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यूएन में भारत की पाकिस्तान को दो टूक: बेदी बोले- परमाणु धमकी के आगे नहीं झुकेंगे, आतंक के आकाओं को देंगे जवाब
Sat, 10 Oct 2026 09:56 AM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, यूएन।
पीटीआई, यूएन।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sat, 10 Oct 2026 09:56 AM IST
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को चेतावनी दी कि वह परमाणु हथियारों को दबाव बनाने का जरिया न बनाए। भारत ने कहा कि किसी भी आतंकी हमले का जवाब दिया जाएगा और आतंकवाद के प्रायोजकों व साजिशकर्ताओं के बीच अंतर नहीं किया जाएगा। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर, सिंधु जल समझौते और ए क्यू खान के परमाणु नेटवर्क का भी जिक्र किया। भारत ने सभी देशों से परमाणु तकनीक और उन्नत हथियारों के प्रसार को लेकर सतर्क रहने की अपील की।
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पाकिस्तान को भारत का जवाब
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि परमाणु हथियारों को देशों के बीच दबाव बनाने का सामान्य जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए। भारत परमाणु धमकी के आगे नहीं झुकेगा। संयुक्त राष्ट्र महासभा की निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी प्रथम समिति की बैठक में भारत ने पाकिस्तान के जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाने के बाद जवाब दिया। जिनेवा में निरस्त्रीकरण मामलों के वरिष्ठ सलाहकार अनमोल शेर सिंह बेदी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा शांति के पक्ष में रहा है, लेकिन गैर-जिम्मेदाराना गतिविधियों के लिए जवाबदेही तय नहीं होने पर शांति संकटों के बीच महज एक ठहराव बनकर रह जाती है।
भारत ने परमाणु हथियारों को लेकर क्या कहा?
भारत ने कहा कि उसकी सैन्य क्षमताएं रक्षात्मक हैं और देश की सुरक्षा जरूरतों के हिसाब से तय की गई हैं। ये किसी दूसरे देश के खिलाफ नहीं हैं। बेदी ने कहा कि परमाणु हथियारों को सामान्य राजनीतिक हथकंडे की तरह इस्तेमाल करना खतरनाक है। उन्होंने कहा कि परमाणु हथियारों की धमकी देकर आतंकवाद जैसी गतिविधियों पर जवाबी कार्रवाई को सीमित करने की कोशिश से तनाव कम नहीं होता, बल्कि उसके बढ़ने का खतरा पैदा होता है। भारत ने यह भी कहा कि क्षेत्र में संकट पैदा होने का एक बार-बार दोहराया जाने वाला तरीका रहा है, पहले उकसावे वाली कार्रवाई, फिर जिम्मेदारी से इनकार और जवाब मिलने के बाद संयम बरतने की अपील। बेदी के मुताबिक, जब सत्ता में बैठे लोग जनता के प्रति जवाबदेह नहीं होते, तो उनके फैसलों की कीमत आम लोगों को चुकानी पड़ती है और संकट सत्ता का हथियार बन जाता है।
भारत ने आतंकवाद को लेकर कौन-सी तीन बड़ी बातें कही?
पहली: भारत पर किसी भी आतंकी हमले का उचित जवाब दिया जाएगा। देश अपनी सुरक्षा से जुड़े मामलों में पीछे नहीं हटेगा।
दूसरी: भारत परमाणु धमकी के आगे नहीं झुकेगा। परमाणु हथियारों का डर दिखाकर भारत को जवाबी कार्रवाई से नहीं रोका जा सकता।
तीसरी: भारत आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों और उसकी साजिश रचने वालों के बीच कोई अंतर नहीं करेगा। किसी गैर-सरकारी संगठन या आतंकी समूह के जरिए हमला कराने से संबंधित देश की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती।
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ऑपरेशन सिंदूर और सिंधु जल समझौते पर भारत ने क्या कहा?
अनमोल बेदी ने कहा कि पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने आत्मरक्षा में कार्रवाई की थी। 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले में 26 नागरिक मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे। इसके जवाब में भारत ने मई में ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। भारत ने इन कार्रवाइयों को सोच-समझकर और तनाव बढ़ने से रोकने के उद्देश्य से की गई कार्रवाई बताया। भारत ने सिंधु जल समझौते का भी जिक्र किया। बेदी ने कहा कि यह समझौता आपसी भरोसे और सद्भावना की बुनियाद पर हुआ था। कोई देश भरोसे और सहयोग को कमजोर करके यह उम्मीद नहीं कर सकता कि समझौते से मिलने वाले फायदे पहले की तरह जारी रहें। पहलगाम हमले के बाद भारत ने कहा था कि पाकिस्तान की ओर से सीमा पार और दूसरे तरीकों से आतंकवाद को समर्थन विश्वसनीय और स्थायी रूप से खत्म किए जाने तक समझौता स्थगित रहेगा।
परमाणु प्रसार के मुद्दे पर भारत ने पाकिस्तान को कैसे घेरा?
भारत ने पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक ए क्यू खान के नेटवर्क का भी जिक्र किया। बेदी ने कहा कि इस नेटवर्क के इतिहास के कारण करीब दो दशक पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 1540 आया था। खान के नेतृत्व में एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क परमाणु उपकरणों और तकनीक के प्रसार में शामिल था। अमेरिकी विदेश विभाग ने इस नेटवर्क को परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश कर रहे देशों के लिए एक ही जगह से जरूरी चीजें उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क के रूप में बताया था। भारत ने कहा कि परमाणु सहयोग और उन्नत हथियारों की आपूर्ति की मांग के बीच सभी देशों और जिम्मेदार आपूर्तिकर्ताओं को बेहद सतर्क रहना चाहिए। भारत के मुताबिक, यह सतर्कता केवल भारत के लिए नहीं, बल्कि सभी देशों की अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी है।
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भारत ने परमाणु हथियारों को लेकर क्या कहा?
भारत ने कहा कि उसकी सैन्य क्षमताएं रक्षात्मक हैं और देश की सुरक्षा जरूरतों के हिसाब से तय की गई हैं। ये किसी दूसरे देश के खिलाफ नहीं हैं। बेदी ने कहा कि परमाणु हथियारों को सामान्य राजनीतिक हथकंडे की तरह इस्तेमाल करना खतरनाक है। उन्होंने कहा कि परमाणु हथियारों की धमकी देकर आतंकवाद जैसी गतिविधियों पर जवाबी कार्रवाई को सीमित करने की कोशिश से तनाव कम नहीं होता, बल्कि उसके बढ़ने का खतरा पैदा होता है। भारत ने यह भी कहा कि क्षेत्र में संकट पैदा होने का एक बार-बार दोहराया जाने वाला तरीका रहा है, पहले उकसावे वाली कार्रवाई, फिर जिम्मेदारी से इनकार और जवाब मिलने के बाद संयम बरतने की अपील। बेदी के मुताबिक, जब सत्ता में बैठे लोग जनता के प्रति जवाबदेह नहीं होते, तो उनके फैसलों की कीमत आम लोगों को चुकानी पड़ती है और संकट सत्ता का हथियार बन जाता है।
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भारत ने आतंकवाद को लेकर कौन-सी तीन बड़ी बातें कही?
पहली: भारत पर किसी भी आतंकी हमले का उचित जवाब दिया जाएगा। देश अपनी सुरक्षा से जुड़े मामलों में पीछे नहीं हटेगा।
दूसरी: भारत परमाणु धमकी के आगे नहीं झुकेगा। परमाणु हथियारों का डर दिखाकर भारत को जवाबी कार्रवाई से नहीं रोका जा सकता।
तीसरी: भारत आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों और उसकी साजिश रचने वालों के बीच कोई अंतर नहीं करेगा। किसी गैर-सरकारी संगठन या आतंकी समूह के जरिए हमला कराने से संबंधित देश की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती।
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ऑपरेशन सिंदूर और सिंधु जल समझौते पर भारत ने क्या कहा?
अनमोल बेदी ने कहा कि पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने आत्मरक्षा में कार्रवाई की थी। 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले में 26 नागरिक मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे। इसके जवाब में भारत ने मई में ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। भारत ने इन कार्रवाइयों को सोच-समझकर और तनाव बढ़ने से रोकने के उद्देश्य से की गई कार्रवाई बताया। भारत ने सिंधु जल समझौते का भी जिक्र किया। बेदी ने कहा कि यह समझौता आपसी भरोसे और सद्भावना की बुनियाद पर हुआ था। कोई देश भरोसे और सहयोग को कमजोर करके यह उम्मीद नहीं कर सकता कि समझौते से मिलने वाले फायदे पहले की तरह जारी रहें। पहलगाम हमले के बाद भारत ने कहा था कि पाकिस्तान की ओर से सीमा पार और दूसरे तरीकों से आतंकवाद को समर्थन विश्वसनीय और स्थायी रूप से खत्म किए जाने तक समझौता स्थगित रहेगा।
परमाणु प्रसार के मुद्दे पर भारत ने पाकिस्तान को कैसे घेरा?
भारत ने पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक ए क्यू खान के नेटवर्क का भी जिक्र किया। बेदी ने कहा कि इस नेटवर्क के इतिहास के कारण करीब दो दशक पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 1540 आया था। खान के नेतृत्व में एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क परमाणु उपकरणों और तकनीक के प्रसार में शामिल था। अमेरिकी विदेश विभाग ने इस नेटवर्क को परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश कर रहे देशों के लिए एक ही जगह से जरूरी चीजें उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क के रूप में बताया था। भारत ने कहा कि परमाणु सहयोग और उन्नत हथियारों की आपूर्ति की मांग के बीच सभी देशों और जिम्मेदार आपूर्तिकर्ताओं को बेहद सतर्क रहना चाहिए। भारत के मुताबिक, यह सतर्कता केवल भारत के लिए नहीं, बल्कि सभी देशों की अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी है।