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INS Sudarshini: लिस्बन पहुंचा आईएनएस सुदर्शिनी, दुनिया को दे रहा है दोस्ती का संदेश; क्यों है खास

Sun, 23 Aug 2026 03:59 PM IST
राहुल कुमार आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Sun, 23 Aug 2026 03:59 PM IST
सार
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 INS Sudarshini: भारतीय नौसेना का पाल प्रशिक्षण जहाज आईएनएस सुदर्शनी अपनी महासागरीय यात्रा के दौरान पुर्तगाल के लिस्बन पहुंचा।
 

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INS Sudarshini reaches Lisbon, carrying India’s message of friendship and goodwill to the world
नौसेना का पाल प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी - फोटो : एक्स, भारतीय नौसेना

विस्तार

भारतीय नौसेना का पाल प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन पहुंचा है। अपनी लंबी समुद्री यात्रा ‘लोकायन 2026’ के तहत तीन मस्तूलों वाला यह शानदार नौसैनिक पोत टैगस नदी से होते हुए लिस्बन पहुंचा। इस दौरान पारंपरिक नौकायन तथा समुद्री कौशल का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। 

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नौसेना के मुताबिक लिस्बन, आईएनएस सुदर्शिनी की 7 महीने लंबी समुद्री यात्रा का 15वां बंदरगाह पड़ाव है। इतने लंबे समुद्री अभियान के दौरान यह पोत विभिन्न देशों के बंदरगाहों तक पहुंचकर भारत की समुद्री परंपरा, नौकायन कौशल और मित्रता का संदेश पहुंचा रहा है। तीन मस्तूलों और पारंपरिक पालों से सुसज्जित आईएनएस सुदर्शिनी को देखकर समुद्री यात्रा की पुरानी परंपराओं की झलक भी मिलती है। 
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आधुनिक नौसैनिक तकनीक के दौर में यह पोत प्रशिक्षु नौसैनिकों को समुद्र की परिस्थितियों को समझने, पारंपरिक नौकायन कौशल सीखने और चुनौतीपूर्ण समुद्री वातावरण में काम करने का व्यावहारिक अनुभव देता है। आईएनएस सुदर्शिनी की यह लिस्बन यात्रा काफी महत्वपूर्ण है। यह भारत और पुर्तगाल के बीच लंबे समय से चले आ रहे समुद्री संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। 
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इस यात्रा के दौरान पोत पर तैनात नौसैनिक अधिकारी, चालक दल और प्रशिक्षण ले रहे कैडेट यहां पुर्तगाली नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों, स्थानीय प्रशासन तथा वहां रह रहे भारतीय समुदाय के साथ विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। पुर्तगाल की इस यात्रा में पेशेवर अनुभवों का आदान-प्रदान किया जाएगा। दोनों नौसेनाओं के बीच जहाजों का पारस्परिक निरीक्षण और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 

इन गतिविधियों का उद्देश्य दोनों देशों के नौसैनिकों के बीच आपसी समझ और सहयोग को बढ़ाना है। दरअसल ‘लोकायन 2026’ केवल एक प्रशिक्षण अभियान नहीं है, बल्कि इसके जरिए भारत दुनिया के विभिन्न देशों के साथ मित्रता, सहयोग और सौहार्द के रिश्तों को मजबूत करने का संदेश भी दे रहा है। लिस्बन में आईएनएस सुदर्शिनी की मौजूदगी भारत और पुर्तगाल के बीच समुद्री संपर्क की ऐतिहासिक विरासत को भी रेखांकित करती है। 

भारतीय नौसेना का यह पाल पोत जहां एक ओर प्रशिक्षु नौसैनिकों को समुद्र की चुनौतियों के लिए तैयार कर रहा है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न देशों में भारत की समुद्री विरासत और वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना का संदेश भी पहुंचा रहा है। लोकायन 2026 के तहत आईएनएस सुदर्शिनी की यात्रा लगातार आगे बढ़ रही है और हर नया पड़ाव भारत की समुद्री मित्रता को दुनिया के नए हिस्सों तक पहुंचा रहा है। 

कैसा है यह प्रशिक्षण जहाज?
सुदर्शनी तीन खंभों (मस्तूलों) और पालों वाला एक बड़ा जहाज है। इसकी लंबाई 54 मीटर है। इसमें 20 पाल लगे हैं, 7.5 किलोमीटर लंबी रस्सियां और 1.5 किलोमीटर लंबी स्टील वायर रस्सियां लगी हुई हैं। इस जहाज के सभी पालों का कुल क्षेत्रफल लगभग 1,035 वर्ग मीटर (11,140 वर्ग फुट) है। 

 
कैसे चलता है यह जहाज?
यह जहाज पाल और इंजन दोनों की मदद से चल सकता है। इसमें पांच अधिकारी, 31 नौसैनिक और प्रशिक्षण के लिए 30 कैडेट सवार हैं। यह जहाज एक बार में कम से कम 20 दिन तक समुद्र में रह सकता है।

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