं हैं। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि घटनाओं के बाद गलत सूचनाएं फैलाने के लिए विदेशी स्तर पर हेरफेर किया गया। उनके मुताबिक, इससे कई विदेशी नेताओं की ओर से गलत और गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियां सामने आईं।
मैक्रों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार ऐसी तस्वीरों पर भी आपत्ति जताई, जिनमें फ्रांस में ऐसी घटनाएं दिखाई गईं जो वास्तव में हुई ही नहीं थीं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने फ्रांस में प्रवासियों और इस्लामवादियों की भारी भीड़ के घुस आने का दावा किया। जब एक पत्रकार ने सीधे पूछा कि क्या उनकी टिप्पणी ट्रंप के लिए थी, तो मैक्रों ने जवाब दिया हां। उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा हालात में पता चलता है कि फ्रांस से कौन प्यार करता है और कौन नहीं। उनके मुताबिक, जो लोग अभी उनके देश के बारे में बुरा बोल रहे हैं, वे फ्रांस से प्यार नहीं करते।
यह भी पढ़ें: पश्चिम एशिया में फिर भड़केगी जंग?: खामेनेई ने गालिबाफ से की मुलाकात, अमेरिका को जवाबी कार्रवाई की दी चेतावनी
नेतन्याहू ने क्या कहा?
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मंगलवार को फ्रांस के हालात को 'चरमपंथी इस्लाम का आक्रमण' बताया। टाइम्स ऑफ इस्राइल के मुताबिक, फ्रेंच भाषा के समाचार चैनल आई24न्यूज को दिए साक्षात्कार में नेतन्याहू ने फ्रांसीसी अधिकारियों पर हालात का पहले से आकलन करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया। नेतन्याहू ने कहा, 'उन्होंने समय रहते तैयारी नहीं की। उन्होंने बस हार मान ली। वे चरमपंथी इस्लाम के आक्रमण के आगे झुक गए।' फ्रांस को सलाह देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उसे चरमपंथियों के खिलाफ लड़ना चाहिए और तुष्टीकरण की नीति नहीं अपनानी चाहिए।
फ्रांस में कैसे हैं हालात?
सप्ताहांत में फ्रांस के कई इलाकों में प्रदर्शन हुए। ज्यादातर मार्च शांतिपूर्ण थे, लेकिन शनिवार को लूटपाट और सुरक्षा बलों के साथ झड़पों ने हालात बिगाड़ दिए। इसके बाद अधिकारियों ने सुरक्षा बढ़ाई और कुछ जगहों पर कर्फ्यू लगाया। बोर्दो शहर में अकेले बाहर निकलने वाले नाबालिगों के लिए एक सप्ताह का रात का कर्फ्यू लगाया गया है। गिरोंद और नोवेल-अकितेन की प्रीफेक्ट सोफी ब्रोका की ओर से सोमवार को घोषित आदेश मंगलवार से 26 अक्टूबर की सुबह तक लागू रहेगा। इसके तहत 18 वर्ष से कम उम्र के नाबालिग रात 10 बजे से सुबह सात बजे तक माता-पिता या कानूनी अभिभावक के बिना सार्वजनिक स्थानों पर नहीं रह सकेंगे।