चीन: तकलामकान की रेत के नीचे छिपा रहस्य खुला, मिले पानी के दो बड़े भंडार; ताजे और खारे भूजल ने चौंकाया
जिस जगह दूर-दूर तक सिर्फ रेत दिखाई देती है, जहां पानी जीवन की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है और मौसम बेहद शुष्क रहता है, उसी तकलामकान रेगिस्तान के नीचे पानी के दो बड़े भंडार मिले हैं। वैज्ञानिकों के लिए इस खोज की खास बात सिर्फ पानी की मौजूदगी नहीं है। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि यहां मौजूद भूजल स्थिर नहीं, बल्कि भूमिगत परतों में बह रहा है और प्राकृतिक प्रक्रिया से इसकी भरपाई भी होती रहती है।यानी सवाल अब सिर्फ यह नहीं है कि रेगिस्तान के नीचे कितना पानी है, बल्कि यह है कि यह पानी कहां से आता है, किस दिशा में बहता है और इसे कितनी मात्रा में निकालना सुरक्षित होगा।
चीन के ग्लोबल टाइम्स ने बुधवार को शिनच्यांग उइगुर स्वायत्त क्षेत्र के भूगर्भीय ब्यूरो के जल विज्ञान एवं पर्यावरण भूविज्ञान सर्वेक्षण केंद्र के हवाले से यह जानकारी दी। भूजल की यह खोज एक विशेष अन्वेषण परियोजना के दौरान हुई।दोनों स्थान तकलामकान के अलग-अलग हिस्सों में हैं। पहला भूजल भंडार रेगिस्तान के दक्षिणी किनारे पर मिनफेंग काउंटी के पास मिला, जबकि दूसरा रेगिस्तान के अंदर मजारताग पर्वतों के दक्षिण में पाया गया।
जमीन के नीचे पानी का नक्शा कैसे बनाया
परियोजना प्रमुख कांग जियान के अनुसार वैज्ञानिकों ने पानी का पता लगाने के लिए कई तकनीकों का इस्तेमाल किया। इनमें उपग्रह रिमोट सेंसिंग, हवाई भूभौतिकीय सर्वेक्षण, जमीन पर खोज और ड्रिलिंग शामिल हैं।इसके बाद वैज्ञानिकों ने 3-आयामी और जलभूवैज्ञानिक मॉडल तैयार किए। इनकी मदद से ताजा और खारे भूजल के फैलाव, उपलब्धता और संभावित इस्तेमाल का आकलन किया गया।जांच में दोनों क्षेत्रों में ताजा और खारा दोनों तरह का भूजल मिला है।
पानी रुका हुआ नहीं, भूमिगत परतों में बह रहा
इस खोज का सबसे दिलचस्प पहलू भूजल का प्रवाहमान होना है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह पानी जमीन के नीचे किसी बंद जगह में वर्षों से जमा होकर स्थिर नहीं है। यह भूमिगत जलभृतों और परतों के भीतर आगे बढ़ रहा है।जांच में इसके नवीकरणीय होने के संकेत भी मिले हैं। सरल शब्दों में कहें तो प्राकृतिक प्रक्रिया के जरिए इस भूजल में पानी दोबारा पहुंच सकता है।लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि तकलामकान के नीचे पानी का असीमित भंडार मिल गया है। किसी भी भूजल स्रोत के टिकाऊ इस्तेमाल के लिए यह जानना जरूरी होता है कि प्राकृतिक रूप से उसमें पानी कितनी तेजी से पहुंचता है और उसके मुकाबले कितनी मात्रा निकाली जा सकती है।
क्या खारा पानी भी आएगा काम?
वैज्ञानिक अब खारे भूजल के इस्तेमाल की संभावना भी परख रहे हैं। सर्वेक्षण केंद्र ने कम खारे भूजल से सिंचाई के सुरक्षित इस्तेमाल की जांच के लिए एक पायलट स्टेशन बनाया है।इसका संबंध सिर्फ खेती से नहीं है। चीन तकलामकान के विस्तार को रोकने और रेगिस्तान में पर्यावरण बहाली से जुड़ी परियोजनाएं भी चला रहा है। ऐसे में यदि कम खारे भूजल का सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल संभव होता है तो यह इन परियोजनाओं के लिए एक अतिरिक्त जल स्रोत बन सकता है।
असली चुनौती पानी निकालना नहीं, बचाकर इस्तेमाल करना
सर्वेक्षण केंद्र के निदेशक झांग लेई के मुताबिक परियोजना का महत्व केवल जमीन के नीचे मौजूद पानी की मात्रा पता करने तक सीमित नहीं है। बड़ा सवाल यह है कि क्या इन संसाधनों के जरिए रेगिस्तानी क्षेत्रों के दीर्घकालिक विकास को टिकाऊ बनाया जा सकता है।इसके साथ दक्षिणी शिनच्यांग में जल सुरक्षा मजबूत करने के लिए भूवैज्ञानिक समाधान तलाशना भी परियोजना का उद्देश्य है। यही वजह है कि वैज्ञानिकों के लिए अगला चरण बेहद महत्वपूर्ण होगा। पानी की उपलब्धता, उसके प्राकृतिक प्रवाह और पुनर्भरण की दर का आकलन करने के बाद यह तय करना होगा कि इसका सुरक्षित दोहन कितना हो सकता है।
चीन का सबसे बड़ा रेगिस्तान
शिन्हुआ के अनुसार तकलामकान रेगिस्तान 3,37,600 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है और इसकी परिधि करीब 3,046 किलोमीटर है। यह चीन का सबसे बड़ा रेगिस्तान और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गतिशील रेत वाला रेगिस्तान है।रेगिस्तान के नीचे मिले इन भूजल भंडारों की खोज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे बेहद शुष्क क्षेत्रों में भूमिगत पानी की प्रकृति को समझने का नया अवसर मिला है। वैज्ञानिक यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि ऐसे क्षेत्रों में भूजल का प्रवाह और पुनर्भरण किस तरह होता है और मानव उपयोग की सीमा क्या हो सकती है।रेगिस्तान के नीचे पानी मिलना अपने आप में बड़ी खोज है, लेकिन उससे भी बड़ा सवाल यह है कि यह पानी कितने समय तक इंसान और पर्यावरण की जरूरत पूरी कर सकता है।