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फिर छिड़ेगी जंग?: अमेरिकी हमले पर मोजतबा खामेनेई की चेतावनी- किसी भी खतरे का तुरंत और कहीं भी देंगे जवाब
Sat, 31 Oct 2026 08:33 PM IST
पवन पांडेय
पीटीआई, तेहरान
पीटीआई, तेहरान
Published by: पवन पांडेय
Updated Sat, 31 Oct 2026 08:33 PM IST
अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच मोजतबा खामेनेई ने सेना के वरिष्ठ कमांडरों को सतर्क रहने का निर्देश दिया। कहा- अगर अमेरिका ने दोबारा सैन्य या आतंकी हमला किया तो जवाब देने का समय और शर्तें ईरान की सेना और जनता तय करेगी। वहीं, दोनों देशों के बीच बातचीत के लिए कतर की राजधानी दोहा में बैठक की संभावना जताई जा रही है।
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मोजतबा खामेनेई
- फोटो : ANI
विस्तार
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने देश की सेना के वरिष्ठ कमांडरों को किसी भी खतरे का तत्काल और प्रभावी जवाब देने का आदेश दिया है। उन्होंने साफ कहा कि दुश्मन की ओर से किसी भी तरह का खतरा सामने आने पर ईरान की सेना बिना किसी भौगोलिक सीमा के जवाबी कार्रवाई करे। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच फिर से सैन्य टकराव की आशंका जताई जा रही है।
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मोजतबा खामेनेई ने सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने सेना को हर तरह की चुनौती से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा। उनके आधिकारिक एक्स अकाउंट पर साझा किए गए बयानों के मुताबिक, उन्होंने निर्देश दिया कि हर स्तर और हर प्रकार के खतरे का तत्काल, प्रभावी और बिना भौगोलिक सीमा के जवाब दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर दुश्मन दोबारा सैन्य या आतंकी हमले शुरू करते हैं तो उन्हें खत्म करने का समय और शर्तें ईरान की सेना और जनता तय करेगी। खामेनेई ने सेना को अपनी युद्धक तैयारियों को मजबूत करने और दुश्मनों का मजबूती से मुकाबला करने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया। उनके मुताबिक, देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिकतम प्रतिरोध क्षमता जरूरी है।
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ट्रंप बोले- अमेरिका को युद्ध खत्म करने की जल्दबाजी नहीं
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका को ईरान के साथ चल रहे युद्ध को खत्म करने की कोई जल्दबाजी नहीं है। उन्होंने मौजूदा संघर्ष को सामान्य युद्ध से अलग बताया। ट्रंप के मुताबिक, इस मामले में समय अमेरिका के पक्ष में है और वाशिंगटन के पास इंतजार करने का विकल्प मौजूद है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान बातचीत करना चाहता है और लगातार बातचीत की कोशिश कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि ईरान आर्थिक मुश्किलों से जूझ रहा है। वहां सैनिकों और पुलिसकर्मियों को वेतन देने में भी परेशानी हो रही है। ट्रंप ने कहा कि यह युद्ध करीब सात महीने से चल रहा है, लेकिन अमेरिका इसे खत्म करने के लिए जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करेगा।
बातचीत के लिए दोहा में हो सकती है बैठक
इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच बातचीत के लिए एक शुरुआती प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया गया है। इसमें ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को किसी तीसरे देश में भेजने या उसके संवर्धन का स्तर कम करने का प्रस्ताव शामिल है। प्रस्ताव के मुताबिक, शुरुआती सहमति बनने के सात दिनों के भीतर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के आवागमन के लिए दोबारा खोला जा सकता है। यह समुद्री रास्ता वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि समझौते को लागू कराने और लंबे समय तक बनाए रखने में चीन गारंटर की भूमिका निभा सकता है। यानी चीन समझौते की शर्तों के पालन को सुनिश्चित करने में मदद कर सकता है।
ये भी पढ़ें: यूक्रेन को बड़ी राहत: 500 पैट्रियट मिसाइलें देगा अमेरिका, जेलेंस्की बोले- सर्दियों से पहले मिलें हथियार
इसके अलावा, दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत के लिए तुर्किये के इस्तांबुल के बजाय कतर की राजधानी दोहा को संभावित स्थान बताया गया है। कतर के अखबार अल-अरबी अल-जदीद की रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि अप्रत्यक्ष बातचीत में प्रगति के बाद अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल दोहा में ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत कर सकता है।
समझौते में प्रतिबंधों में राहत का भी प्रस्ताव
प्रस्तावित ढांचे के अनुसार, ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और समुद्री सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कदम उठाएगा। इसके बदले अमेरिका ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों, नाकेबंदी और अन्य आर्थिक पाबंदियों में राहत दे सकता है। समझौते की शर्तों के पालन की जांच के लिए स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था बनाने का भी प्रस्ताव है। इसके तहत दोनों देशों के कदमों की पुष्टि की जाएगी, ताकि कोई भी पक्ष बिना दूसरी तरफ से जवाबी कार्रवाई या रियायत मिले बड़ा फैसला न करे।
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मोजतबा खामेनेई ने सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने सेना को हर तरह की चुनौती से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा। उनके आधिकारिक एक्स अकाउंट पर साझा किए गए बयानों के मुताबिक, उन्होंने निर्देश दिया कि हर स्तर और हर प्रकार के खतरे का तत्काल, प्रभावी और बिना भौगोलिक सीमा के जवाब दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर दुश्मन दोबारा सैन्य या आतंकी हमले शुरू करते हैं तो उन्हें खत्म करने का समय और शर्तें ईरान की सेना और जनता तय करेगी। खामेनेई ने सेना को अपनी युद्धक तैयारियों को मजबूत करने और दुश्मनों का मजबूती से मुकाबला करने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया। उनके मुताबिक, देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिकतम प्रतिरोध क्षमता जरूरी है।
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ट्रंप बोले- अमेरिका को युद्ध खत्म करने की जल्दबाजी नहीं
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका को ईरान के साथ चल रहे युद्ध को खत्म करने की कोई जल्दबाजी नहीं है। उन्होंने मौजूदा संघर्ष को सामान्य युद्ध से अलग बताया। ट्रंप के मुताबिक, इस मामले में समय अमेरिका के पक्ष में है और वाशिंगटन के पास इंतजार करने का विकल्प मौजूद है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान बातचीत करना चाहता है और लगातार बातचीत की कोशिश कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि ईरान आर्थिक मुश्किलों से जूझ रहा है। वहां सैनिकों और पुलिसकर्मियों को वेतन देने में भी परेशानी हो रही है। ट्रंप ने कहा कि यह युद्ध करीब सात महीने से चल रहा है, लेकिन अमेरिका इसे खत्म करने के लिए जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करेगा।
बातचीत के लिए दोहा में हो सकती है बैठक
इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच बातचीत के लिए एक शुरुआती प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया गया है। इसमें ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को किसी तीसरे देश में भेजने या उसके संवर्धन का स्तर कम करने का प्रस्ताव शामिल है। प्रस्ताव के मुताबिक, शुरुआती सहमति बनने के सात दिनों के भीतर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के आवागमन के लिए दोबारा खोला जा सकता है। यह समुद्री रास्ता वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि समझौते को लागू कराने और लंबे समय तक बनाए रखने में चीन गारंटर की भूमिका निभा सकता है। यानी चीन समझौते की शर्तों के पालन को सुनिश्चित करने में मदद कर सकता है।
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इसके अलावा, दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत के लिए तुर्किये के इस्तांबुल के बजाय कतर की राजधानी दोहा को संभावित स्थान बताया गया है। कतर के अखबार अल-अरबी अल-जदीद की रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि अप्रत्यक्ष बातचीत में प्रगति के बाद अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल दोहा में ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत कर सकता है।
समझौते में प्रतिबंधों में राहत का भी प्रस्ताव
प्रस्तावित ढांचे के अनुसार, ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और समुद्री सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कदम उठाएगा। इसके बदले अमेरिका ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों, नाकेबंदी और अन्य आर्थिक पाबंदियों में राहत दे सकता है। समझौते की शर्तों के पालन की जांच के लिए स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था बनाने का भी प्रस्ताव है। इसके तहत दोनों देशों के कदमों की पुष्टि की जाएगी, ताकि कोई भी पक्ष बिना दूसरी तरफ से जवाबी कार्रवाई या रियायत मिले बड़ा फैसला न करे।