इटली में महंगाई के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन: मेलोनी बोलीं- विरोध करना अधिकार, शहरों को आग के हवाले करना नहीं
इटली में बढ़ती महंगाई, कम वेतन और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान मिलान और बोलोन्या में हिंसा भड़क गई। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने शांतिपूर्ण विरोध का समर्थन करते हुए तोड़फोड़ और पुलिस पर हमलों की निंदा की। मिलान में करीब 50 लोगों को हिरासत में लिया गया और बोलोन्या में रेलवे स्टेशन के पास झड़पों के बाद कम से कम सात लोगों को हिरासत में लिया गया।
विस्तार
मेलोनी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक बयान जारी कर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और हिंसा करने वालों के बीच अंतर किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने और प्रदर्शन करने के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए।
पीएम मेलोनी ने कहा, "मैं उन हजारों लोगों का बहुत सम्मान करती हूं, जिन्होंने आज शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किया। इनमें ट्रेड यूनियन सीजीआईएल के आह्वान पर जुटे लोग भी शामिल थे। इस प्रदर्शन में वामपंथी नेता भी शामिल हुए। प्रदर्शन का मुद्दा चाहे कुछ भी हो, इसमें भागीदारी किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र की बुनियाद है।"
मिलान और बोलोन्या में हिंसा, पुलिसकर्मी घायल
प्रधानमंत्री ने कहा कि कई शहरों में कानून लागू कराने वाले अधिकारियों को सीधे हमलों और तोड़फोड़ का सामना करना पड़ा। हालात को देखते हुए प्रशासन को आपात कदम उठाने पड़े।
- मेलोनी ने कहा, "दूसरी ओर, हम इटली के अन्य शहरों में हुई घटनाओं को नजरअंदाज नहीं कर सकते। मिलान में सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंके गए, अधिकारी घायल हुए और हिंसा तथा तोड़फोड़ के कारण जुलूस रोकना पड़ा। ट्यूरिन में कुछ लोगों को पत्थर और खिड़कियां तोड़ने में इस्तेमाल होने वाले हथौड़ों के साथ रोका गया। बोलोन्या में हिंसा के कारण रेलवे स्टेशन को एहतियातन बंद करना पड़ा।"
- उन्होंने हिंसा करने वालों को ऐसे उपद्रवी बताया, जो प्रदर्शनों का फायदा उठाकर अराजकता फैलाते हैं, सुरक्षा सुनिश्चित करने वालों पर हमला करते हैं और पूरे शहर को बंधक जैसी स्थिति में डाल देते हैं। मेलोनी ने कहा, "प्रदर्शन करना अधिकार है। हमारे शहरों को आग के हवाले करना नहीं।"
विपक्ष से हिंसा की स्पष्ट निंदा करने की अपील
इटली की प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों के नेताओं से सड़क पर होने वाली हिंसा के खिलाफ स्पष्ट रुख अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर अस्पष्ट रवैया अपनाने से सार्वजनिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था प्रभावित होती है। मेलोनी ने कहा, "मैं विपक्ष से फिर अपील करती हूं कि इस मामले में अस्पष्ट रुख न अपनाएं। हिंसा की इन घटनाओं की स्पष्ट रूप से निंदा करें और यह संदेश दें कि हर प्रदर्शन शांतिपूर्ण होना चाहिए।"
Ho grande rispetto per le migliaia di persone che oggi hanno manifestato pacificamente, anche partecipando alla mobilitazione indetta dalla CGIL che ha visto anche la partecipazione dei leader della sinistra. Qualunque siano le idee per le quali si manifesta, la partecipazione è alla base di qualunque sana democrazia. Dall’altro lato, però, non possiamo ignorare quanto accaduto in altre piazze italiane. A Milano, come mostrano queste immagini, lanci di pietre contro le Forze dell’Ordine, agenti feriti, danneggiamenti e violenze che hanno costretto a interrompere il corteo. A Torino sono state fermate persone con sanpietrini e martelletti frangivetro. A Bologna i disordini hanno portato alla chiusura precauzionale della stazione ferroviaria. Teppisti che sfruttano le manifestazioni per seminare il caos, aggredire chi garantisce la sicurezza e tenere in ostaggio intere città. Manifestare è un diritto. Mettere a ferro e fuoco le nostre città non lo è. Rinnovo la mia richiesta alle opposizioni: non siano ambigue su questo. Condannino senza ambiguità queste violenze e lancino un appello chiaro affinché ogni mobilitazione sia pacifica. Di fronte a scene del genere, il rifiuto deve essere unanime. Ogni reticenza diventa giustificazione. Il silenzio non è accettabile.
— Giorgia Meloni (@GiorgiaMeloni) October 17, 2026
उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं के खिलाफ सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए। मेलोनी के मुताबिक, इस मामले में किसी भी तरह की हिचकिचाहट हिंसा को सही ठहराने का आधार बन सकती है और चुप्पी स्वीकार्य नहीं है।
महंगाई, कम वेतन और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर प्रदर्शन
इतालवी प्रसारक राय न्यूज के अनुसार, शनिवार को देश के कई शहरों में बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत के खिलाफ प्रदर्शन हुए। मिलान में अकेले पांच हजार से अधिक लोग जुटे। छात्र-नेतृत्व वाले इस आंदोलन का आह्वान 'इटली इन द स्क्वायर' समिति ने किया था।
प्रदर्शनकारियों ने बढ़ती महंगाई, कम वेतन, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पर्याप्त धन की कमी और सरकारी स्कूलों की बिगड़ती स्थिति के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने सरकार की नीतियों का भी विरोध किया। मिलान के पियाजा डुओमो इलाके में हालात बिगड़ गए। राय न्यूज के मुताबिक, हिंसा करने वालों ने दुकानों के शीशे तोड़े, पास के एक निर्माण स्थल में आग लगा दी और वाया ब्रोलेटो में पुलिस अधिकारियों की ओर आतिशबाजी फेंकी।
जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की, तो दंगा नियंत्रण पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए कार्रवाई की। इस दौरान करीब 12 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा और लगभग 50 लोगों को हिरासत में लेकर पुलिस मुख्यालय ले जाया गया।
बोलोन्या में रेलवे स्टेशन के पास झड़पें
बोलोन्या में हिंसा शहर के मुख्य रेलवे स्टेशन के आसपास केंद्रित रही। राय न्यूज के अनुसार, हुड पहने युवाओं के एक समूह ने पियाजा मेडालिए डी ओरो स्थित केंद्रीय रेलवे स्टेशन को निशाना बनाया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर, कांच की बोतलें, धुएं वाले बम और धातु के अवरोधक फेंके। इस दौरान सार्वजनिक किराये की कई साइकिलें भी गिरा दी गईं।
पुलिस और काराबिनिएरी बलों ने दंगा नियंत्रण उपकरणों के साथ मोर्चा संभाला। उन्होंने स्टेशन की ओर जाने वाले रास्तों को रोकने और भीड़ को हटाने के लिए पानी की बौछारों और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट के मुताबिक, झड़प के बाद कम से कम सात लोगों को हिरासत में लिया गया।
फ्रांस में भी महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन
महंगाई और बढ़ती जीवनयापन लागत को लेकर फ्रांस में भी देशव्यापी प्रदर्शन हुए। फ्रांस 24 के मुताबिक, पेरिस और कई अन्य शहरों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुईं। प्रदर्शनकारियों के निशाने पर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और उनकी सरकार रही। फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया कि देशभर में करीब 5.5 लाख लोगों ने प्रदर्शनों में हिस्सा लिया और पुलिस ने लगभग 400 लोगों को गिरफ्तार किया।