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युगांडा: पत्रकार से राजा बने 'एडवर्ड रुकिडी', टूरो साम्राज्य में उत्तराधिकार विवाद के बीच हुआ राज्याभिषेक
Tue, 29 Sep 2026 06:56 PM IST
अमन मौर्या
पीटीआई, कंपाला, युगांडा
पीटीआई, कंपाला, युगांडा
Published by: अमन मौर्या
Updated Tue, 29 Sep 2026 06:56 PM IST
युगांडा में पत्रकार और राजकुमार 'एडवर्ड रुकिडी न्याबोंगो' को पारंपरिक रूप से टूरो साम्राज्य का नया राजा चुना गया है। इसको लेकर राज्य में विवाद की भी खबरें सामने आईं। इन दिनों राज्य में बेबी ओयो की भी चर्चा चल रही है।
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युगांडा: पत्रकार से राजा बने एडवर्ड रुकिडी
- फोटो : x
विस्तार
युगांडा के टूरो साम्राज्य में मंगलवार को एक पत्रकार को पारंपरिक राजशाही का राजा बनाया जाएगा। इस राजशाही ने पिछले महीने ही अपने राजकुमार को खो दिया था, जिसके बाद टूरो साम्राज्य में उत्तराधिकार को लेकर विवाद भी हुआ था। यह पत्रकार एक राजकुमार भी हैं जो लंबे समय से युगांडा ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन में ब्रॉडकास्टर और एडिटर के तौर पर काम कर रहे थे। उन्होंने अपना शाही नाम 'एडवर्ड रुकिडी न्याबोंगो' रखा है। रात भर इसकी पूरी रस्में निभाई गईं। इसके बाद उन्हें महल में ले जाया गया। अब मंगलवार को उन्हें औपचारिक रूप से अपने समर्थकों के सामने पेश किया जाएगा।
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पहले राजशाहियों पर क्यों लगा प्रतिबंध?
बता दें, ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से आजादी के बाद युगांडा ने 1960 के दशक में पारंपरिक राजशाहियों पर प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि, 1993 में फिर से इसे बहाल कर दिया गया था। इस पूर्वी अफ्रीकी देश के नेताओं के पास कोई औपचारिक अधिकार नहीं होता है। वे कानूनी रूप से राजनीति में शामिल होने पर भी प्रतिबंधित हैं, लेकिन पारंपरिक रूप से संस्कृति के संरक्षक के तौर पर उनका अपने लोगों के बीच काफी प्रभाव रहता है।
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दिवंगत राजा ओयो के साथ क्या हुआ?
पश्चिमी युगांडा के शहर फोर्ट पोर्टल में होने वाले राज्याभिषेक समारोह को हजारों लोग प्रत्यक्ष रूप से और टीवी प्रसारण के माध्यम से देखेंगे। बता दें कि न्याबोंगो राज्य के उत्तराधिकारी में शामिल नहीं थे, लेकिन अगस्त में 34 साल की उम्र में राजा ओयो न्यिम्बा की कैंसर से मौत होने के बाद उन्हें साम्राज्य का नया उत्तराधिकारी चुना गया।
राजमाता ने क्यों जताई आपत्ति?
राजमाता बेस्ट केमिगिसा ने इस फैसले पर आपत्ति भी जताई और आरोप लगाया कि न्याबोंगो को चुनने में राजा ओयो की लिखित वसीयत का पालन नहीं किया गया। केमिगिसा ने कहा कि ओयो एक छोटा बेटा भी है, जिसकी पहचान सही समय पर उजागर की जाएगी। उन्होंने न्याबोंगो की वैधता और उन्हें चुनने के बबीटो के फैसले पर सवाल उठाए। इस दौरान स्थानीय मीडिया ने 12 सितंबर को ओयो के अंतिम संस्कार के दौरान हुई अप्रिय घटनाओं का जिक्र किया है। मीडिया के अनुसार, उस दौरान राजा के पार्थिव शरीर की कस्टडी को लेकर विवाद हुआ था।
कौन है बेबी ओयो?
ओयो के कथित बेटे के बारे में अभी तक कोई जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर 'बेबी ओयो' की कथित तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं, जिससे दिवंगत राजा के समर्थकों में एक उम्मीद है। इस बीच आलोचकों का कहना है कि यदि सच में वह बच्चा है तो उसे उसके पिता के जीवित रहते ही राज्य के सामने पेश किया जाना चाहिए था। युगांडा के जाने-माने राजनीतिक विश्लेषक निकोलस ने भी न्याबोंगो को चुने जाने पर टिप्पणी की है।
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दुनिया के सबसे युवा राजकुमार थे ओयो
बता दें कि 3 साल की उम्र में ओयो 1995 में अपने पिता की मृत्यु के बाद शासन में आए थे। बचपन में वे बहुत ही जिज्ञासु प्रकृति के थे। राज्य में उनके लाखों समर्थक हैं। ओयो उस समय दुनिया के सबसे कम उम्र में राजा बने थे। 18 साल की उम्र में वयस्क होने तक राज्य द्वारा नियुक्त रीजेंट्स (कार्यवाहक शासकों) ने ओयो का मार्गदर्शन किया। उनके राष्ट्रीय कार्यक्रमों में कई बड़े वैश्विक नेताओं ने उनसे मुलाकात भी की थी। इनमें दक्षिण अफ्रीका के नेल्सन मंडेला भी शामिल थे। अफ्रीकी देश लीबिया के नेता मुअम्मर गद्दाफी का टूरो शाही परिवार से खास दोस्ती थी। अपने शासनकाल के दौरान गद्दाफी ने युगांडा की कई यात्राएं भी कीं थी और अक्टूबर 2011 में अपनी मृत्यु से पहले कई वर्षों तक ओयो और केमिगिसा का भी समर्थन किया।
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पहले राजशाहियों पर क्यों लगा प्रतिबंध?
बता दें, ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से आजादी के बाद युगांडा ने 1960 के दशक में पारंपरिक राजशाहियों पर प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि, 1993 में फिर से इसे बहाल कर दिया गया था। इस पूर्वी अफ्रीकी देश के नेताओं के पास कोई औपचारिक अधिकार नहीं होता है। वे कानूनी रूप से राजनीति में शामिल होने पर भी प्रतिबंधित हैं, लेकिन पारंपरिक रूप से संस्कृति के संरक्षक के तौर पर उनका अपने लोगों के बीच काफी प्रभाव रहता है।
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दिवंगत राजा ओयो के साथ क्या हुआ?
पश्चिमी युगांडा के शहर फोर्ट पोर्टल में होने वाले राज्याभिषेक समारोह को हजारों लोग प्रत्यक्ष रूप से और टीवी प्रसारण के माध्यम से देखेंगे। बता दें कि न्याबोंगो राज्य के उत्तराधिकारी में शामिल नहीं थे, लेकिन अगस्त में 34 साल की उम्र में राजा ओयो न्यिम्बा की कैंसर से मौत होने के बाद उन्हें साम्राज्य का नया उत्तराधिकारी चुना गया।
राजमाता ने क्यों जताई आपत्ति?
राजमाता बेस्ट केमिगिसा ने इस फैसले पर आपत्ति भी जताई और आरोप लगाया कि न्याबोंगो को चुनने में राजा ओयो की लिखित वसीयत का पालन नहीं किया गया। केमिगिसा ने कहा कि ओयो एक छोटा बेटा भी है, जिसकी पहचान सही समय पर उजागर की जाएगी। उन्होंने न्याबोंगो की वैधता और उन्हें चुनने के बबीटो के फैसले पर सवाल उठाए। इस दौरान स्थानीय मीडिया ने 12 सितंबर को ओयो के अंतिम संस्कार के दौरान हुई अप्रिय घटनाओं का जिक्र किया है। मीडिया के अनुसार, उस दौरान राजा के पार्थिव शरीर की कस्टडी को लेकर विवाद हुआ था।
कौन है बेबी ओयो?
ओयो के कथित बेटे के बारे में अभी तक कोई जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर 'बेबी ओयो' की कथित तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं, जिससे दिवंगत राजा के समर्थकों में एक उम्मीद है। इस बीच आलोचकों का कहना है कि यदि सच में वह बच्चा है तो उसे उसके पिता के जीवित रहते ही राज्य के सामने पेश किया जाना चाहिए था। युगांडा के जाने-माने राजनीतिक विश्लेषक निकोलस ने भी न्याबोंगो को चुने जाने पर टिप्पणी की है।
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दुनिया के सबसे युवा राजकुमार थे ओयो
बता दें कि 3 साल की उम्र में ओयो 1995 में अपने पिता की मृत्यु के बाद शासन में आए थे। बचपन में वे बहुत ही जिज्ञासु प्रकृति के थे। राज्य में उनके लाखों समर्थक हैं। ओयो उस समय दुनिया के सबसे कम उम्र में राजा बने थे। 18 साल की उम्र में वयस्क होने तक राज्य द्वारा नियुक्त रीजेंट्स (कार्यवाहक शासकों) ने ओयो का मार्गदर्शन किया। उनके राष्ट्रीय कार्यक्रमों में कई बड़े वैश्विक नेताओं ने उनसे मुलाकात भी की थी। इनमें दक्षिण अफ्रीका के नेल्सन मंडेला भी शामिल थे। अफ्रीकी देश लीबिया के नेता मुअम्मर गद्दाफी का टूरो शाही परिवार से खास दोस्ती थी। अपने शासनकाल के दौरान गद्दाफी ने युगांडा की कई यात्राएं भी कीं थी और अक्टूबर 2011 में अपनी मृत्यु से पहले कई वर्षों तक ओयो और केमिगिसा का भी समर्थन किया।