फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Teachers will not lost job due to AI Linda McMahon US Secretary Education says machines cannot replace humans

अमेरिका में AI की वजह से नहीं जाएगी शिक्षकों की नौकरी: शिक्षा मंत्री बोलीं- मशीन नहीं ले सकता इंसान की जगह

Tue, 25 Aug 2026 09:21 AM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Tue, 25 Aug 2026 09:21 AM IST
सार
Register For Event

अमेरिकी शिक्षा मंत्री लिंडा मैकमोहन ने शिक्षा में AI के इस्तेमाल का समर्थन करते हुए स्पष्ट किया है कि यह तकनीक शिक्षकों की जगह नहीं ले सकती। उनके अनुसार, AI कमजोर छात्रों के लिए व्यक्तिगत ट्यूटर और बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों के लिए उन्नत अध्ययन का माध्यम बन सकता है, लेकिन कक्षा में मानवीय संवाद जरूरी रहेगा।

विज्ञापन
Teachers will not lost job due to AI Linda McMahon US Secretary Education says machines cannot replace humans
लिंडा मैकमोहन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिकी शिक्षा मंत्री लिंडा मैकमोहन ने सोमवार को कहा कि स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपनाया जाना चाहिए, लेकिन इसके इस्तेमाल के लिए जरूरी सुरक्षा उपाय और स्पष्ट सीमाएं तय होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि AI को कभी भी शिक्षकों के विकल्प के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मैकमोहन ने कहा कि AI अब शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बन चुका है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीक चाहे जितनी विकसित हो जाए, कक्षा में शिक्षक और छात्रों के बीच मानवीय संवाद की जगह नहीं ले सकती।

विज्ञापन


AI को अपनाना जरूरी, लेकिन सुरक्षा उपाय भी हों
मैकमोहन ने कहा कि सरकार ने फिलहाल AI को रेगुलेट करने के बारे में विस्तार से चर्चा नहीं की है, लेकिन वह शिक्षा के क्षेत्र में इस तकनीक को अपनाने पर जोर दे रही है। उन्होंने कहा कि AI आ चुका है और स्कूलों को इससे दूरी बनाने के बजाय इसका सही तरीके से इस्तेमाल करना सीखना होगा। उन्होंने ऑस्टिन, टेक्सास के अल्फा स्कूल का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने वहां AI को वास्तविक कक्षा में काम करते हुए देखा है। उनके मुताबिक, इस तकनीक को अपनाने के साथ कुछ नियम और सुरक्षा सीमाएं तय करना भी जरूरी है, ताकि इसका इस्तेमाल छात्रों के हित में हो।
विज्ञापन


शिक्षक की जगह नहीं ले सकता AI
अमेरिकी शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि AI का इस्तेमाल शिक्षक के विकल्प के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा में शिक्षक और छात्र के बीच प्रत्यक्ष मानवीय संपर्क बेहद महत्वपूर्ण है। मैकमोहन के मुताबिक, तकनीक बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है, लेकिन शिक्षा केवल जानकारी हासिल करने का नाम नहीं है। कक्षा में शिक्षक का मार्गदर्शन, संवाद और बच्चों की व्यक्तिगत जरूरतों को समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
विज्ञापन
विज्ञापन


कमजोर छात्रों से लेकर तेज छात्रों तक 
मैकमोहन ने AI के संभावित फायदों को गिनाते हुए कहा कि यह बच्चों के लिए एक व्यक्तिगत ट्यूटर की तरह काम कर सकता है। जो छात्र किसी विषय में पीछे रह गए हैं, वे AI की मदद से पाठ दोबारा समझ सकते हैं और अपनी गति से अभ्यास कर सकते हैं। वहीं, जो छात्र अपनी कक्षा के स्तर से आगे हैं, उनके लिए AI ज्यादा उन्नत सामग्री और चुनौतीपूर्ण पाठ उपलब्ध कराने में मदद कर सकता है। उन्होंने कहा कि अगर इस तकनीक का सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह छात्रों के लिए एक बेहद उपयोगी अवसर साबित हो सकती है।

शिक्षा विभाग में बड़े बदलाव की तैयारी
मैकमोहन ने ट्रंप प्रशासन की शिक्षा विभाग में बड़े बदलाव की योजना पर भी बात की। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शिक्षा व्यवस्था में एक बड़े बदलाव के पक्ष में हैं और चाहते हैं कि कई जिम्मेदारियां संघीय सरकार से वापस राज्यों को दी जाएं। मैकमोहन के मुताबिक, ट्रंप का मानना है कि दशकों तक भारी खर्च के बावजूद अमेरिकी छात्रों के परीक्षा परिणाम लगातार कमजोर हुए हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर उनसे कहा था कि देश अपने बच्चों के लिए अपेक्षित परिणाम हासिल नहीं कर पाया है और अब इसमें बड़े बदलाव की जरूरत है।

3 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च, फिर भी टेस्ट स्कोर में गिरावट
मैकमोहन ने कहा कि अमेरिकी शिक्षा विभाग 1980 में अस्तित्व में आया और तब से शिक्षा पर 3 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद छात्रों के टेस्ट स्कोर में लगातार गिरावट देखने को मिली है। उन्होंने इसी आधार पर तर्क दिया कि मौजूदा संघीय शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा जरूरी है। उनका कहना है कि शिक्षा से जुड़ी ज्यादा जिम्मेदारियां राज्यों को सौंपने से स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने और स्कूलों की जरूरत के मुताबिक नीतियां बनाने में मदद मिल सकती है।

शिक्षा विभाग बंद करने की दिशा में 'प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट'
मैकमोहन ने कहा कि शिक्षा विभाग को पूरी तरह खत्म करने के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी। इसलिए प्रशासन फिलहाल यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि विभाग की कुछ जिम्मेदारियां दूसरी संघीय एजेंसियां ज्यादा प्रभावी ढंग से संभाल सकती हैं। उन्होंने बताया कि प्रशासन विभिन्न विभागों के बीच अंतर-एजेंसी समझौते कर रहा है और कुछ कार्यक्रमों तथा जिम्मेदारियों को दूसरी एजेंसियों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। मैकमोहन के अनुसार, इस प्रक्रिया का उद्देश्य कांग्रेस के सामने यह साबित करना है कि शिक्षा से जुड़े कुछ काम शिक्षा विभाग के बाहर भी प्रभावी तरीके से किए जा सकते हैं।

राज्यों को ज्यादा अधिकार देने की तैयारी
मैकमोहन ने कहा कि शिक्षा को राज्यों के स्तर पर वापस ले जाना ट्रंप प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। उनका तर्क है कि स्थानीय और राज्य सरकारें अपने छात्रों की जरूरतों को संघीय सरकार की तुलना में ज्यादा बेहतर तरीके से समझ सकती हैं। उन्होंने शिक्षा विभाग को मुख्य रूप से कांग्रेस द्वारा स्वीकृत धनराशि को आगे पहुंचाने वाली संस्था के रूप में भी वर्णित किया। उनके मुताबिक, विभाग के कई कार्यक्रम ऐसे हैं जो शिक्षा विभाग के गठन से पहले दूसरी संघीय एजेंसियों के माध्यम से संचालित होते थे।

'स्कूल चॉइस' को बढ़ावा देने वाला टैक्स क्रेडिट
स्कूल चुनने की आजादी यानी 'स्कूल चॉइस' के मुद्दे पर मैकमोहन ने ट्रंप के बड़े टैक्स और खर्च से जुड़े कानून में शामिल संघीय टैक्स क्रेडिट की चर्चा की। उन्होंने इसे अब तक स्कूल चॉइस के अवसर को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक बताया। इस योजना के तहत गवर्नर इसमें भाग ले सकेंगे और छात्रों को छात्रवृत्ति देने वाली संस्थाएं स्थापित कर सकेंगे। इन संस्थाओं को योगदान देने वाले लोगों को 1,700 डॉलर तक का टैक्स क्रेडिट मिल सकता है।

परिवारों को स्कूल बदलने और ट्यूशन का विकल्प
मैकमोहन ने कहा कि इस योजना से परिवारों को अपने बच्चों को खराब प्रदर्शन करने वाले स्कूलों से निकालकर दूसरे विकल्प चुनने में मदद मिल सकती है। इसका इस्तेमाल स्कूल के बाद की पढ़ाई, निजी ट्यूशन और बच्चों की अतिरिक्त शैक्षणिक जरूरतों को पूरा करने के लिए भी किया जा सकेगा। यह व्यवस्था दिव्यांग बच्चों वाले परिवारों के लिए भी मददगार हो सकती है, क्योंकि उन्हें अपनी परिस्थितियों के अनुरूप शिक्षा के ज्यादा विकल्प मिल सकेंगे।

1.7 ट्रिलियन डॉलर के छात्र ऋण सिस्टम का भी होगा हस्तांतरण
मैकमोहन ने बताया कि करीब 1.7 ट्रिलियन डॉलर की छात्र ऋण व्यवस्था की निगरानी से जुड़ी जिम्मेदारियों को चरणबद्ध तरीके से ट्रेजरी विभाग को सौंपने के लिए अंतर-एजेंसी समझौता किया गया है। प्रशासन इस हस्तांतरण को जल्दबाजी में करने के बजाय चरणबद्ध और सावधानीपूर्वक आगे बढ़ा रहा है। इसके तहत यह तय किया जा रहा है कि कौन सी जिम्मेदारी किस समय और किस तरीके से दूसरी एजेंसी को सौंपी जाए।


ये भी पढ़ें: West Asia Crisis: हेगसेथ बोले- जरूरत पड़ी तो ईरान पर मिसाइल से हमला; सख्ती पर इस्राइली PM नेतन्याहू क्या बोले

1980 में शुरू हुआ था शिक्षा विभाग
अमेरिकी शिक्षा विभाग को 1979 में राष्ट्रपति जिमी कार्टर द्वारा हस्ताक्षरित कानून के बाद कैबिनेट स्तर की एजेंसी का दर्जा मिला और उसने 1980 में काम करना शुरू किया। विभाग संघीय शिक्षा फंडिंग, नागरिक अधिकारों के अनुपालन, छात्रों से जुड़े कार्यक्रमों और शिक्षा संबंधी डेटा कार्यक्रमों का प्रबंधन करता है। हालांकि, अमेरिका में पब्लिक स्कूलों के संचालन की मुख्य जिम्मेदारी राज्यों और स्थानीय प्रशासन की होती है। ट्रंप प्रशासन अब संघीय शिक्षा विभाग की भूमिका को सीमित करने और अधिक जिम्मेदारियां राज्यों को सौंपने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed