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फ्रांस में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन: हिंसा के बाद पेरिस में 1800 लोग गिरफ्तार, सरकारी इमारतों को बनाया निशाना
Sun, 18 Oct 2026 05:20 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, पेरिस।
पीटीआई, पेरिस।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 18 Oct 2026 05:20 PM IST
फ्रांस में बढ़ती महंगाई और स्कूलों की खराब हालत के खिलाफ शनिवार को बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। अधिकारियों के मुताबिक, देशभर में करीब 5.50 लाख लोग सड़कों पर उतरे, जबकि आयोजकों ने आठ लाख लोगों के शामिल होने का दावा किया। पेरिस में 1800 लोगों को गिरफ्तार किया गया और कई शहरों में दुकानों तथा सरकारी इमारतों को नुकसान पहुंचा। हिंसा में एक व्यक्ति की दिल का दौरा पड़ने से मौत हुई, जबकि 13 पुलिसकर्मी और जेंडरमेरी के जवान तथा दो दमकलकर्मी घायल हुए।
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फ्रांस में हिंसा
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
फ्रांस में बढ़ती महंगाई और स्कूलों की खराब हालत के खिलाफ शनिवार को हुए प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई। राजधानी पेरिस में पुलिस ने 1800 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान हिंसक समूहों ने पुलिसकर्मियों से भिड़ंत की और दुकानों में लूटपाट की। प्रदर्शन में पेरिस क्षेत्र में करीब 1.10 लाख लोग शामिल हुए थे। देश के कई अन्य शहरों में भी तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आईं।
आयोजकों ने क्या दावा किया?
फ्रांस में शनिवार को हुए प्रदर्शनों में शामिल लोगों की संख्या को लेकर अधिकारियों और आयोजकों के आंकड़े अलग-अलग हैं। अधिकारियों के मुताबिक, देशभर में करीब 5.50 लाख लोगों ने प्रदर्शन किया, जबकि आयोजकों ने यह संख्या लगभग आठ लाख बताई। प्रदर्शनकारियों ने बढ़ती जीवन-यापन लागत और स्कूलों में खराब सुविधाओं के खिलाफ नाराजगी जताई। हालांकि, कई जगह प्रदर्शन के दौरान हिंसा होने से हालात बिगड़ गए।
पेरिस की सड़कों पर टूटे शीशे और बिखरे पत्थर
पेरिस के प्लास द ला रिपब्लिक इलाके में रविवार सुबह हिंसा के निशान दिखाई दिए। दुकानों के टूटे शीशे, सड़कों पर बिखरे कांच और उखड़े हुए पत्थर तोड़फोड़ की तस्वीर बयां कर रहे थे। शहर के मध्य हिस्से में कुछ अन्य पर्यटन और खरीदारी वाले इलाकों में भी दुकानों में लूटपाट और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आईं। पुलिस के मुताबिक, शनिवार को मध्य पेरिस में कई सौ से लेकर एक हजार से अधिक लोगों के समूहों ने बिना अनुमति मार्च निकाले। पुलिस का कहना है कि देर दोपहर बड़ी संख्या में ऐसे लोग पहुंचे, जिनका मकसद विरोध प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि हंगामे का फायदा उठाकर दुकानों में चोरी और लूटपाट करना था।
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सरकार ने कट्टरपंथी वामपंथी समूहों पर लगाया हिंसा का आरोप
फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू और गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने हिंसा की कुछ घटनाओं के लिए कट्टरपंथी वामपंथी समूहों को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना था कि बाद में कुछ अन्य लोग भी मौके पर पहुंचे और लूटपाट करने लगे। प्रधानमंत्री लेकोर्नू ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, 'हमारे गणराज्य में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए पूरी जगह है। आगजनी, लूटपाट और हमलों के लिए कोई जगह नहीं है।' सरकार ने हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं पर सख्त रुख दिखाया है।
पेरिस, मार्सेई और लियोन के महापौरों ने मांगी बैठक
फ्रांस के तीन सबसे बड़े शहरों पेरिस, मार्सेई और लियोन के महापौरों ने प्रधानमंत्री से आने वाले दिनों में बैठक करने का अनुरोध किया है। उन्होंने नुकसान की व्यापकता और हालात की गंभीरता को देखते हुए यह मांग की है। इन शहरों में प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचने की घटनाएं सामने आई हैं।
यह भी पढ़ें: रूस पर यूक्रेन ने दागे 1,015 ड्रोन: सेंट पीटर्सबर्ग में तेल ठिकानों पर लगी आग; ऊर्जा युद्धविराम का क्या हुआ?
मार्सेई में सिटी हॉल तक पहुंचे प्रदर्शनकारी
दक्षिणी बंदरगाह शहर मार्सेई में कुछ प्रदर्शनकारी थोड़ी देर के लिए सिटी हॉल की लॉबी में घुस गए। वहां एक पुलिस स्टेशन को भी नुकसान पहुंचाया गया। वहीं, लियोन में एक पर्यटन कार्यालय के अंदर आग लग गई। इन घटनाओं ने प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक इमारतों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी।
फ्रांस के मध्य हिस्से में स्थित लिमोज शहर में सिटी हॉल में आग लगा दी गई। आग से 19वीं सदी की इस इमारत को भारी नुकसान पहुंचा और इसकी छत ढह गई। हाउते-विएन के प्रीफेक्ट मॉरिस बारात ने एलसीआई टेलीविजन को बताया कि आग जानबूझकर लगाई गई थी। रविवार तक आग पर काबू पा लिया गया था।
हिंसा में एक व्यक्ति की मौत, 15 घायल
पेरिस पुलिस के बयान के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान दिल का दौरा पड़ने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। हालांकि, पुलिस ने इस मामले में विस्तृत जानकारी नहीं दी। फ्रांसीसी मीडिया की खबरों के अनुसार, मार्च के दौरान सड़क पर एक प्रदर्शनकारी की तबीयत बिगड़ गई थी। पुलिस के मुताबिक, हिंसा के दौरान 13 पुलिसकर्मी और जेंडरमेरी के जवान तथा दो दमकलकर्मी घायल हुए। इस बीच, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आपात बैठक करने के बाद भारतीय समयानुसार आज रात राष्ट्र को संबोधित करेंगे।
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आयोजकों ने क्या दावा किया?
फ्रांस में शनिवार को हुए प्रदर्शनों में शामिल लोगों की संख्या को लेकर अधिकारियों और आयोजकों के आंकड़े अलग-अलग हैं। अधिकारियों के मुताबिक, देशभर में करीब 5.50 लाख लोगों ने प्रदर्शन किया, जबकि आयोजकों ने यह संख्या लगभग आठ लाख बताई। प्रदर्शनकारियों ने बढ़ती जीवन-यापन लागत और स्कूलों में खराब सुविधाओं के खिलाफ नाराजगी जताई। हालांकि, कई जगह प्रदर्शन के दौरान हिंसा होने से हालात बिगड़ गए।
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पेरिस की सड़कों पर टूटे शीशे और बिखरे पत्थर
पेरिस के प्लास द ला रिपब्लिक इलाके में रविवार सुबह हिंसा के निशान दिखाई दिए। दुकानों के टूटे शीशे, सड़कों पर बिखरे कांच और उखड़े हुए पत्थर तोड़फोड़ की तस्वीर बयां कर रहे थे। शहर के मध्य हिस्से में कुछ अन्य पर्यटन और खरीदारी वाले इलाकों में भी दुकानों में लूटपाट और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आईं। पुलिस के मुताबिक, शनिवार को मध्य पेरिस में कई सौ से लेकर एक हजार से अधिक लोगों के समूहों ने बिना अनुमति मार्च निकाले। पुलिस का कहना है कि देर दोपहर बड़ी संख्या में ऐसे लोग पहुंचे, जिनका मकसद विरोध प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि हंगामे का फायदा उठाकर दुकानों में चोरी और लूटपाट करना था।
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सरकार ने कट्टरपंथी वामपंथी समूहों पर लगाया हिंसा का आरोप
फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू और गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने हिंसा की कुछ घटनाओं के लिए कट्टरपंथी वामपंथी समूहों को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना था कि बाद में कुछ अन्य लोग भी मौके पर पहुंचे और लूटपाट करने लगे। प्रधानमंत्री लेकोर्नू ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, 'हमारे गणराज्य में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए पूरी जगह है। आगजनी, लूटपाट और हमलों के लिए कोई जगह नहीं है।' सरकार ने हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं पर सख्त रुख दिखाया है।
पेरिस, मार्सेई और लियोन के महापौरों ने मांगी बैठक
फ्रांस के तीन सबसे बड़े शहरों पेरिस, मार्सेई और लियोन के महापौरों ने प्रधानमंत्री से आने वाले दिनों में बैठक करने का अनुरोध किया है। उन्होंने नुकसान की व्यापकता और हालात की गंभीरता को देखते हुए यह मांग की है। इन शहरों में प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचने की घटनाएं सामने आई हैं।
यह भी पढ़ें: रूस पर यूक्रेन ने दागे 1,015 ड्रोन: सेंट पीटर्सबर्ग में तेल ठिकानों पर लगी आग; ऊर्जा युद्धविराम का क्या हुआ?
मार्सेई में सिटी हॉल तक पहुंचे प्रदर्शनकारी
दक्षिणी बंदरगाह शहर मार्सेई में कुछ प्रदर्शनकारी थोड़ी देर के लिए सिटी हॉल की लॉबी में घुस गए। वहां एक पुलिस स्टेशन को भी नुकसान पहुंचाया गया। वहीं, लियोन में एक पर्यटन कार्यालय के अंदर आग लग गई। इन घटनाओं ने प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक इमारतों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी।
फ्रांस के मध्य हिस्से में स्थित लिमोज शहर में सिटी हॉल में आग लगा दी गई। आग से 19वीं सदी की इस इमारत को भारी नुकसान पहुंचा और इसकी छत ढह गई। हाउते-विएन के प्रीफेक्ट मॉरिस बारात ने एलसीआई टेलीविजन को बताया कि आग जानबूझकर लगाई गई थी। रविवार तक आग पर काबू पा लिया गया था।
हिंसा में एक व्यक्ति की मौत, 15 घायल
पेरिस पुलिस के बयान के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान दिल का दौरा पड़ने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। हालांकि, पुलिस ने इस मामले में विस्तृत जानकारी नहीं दी। फ्रांसीसी मीडिया की खबरों के अनुसार, मार्च के दौरान सड़क पर एक प्रदर्शनकारी की तबीयत बिगड़ गई थी। पुलिस के मुताबिक, हिंसा के दौरान 13 पुलिसकर्मी और जेंडरमेरी के जवान तथा दो दमकलकर्मी घायल हुए। इस बीच, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आपात बैठक करने के बाद भारतीय समयानुसार आज रात राष्ट्र को संबोधित करेंगे।