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सियाम और एसीएमए का बड़ा विजन: 'डिजाइन, डेवलप और एक्सपोर्ट', जानिए कैसे दुनिया का ऑटो हब बनेगा भारत

Wed, 02 Sep 2026 01:53 PM IST
जागृति शुक्ला ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति शुक्ला Updated Wed, 02 Sep 2026 01:53 PM IST
सार
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ऑटो बाजार के दिग्गजों ने देश को दुनिया का प्रमुख ऑटोमोटिव और मोबिलिटी हब बनाने का रोडमैप पेश किया है। एसीएमए के सालाना सेशन में SIAM और एसीएमए के प्रेसिडेंट ने जोर दिया कि भारत को केवल आयात के विकल्प ढूंढने से आगे बढ़कर डिजाइन, डेवलप और एक्सपोर्ट पर ध्यान देना होगा। तो क्या भारत आने वाले समय में ग्लोबल ऑटोमोटिव सप्लाई चेन का पसंदीदा हब बन पाएगा? यहां जानिए इस रिपोर्ट में सबकुछ विस्तार से।
 

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India Auto Sector Eyes Global Leadership, From Make India Tech-Driven Global Hub
ऑटोमोटिव और मोबिलिटी हब बनाने का रोडमैप पेश - फोटो : एआई जनरेटेड

विस्तार

देश को ग्लोबल लेवल पर प्रतिस्पर्धी, टेक्नोलॉजी से भरपूर और सस्टेनेबल ऑटोमोटिव वैल्यू चेन तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। यह बात ऑटोमोटिव कंपानेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसीएमए) के सालाना सेशन में सामने आई। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के प्रेसिडेंट शैलेश चंद्र ने कहा कि ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री भारतीय अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बनी हुई है। उनका कहना है कि इस सेक्टर में बड़े पैमाने पर काम करने और ग्लोबल लीडरशिप हासिल करने की जबरदस्त क्षमता है।

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मजबूती से आगे बढ़कर ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस पर फोकस

  • शैलेश चंद्र ने कहा कि भारतीय ऑटो सेक्टर के विकाल का अगला चरण सिर्फ मजबूती यानी रेजिलिएंस तक सीमित नहीं होना चाहिए। अब इस मजबूती को ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस, टेक्नोलॉजी लीडरशिप, बड़े पैमाने पर उत्पादन क्षमता और ग्लोबल लीडरशिप में बदलने की जरूरत है।
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  • उन्होंने कहा कि भारतीय ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट सेक्टर ने एक्सपोर्ट समेत रिकॉर्ड प्रदर्शन किया है। उनका कहना है कि भारत अब दुनिया के लिए एक अहम ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी बेस बन रहा है।
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सिर्फ इंपोर्ट तक ही सीमित नहीं रहना चाहता भारत

  • चंद्र ने कहा कि भारत के सामने मौजूद अवसर सिर्फ इंपोर्ट सब्स्टिट्यूशन यानी आयात के विकल्प तैयार करने तक सीमित नहीं है। देश के मौजूदा पैमाने और तेजी से बढ़ते ऑटो सेक्टर को देखते हुए भारत को दुनिया के प्रमुख ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरिंग और मोबिलिटी हब में से एक बनाने का लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मेड इन इंडिया सिर्फ एक लेबल न रहकर क्वालिटी, तकनीक, भरोसे और ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस का पर्याय बनना चाहिए।


डिजाइन इन इंडिया, मेक इन इंडिया पर जोर

  • सियाम प्रेसिडेंट ने इंपोर्ट सब्स्टिट्यूशन से आगे बढ़कर डिजाइन इन इंडिया, मेक इन इंडिया और एक्सपोर्ट फ्रॉम इंडिया की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत बताई।
  • उन्होंने आत्मनिर्भरता और आइसोलेशन के बीच अंतर को भी महत्वपूर्ण बताया। चंद्र के अनुसार, भारत का लक्ष्य खुद को ग्लोबल वैल्यू चेन से अलग करना नहीं होना चाहिए। इसके बजाय भारत को ग्लोबल वैल्यू चेन में एक पसंदीदा और अहम नोड यानी महत्वपूर्ण कड़ी बनना चाहिए।


भारत में डिजाइन से लेकर एक्सपोर्ट तक का मॉडल

  • चंद्र ने साफ सिद्धांत अपनाने की बात कही है। इसके अंदर भारत में डिजाइन, भारत में डेवलपमेंट, भारत में मैन्युफैक्चरिंग और भारत से एक्सपोर्ट पर जोर होना चाहिए।
  • उनके मुताबिक, वैल्यू क्रिएशन का बड़ा हिस्सा डिजाइन और डेवलपमेंट के चरण में होता है। भारत अपने बड़े और लगातार बढ़ते ऑटोमोटिव बाजार का फायदा उठाकर इन क्षेत्रों में तेजी से अपनी क्षमता बढ़ा सकता है।
  • इससे देश सिर्फ वाहनों और कंपोनेंट्स का बड़ा बाजार नहीं रहेगा, बल्कि नई ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट डेवलपमेंट का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।

भारत से ग्लोबल वैल्यू चेन बनाने का लक्ष्य
चंद्र ने कहा कि भारत को सिर्फ अपने घरेलू बाजार के लिए मजबूत सप्लाई चेन तैयार करने पर ध्यान नहीं देना चाहिए। लक्ष्य भारत से ऐसी ग्लोबल लेवल पर प्रतिस्पर्धी, टेक्नोलॉजी से भरपूर और सस्टेनेबल ऑटोमोटिव वैल्यू चेन तैयार करना होना चाहिए, जो दुनिया के बाजारों को भी सेवाएं दे सके।

एसीएमए ने भी इनोवेशन और इंजीनियरिंग पर दिया जोर

  • सियाम के अलावा एसीएमए के प्रेसिडेंट विक्रपति सिंघानिया ने भी इसी दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि भारत पहले से ही दुनिया के सबसे बड़े ऑटोमोटिव बाजारों में से एक है।
  • अब देश के पास एक गहरा मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम, मजबूत एंटरप्रेन्योरियल बेस और इंजीनियरिंग क्षमताएं हैं, जिन्हें दुनिया भर में तेजी से पहचान मिल रही है।
  • उन्होंने कहा कि भारत कई वर्षों से मेक इन इंडिया की बात करता आया है। अब अगला चरण मुख्य रूप से भारत और दुनिया, दोनों के लिए देश में ही चीजें बनाने, इंजीनियरिंग करने और इनोवेशन करने पर केंद्रित होना चाहिए।

ऑटो सेक्टर के लिए क्या है आगे की दिशा?

  • इंडस्ट्री लीडर्स की मानें तो भारतीय ऑटो सेक्टर अब सिर्फ घरेलू मांग पूरी करने या आयात पर निर्भरता कम करने तक सीमित नहीं रहना चाहता। अगला लक्ष्य डिजाइन, इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट इन सभी क्षेत्रों में भारत की भूमिका मजबूत करना है।
  • बड़े घरेलू बाजार, बढ़ते एक्सपोर्ट, मजबूत मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम और इंजीनियरिंग क्षमता के दम पर भारत को ग्लोबल ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरिंग और मोबिलिटी हब बनाने की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दिया गया है।
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