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नेपाल संकट: क्या भारत से आर्थिक मदद मांगेंगे बालेन शाह? नेपाली पीएम के प्रस्तावित दौरे से पहले आई बड़ी जानकारी
Sat, 17 Oct 2026 04:38 PM IST
अमन मौर्या
आईएएनएस, काठमांडू, नेपाल
आईएएनएस, काठमांडू, नेपाल
Published by: अमन मौर्या
Updated Sat, 17 Oct 2026 04:38 PM IST
नेपाल के पीएम बालेन शाह की नवंबर के अंत में होने वाली संभावित नई दिल्ली यात्रा के दौरान, नेपाल भारत से एक बड़े वित्तीय सहायता पैकेज की मांग कर सकता है। देश भीषण बाढ़ के बाद से आर्थिक संकट से जूझ रहा है।
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बालेन शाह, प्रधानमंत्री, नेपाल
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
नेपाल के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की नई दिल्ली की प्रस्तावित यात्रा (जो संभवतः नवंबर के आखिर में होगी) के दौरान, नेपाल भारत से एक बड़े सहायता पैकेज की मांग कर रहा है। नेपाल और भारत ने अभी तक इस यात्रा की तारीख की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि शाह 22 या 23 नवंबर को नई दिल्ली जा सकते हैं। प्रधानमंत्री की प्रेस सलाहकार दीपा दहाल ने मीडिया को बताया कि प्रधानमंत्री के नवंबर के आखिरी दिनों में भारत जाने की संभावना है। वह भारत में कितने दिन रहेंगे, यह अभी तय नहीं हुआ है।
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विदेश मंत्रालय ने क्या बताया?
विदेश मंत्रालय ने अभी तक भारतीय पक्ष को इस यात्रा के लिए कोई निश्चित तारीख नहीं बताई है। पांच मार्च को हुए संसदीय चुनावों के बाद, 27 मार्च को नेपाल के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले शाह को भारत ने नई दिल्ली आने का निमंत्रण दिया था। अब तक शाह ने केवल एक बार विदेश यात्रा की है। सितंबर में वे संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भाग लेने के लिए न्यूयॉर्क गए थे। उनकी यह प्रस्तावित नई दिल्ली यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब नेपाल 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के संकट से जूझ रहा है। 'नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी' के अनुसार, इस बाढ़ में लगभग 1,500 लोगों की जान चली गई, जबकि 5,000 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं।
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नेपाल की भारत से क्या है मांग?
भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों में आई बाढ़ ने कई बस्तियों, जलविद्युत संयंत्रों, सड़कों और पुलों को बहा दिया, जिससे अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है और अब पुनर्निर्माण के लिए भारी धनराशि की आवश्यकता है। विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि हालांकि पुनर्निर्माण के लिए बहुत बड़े संसाधनों की जरूरत है, लेकिन देश में बाढ़ आने से पहले ही हम भारत से एक बड़े सहायता पैकेज की मांग कर रहे थे। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि नेपाल कितनी राशि की मांग कर रहा है। अधिकारी ने कहा कि नेपाली सरकार ऐसी सहायता चाहती है जिसमें शर्तें कम हों, ताकि काम आसानी से और तेजी से हो सके और कम समय में ही इसके स्पष्ट परिणाम दिखाई दें।
भारत द्वारा नेपाल को अपने बजट आवंटन के जरिए दी जाने वाली नियमित सहायता के अलावा, नेपाल भारत की 'लाइन ऑफ क्रेडिट' (एलओसी) से भी बड़े पैमाने पर संसाधनों का इस्तेमाल कर रहा है। इसमें 2015 के भूकंप के बाद पुनर्निर्माण कार्यों के लिए दी गई मदद भी शामिल है, जिसके लिए भारत ने 1 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 9,506 करोड़ भारतीय रुपए) देने का वादा किया था।
ये भी पढ़ें: किम जोंग का शक्ति प्रदर्शन: उत्तर कोरिया ने एआई-बेस्ड टॉरपीडो सिस्टम का किया परीक्षण, प्योंगयांग ने क्या कहा?
भारतीय दूतावास की वेबसाइट में क्या जानकारी?
भारतीय दूतावास की वेबसाइट के अनुसार, नेपाल में अभी चार 'लाइन ऑफ क्रेडिट' (एलओसी) का इस्तेमाल हो रहा है। इनकी राशि क्रमशः 100 मिलियन, 250 मिलियन, 550 मिलियन और 750 मिलियन अमेरिकी डॉलर है, जो कुल मिलाकर 1.65 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 15,669.31 करोड़ भारतीय रुपए) बनती है। वेबसाइट के मुताबिक, ये एलओसी नेपाल सरकार द्वारा प्राथमिकता दी गई बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं के लिए हैं। 'एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक ऑफ इंडिया' (एक्जिम बैंक) के जरिए दिए जाने वाले इस क्रेडिट के तहत यह शर्त होती है कि इसमें इस्तेमाल होने वाले कुछ हिस्से भारत से ही लिए जाएं। विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि नेपाल न केवल एक बड़ा वित्तीय पैकेज चाहता है, बल्कि वह लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवादों को सुलझाने और ऊर्जा, व्यापार, पारगमन तथा हवाई सेवाओं के क्षेत्र में ठोस परिणाम भी चाहता है।
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विदेश मंत्रालय ने क्या बताया?
विदेश मंत्रालय ने अभी तक भारतीय पक्ष को इस यात्रा के लिए कोई निश्चित तारीख नहीं बताई है। पांच मार्च को हुए संसदीय चुनावों के बाद, 27 मार्च को नेपाल के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले शाह को भारत ने नई दिल्ली आने का निमंत्रण दिया था। अब तक शाह ने केवल एक बार विदेश यात्रा की है। सितंबर में वे संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भाग लेने के लिए न्यूयॉर्क गए थे। उनकी यह प्रस्तावित नई दिल्ली यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब नेपाल 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के संकट से जूझ रहा है। 'नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी' के अनुसार, इस बाढ़ में लगभग 1,500 लोगों की जान चली गई, जबकि 5,000 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं।
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नेपाल की भारत से क्या है मांग?
भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों में आई बाढ़ ने कई बस्तियों, जलविद्युत संयंत्रों, सड़कों और पुलों को बहा दिया, जिससे अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है और अब पुनर्निर्माण के लिए भारी धनराशि की आवश्यकता है। विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि हालांकि पुनर्निर्माण के लिए बहुत बड़े संसाधनों की जरूरत है, लेकिन देश में बाढ़ आने से पहले ही हम भारत से एक बड़े सहायता पैकेज की मांग कर रहे थे। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि नेपाल कितनी राशि की मांग कर रहा है। अधिकारी ने कहा कि नेपाली सरकार ऐसी सहायता चाहती है जिसमें शर्तें कम हों, ताकि काम आसानी से और तेजी से हो सके और कम समय में ही इसके स्पष्ट परिणाम दिखाई दें।
भारत द्वारा नेपाल को अपने बजट आवंटन के जरिए दी जाने वाली नियमित सहायता के अलावा, नेपाल भारत की 'लाइन ऑफ क्रेडिट' (एलओसी) से भी बड़े पैमाने पर संसाधनों का इस्तेमाल कर रहा है। इसमें 2015 के भूकंप के बाद पुनर्निर्माण कार्यों के लिए दी गई मदद भी शामिल है, जिसके लिए भारत ने 1 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 9,506 करोड़ भारतीय रुपए) देने का वादा किया था।
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भारतीय दूतावास की वेबसाइट में क्या जानकारी?
भारतीय दूतावास की वेबसाइट के अनुसार, नेपाल में अभी चार 'लाइन ऑफ क्रेडिट' (एलओसी) का इस्तेमाल हो रहा है। इनकी राशि क्रमशः 100 मिलियन, 250 मिलियन, 550 मिलियन और 750 मिलियन अमेरिकी डॉलर है, जो कुल मिलाकर 1.65 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 15,669.31 करोड़ भारतीय रुपए) बनती है। वेबसाइट के मुताबिक, ये एलओसी नेपाल सरकार द्वारा प्राथमिकता दी गई बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं के लिए हैं। 'एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक ऑफ इंडिया' (एक्जिम बैंक) के जरिए दिए जाने वाले इस क्रेडिट के तहत यह शर्त होती है कि इसमें इस्तेमाल होने वाले कुछ हिस्से भारत से ही लिए जाएं। विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि नेपाल न केवल एक बड़ा वित्तीय पैकेज चाहता है, बल्कि वह लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवादों को सुलझाने और ऊर्जा, व्यापार, पारगमन तथा हवाई सेवाओं के क्षेत्र में ठोस परिणाम भी चाहता है।