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अमेरिकी मध्यावधि चुनाव: नतीजों पर खामेनेई की दो टूक, कहा- समझौते की उम्मीद करना बड़ी भूल, हम नहीं बदलेगें रुख
Thu, 05 Nov 2026 12:10 AM IST
देवेश त्रिपाठी
एएनआई, तेहरान
एएनआई, तेहरान
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Thu, 05 Nov 2026 12:10 AM IST
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा हुसैनी खामेनेई ने कहा है कि अमेरिका के मध्यावधि चुनाव के नतीजों से ईरान की रक्षा नीति या अमेरिका के प्रति उसका रुख नहीं बदलेगा। उन्होंने अमेरिका के सामने किसी भी तरह की रियायत देने को बड़ी गलती बताया और चेतावनी दी कि इससे नए हमलों का खतरा बढ़ सकता है।
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ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को करारी हार का स्वाद चखना पड़ा है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने कहा कि अमेरिका के मध्यावधि चुनाव के नतीजों और वहां राजनीतिक दलों के बीच सत्ता के समीकरण में बदलाव से ईरान की रक्षा रणनीति पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका की ईरान के प्रति पुरानी दुश्मनी भी इससे कम नहीं होगी।
खामेनेई ने बुधवार को दिए बयान में अमेरिकी चुनाव के बाद की स्थिति पर अपनी बात रखी। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना के मुताबिक, उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन में सत्तारूढ़ व्यवस्था को चुनाव में झटका लगने के बाद भी अमेरिका के रुख में बदलाव की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका के सामने झुकना या उसे रियायतें देना गंभीर गलती होगी।
'अमेरिका चाहता है कि ईरान बिना किसी शर्त के करे आत्मसमर्पण'
खामेनेई ने कहा, "अगर अब भी कुछ लोग यह उम्मीद लगाए बैठे हैं कि प्रभुत्ववादी व्यवस्था अपना व्यवहार बदल सकती है या वहां राजनीतिक दलों और गुटों में बदलाव से उसकी नीति बदल जाएगी, तो वे गलत हैं। अगर किसी को लगता है कि अमेरिका को रियायतें देकर ईरानी राष्ट्र के प्रति उसकी दुश्मनी खत्म कराई जा सकती है, तो यह बहुत बड़ी भूल है।"
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उन्होंने कहा कि अमेरिका की नीति में बदलाव की उम्मीद करना अतीत से मिले सबक को नजरअंदाज करना है। इससे ईरान के लोगों के संघर्ष और प्रतिरोध से हासिल उपलब्धियां भी कमजोर होंगी। खामेनेई ने कहा, "यह गलत धारणा उस महान जीत के प्रति कृतघ्नता है, जिसे ईरान के मुस्लिम राष्ट्र ने ईश्वर पर भरोसे, अपने धैर्य और संघर्ष के दम पर हासिल किया है। महाशैतान अमेरिका चाहता है कि ईरानी राष्ट्र बिना किसी शर्त के आत्मसमर्पण कर दे।"
मोजतबा खामेनेई ने दी चेतावनी
उन्होंने आगाह किया कि अमेरिका के दबाव के आगे झुकने का कोई भी संकेत देश के लिए नुकसानदेह होगा। इससे अमेरिका की ओर से और मांगें रखे जाने तथा नए सैन्य हमले किए जाने का खतरा बढ़ सकता है। खामेनेई ने कहा, "इस दबंग दुश्मन के सामने झुकने की थोड़ी सी भी इच्छा हमारे शहीदों के खून और पूरे ईरानी राष्ट्र के बलिदान से हासिल हुई बड़ी पूंजी को गंवा सकती है। इससे अहंकारी दुश्मन को और मांगें रखने, नए युद्ध शुरू करने और आगे हमले करने का हौसला मिलेगा।"
ईरान की सुरक्षा नीति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि देश के लिए आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता अपनी आंतरिक ताकत बढ़ाना, राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना तथा सामाजिक एकजुटता बनाए रखना है।
अमेरिका को लेकर क्या बदलेगा ईरान का रुख?
इरना के मुताबिक, खामेनेई ने कहा, "ईरानी राष्ट्र अब पहले से कहीं अधिक स्पष्ट रूप से समझता है कि अपराधी अमेरिका के प्रति उसे क्या रुख अपनाना चाहिए। इसके बावजूद अमेरिका की बढ़ती दुश्मनी की जड़ों, कारणों और अहम मोड़ों की समीक्षा करना और उसके खिलाफ ईरानी राष्ट्र के मजबूत प्रतिरोध को समझना आगे का रास्ता दिखाने वाली रोशनी है।"
उन्होंने 1953 में ईरान में हुए तख्तापलट से लेकर आर्थिक प्रतिबंधों और सीधे सैन्य कार्रवाई तक अमेरिका के दशकों पुराने विरोध का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में हाल के घटनाक्रमों ने विदेशी सैन्य ताकत की सीमाएं उजागर की हैं। साथ ही, इनसे ईरान की आत्मनिर्भरता की रणनीति की उपयोगिता भी साबित हुई है। खामेनेई ने कहा कि इस्लामी क्रांति में ईरानी राष्ट्र की बड़ी जीत के बाद अमेरिका का शत्रुतापूर्ण व्यवहार ईरानी लोगों के खिलाफ की गई लंबी कार्रवाइयों की सूची में शामिल है।
अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी की हार के लिए ईरान युद्ध को बताया जिम्मेदार
खामेनेई का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने 2026 के मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के लिए ईरान के साथ युद्ध को प्रमुख कारण बताया है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भी इस बारे में यही राय है। वेंस ने कंजरवेटिव मतदाताओं से अपनी नाराजगी को अगले चुनावों में इस्तेमाल करने की अपील की।
चुनाव नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए वेंस ने कहा कि पार्टी के आंतरिक चुनावी आंकड़ों में कंजरवेटिव मतदाताओं की अच्छी भागीदारी दिखाई दी थी। इसके बावजूद पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। वेंस ने लिखा, "हमारी हार का असली कारण लगभग सभी को पता है... हम युद्ध की वजह से हारे। राष्ट्रपति ने भी कल रात यही कहा था।"
ईरान को ट्रंप ने भी माना मध्यावधि चुनाव में हार की वजह
इससे पहले मंगलवार रात राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी माना था कि ईरान के साथ सैन्य संघर्ष ने मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की व्यापक हार में कुछ भूमिका निभाई। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' के साथ फोन पर बातचीत में ट्रंप से जब पार्टी के खराब प्रदर्शन के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्वीकार किया कि "ईरान भी इसका एक कारण था।" हालांकि, उन्होंने कहा कि साल की शुरुआत में युद्ध शुरू करने के अपने फैसले पर उन्हें अब भी भरोसा है।
डेमोक्रेटिक पार्टी को दोनों सदनों में बढ़त मिलने का अनुमान
2026 के मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की स्थिति मजबूत होने के संकेत मिले हैं। अमेरिकी मीडिया नेटवर्क के अनुमानों के मुताबिक, पार्टी कांग्रेस के दोनों सदनों में फिर से नियंत्रण हासिल कर सकती है। इससे वॉशिंगटन में राजनीतिक संतुलन बदलने की संभावना है।
प्रतिनिधि सभा में बहुमत मिलने पर डेमोक्रेटिक पार्टी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की जांच और सुनवाई के जरिए उसकी गतिविधियों पर संसदीय निगरानी बढ़ा सकेगी। वहीं, सीनेट में नियंत्रण मिलने से उसे कानून बनाने और राष्ट्रपति की ओर से की जाने वाली नियुक्तियों पर भी अधिक प्रभाव मिलेगा।
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खामेनेई ने बुधवार को दिए बयान में अमेरिकी चुनाव के बाद की स्थिति पर अपनी बात रखी। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना के मुताबिक, उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन में सत्तारूढ़ व्यवस्था को चुनाव में झटका लगने के बाद भी अमेरिका के रुख में बदलाव की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका के सामने झुकना या उसे रियायतें देना गंभीर गलती होगी।
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'अमेरिका चाहता है कि ईरान बिना किसी शर्त के करे आत्मसमर्पण'
खामेनेई ने कहा, "अगर अब भी कुछ लोग यह उम्मीद लगाए बैठे हैं कि प्रभुत्ववादी व्यवस्था अपना व्यवहार बदल सकती है या वहां राजनीतिक दलों और गुटों में बदलाव से उसकी नीति बदल जाएगी, तो वे गलत हैं। अगर किसी को लगता है कि अमेरिका को रियायतें देकर ईरानी राष्ट्र के प्रति उसकी दुश्मनी खत्म कराई जा सकती है, तो यह बहुत बड़ी भूल है।"
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उन्होंने कहा कि अमेरिका की नीति में बदलाव की उम्मीद करना अतीत से मिले सबक को नजरअंदाज करना है। इससे ईरान के लोगों के संघर्ष और प्रतिरोध से हासिल उपलब्धियां भी कमजोर होंगी। खामेनेई ने कहा, "यह गलत धारणा उस महान जीत के प्रति कृतघ्नता है, जिसे ईरान के मुस्लिम राष्ट्र ने ईश्वर पर भरोसे, अपने धैर्य और संघर्ष के दम पर हासिल किया है। महाशैतान अमेरिका चाहता है कि ईरानी राष्ट्र बिना किसी शर्त के आत्मसमर्पण कर दे।"
मोजतबा खामेनेई ने दी चेतावनी
उन्होंने आगाह किया कि अमेरिका के दबाव के आगे झुकने का कोई भी संकेत देश के लिए नुकसानदेह होगा। इससे अमेरिका की ओर से और मांगें रखे जाने तथा नए सैन्य हमले किए जाने का खतरा बढ़ सकता है। खामेनेई ने कहा, "इस दबंग दुश्मन के सामने झुकने की थोड़ी सी भी इच्छा हमारे शहीदों के खून और पूरे ईरानी राष्ट्र के बलिदान से हासिल हुई बड़ी पूंजी को गंवा सकती है। इससे अहंकारी दुश्मन को और मांगें रखने, नए युद्ध शुरू करने और आगे हमले करने का हौसला मिलेगा।"
ईरान की सुरक्षा नीति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि देश के लिए आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता अपनी आंतरिक ताकत बढ़ाना, राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना तथा सामाजिक एकजुटता बनाए रखना है।
अमेरिका को लेकर क्या बदलेगा ईरान का रुख?
इरना के मुताबिक, खामेनेई ने कहा, "ईरानी राष्ट्र अब पहले से कहीं अधिक स्पष्ट रूप से समझता है कि अपराधी अमेरिका के प्रति उसे क्या रुख अपनाना चाहिए। इसके बावजूद अमेरिका की बढ़ती दुश्मनी की जड़ों, कारणों और अहम मोड़ों की समीक्षा करना और उसके खिलाफ ईरानी राष्ट्र के मजबूत प्रतिरोध को समझना आगे का रास्ता दिखाने वाली रोशनी है।"
उन्होंने 1953 में ईरान में हुए तख्तापलट से लेकर आर्थिक प्रतिबंधों और सीधे सैन्य कार्रवाई तक अमेरिका के दशकों पुराने विरोध का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में हाल के घटनाक्रमों ने विदेशी सैन्य ताकत की सीमाएं उजागर की हैं। साथ ही, इनसे ईरान की आत्मनिर्भरता की रणनीति की उपयोगिता भी साबित हुई है। खामेनेई ने कहा कि इस्लामी क्रांति में ईरानी राष्ट्र की बड़ी जीत के बाद अमेरिका का शत्रुतापूर्ण व्यवहार ईरानी लोगों के खिलाफ की गई लंबी कार्रवाइयों की सूची में शामिल है।
अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी की हार के लिए ईरान युद्ध को बताया जिम्मेदार
खामेनेई का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने 2026 के मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के लिए ईरान के साथ युद्ध को प्रमुख कारण बताया है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भी इस बारे में यही राय है। वेंस ने कंजरवेटिव मतदाताओं से अपनी नाराजगी को अगले चुनावों में इस्तेमाल करने की अपील की।
चुनाव नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए वेंस ने कहा कि पार्टी के आंतरिक चुनावी आंकड़ों में कंजरवेटिव मतदाताओं की अच्छी भागीदारी दिखाई दी थी। इसके बावजूद पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। वेंस ने लिखा, "हमारी हार का असली कारण लगभग सभी को पता है... हम युद्ध की वजह से हारे। राष्ट्रपति ने भी कल रात यही कहा था।"
ईरान को ट्रंप ने भी माना मध्यावधि चुनाव में हार की वजह
इससे पहले मंगलवार रात राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी माना था कि ईरान के साथ सैन्य संघर्ष ने मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की व्यापक हार में कुछ भूमिका निभाई। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' के साथ फोन पर बातचीत में ट्रंप से जब पार्टी के खराब प्रदर्शन के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्वीकार किया कि "ईरान भी इसका एक कारण था।" हालांकि, उन्होंने कहा कि साल की शुरुआत में युद्ध शुरू करने के अपने फैसले पर उन्हें अब भी भरोसा है।
डेमोक्रेटिक पार्टी को दोनों सदनों में बढ़त मिलने का अनुमान
2026 के मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की स्थिति मजबूत होने के संकेत मिले हैं। अमेरिकी मीडिया नेटवर्क के अनुमानों के मुताबिक, पार्टी कांग्रेस के दोनों सदनों में फिर से नियंत्रण हासिल कर सकती है। इससे वॉशिंगटन में राजनीतिक संतुलन बदलने की संभावना है।
प्रतिनिधि सभा में बहुमत मिलने पर डेमोक्रेटिक पार्टी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की जांच और सुनवाई के जरिए उसकी गतिविधियों पर संसदीय निगरानी बढ़ा सकेगी। वहीं, सीनेट में नियंत्रण मिलने से उसे कानून बनाने और राष्ट्रपति की ओर से की जाने वाली नियुक्तियों पर भी अधिक प्रभाव मिलेगा।