ओला इलेक्ट्रिक को ईवी की डिलीवरी में देरी पड़ी भारी: ग्राहक को पूरे पैसे लौटाने के साथ मुआवजा देने का आदेश
ईवी निर्माता कंपनी ओला इलेक्ट्रिक को एक ग्राहक को इलेक्ट्रिक बाइक की समय पर डिलीवरी न देना भारी पड़ गया है। आंध्र प्रदेश के एक जिला उपभोक्ता आयोग ने सेवा में कमी पाते हुए कंपनी को ग्राहक के 1,34,161 रुपये पूरे ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है।
विस्तार
आंध्र प्रदेश की एक जिला उपभोक्ता आयोग ने इलेक्ट्रिक वाहन की डिलीवरी में कई महीनों की देरी को सेवा में कमी माना है। आयोग ने ओला इलेक्ट्रिक को ग्राहक की पूरी जमा राशि 1,34,161 रुपये ब्याज समेत वापस करने का आदेश दिया है। इसके अलावा ग्राहक को आजीविका के नुकसान, मानसिक परेशानी और असुविधा के लिए 90,000 रुपये तथा मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में 10,000 रुपये देने को कहा गया है। यह आदेश 31 अगस्त 2026 को पारित किया गया।
ग्राहक को ओला इलेक्ट्रिक के खिलाफ आयोग का रुख क्यों करना पड़ा?
- आयोग के आदेश के मुताबिक, ग्राहक ने Ola Roadster X Plus इलेक्ट्रिक वाहन बुक किया था और 2 अक्तूबर 2025 को इसकी पूरी कीमत 1,34,161 रुपये का भुगतान कर दिया था। वाहन की डिलीवरी 23 अक्तूबर 2025 को होनी थी। लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी उसे वाहन नहीं मिला।
- ग्राहक का कहना था कि उसने डिलीवरी के लिए ओला से ईमेल, कस्टमर सपोर्ट और कंपनी की शिकायत निवारण व्यवस्था के जरिए बार-बार संपर्क किया। उसने नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन से भी संपर्क किया। लेकिन उसके अनुसार वाहन की डिलीवरी के लिए कंपनी की ओर से कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
- मामला तब और गंभीर हो गया जब ग्राहक के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 को OTP के जरिए वाहन का पंजीकरण कर दिया गया, जबकि उसे वाहन का भौतिक कब्जा तक नहीं मिला था। बाद में उसे रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट से संबंधित सूचना भी मिली, लेकिन वाहन की डिलीवरी फिर भी नहीं हुई।
ग्राहक को वाहन की जरूरत क्यों थी?
- ग्राहक ने आयोग को बताया कि वह बेरोजगार था और वाहन का इस्तेमाल रैपिडो जैसे राइड-सर्विस प्लेटफॉर्म के जरिए कमाई के लिए करना चाहता था। खरीद की रकम जुटाने के लिए उसने ऊंची ब्याज दर पर पैसा उधार लिया था। डिलीवरी में लंबी देरी के कारण उसे आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
- उसने यह भी बताया कि इसी मॉडल की कीमत बाद में बढ़कर 2,48,090 रुपये हो गई। जिससे उसके अनुसार उसे अतिरिक्त आर्थिक नुकसान हुआ।
Ola Electric ने देरी को लेकर क्या दलील दी?
- ओला इलेक्ट्रिक ने शिकायत का विरोध करते हुए कहा कि बताई गई डिलीवरी तारीख केवल अनुमानित थी और कंपनी के लिए बाध्यकारी नहीं थी। कंपनी के अनुसार, वाहन की उपलब्धता तथा सरकारी और नियामकीय औपचारिकताएं पूरी होने पर ही डिलीवरी की जा सकती थी।
- हालांकि, आयोग ने इस दलील को कई महीनों की देरी को उचित ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं माना।
आयोग ने डिलीवरी में देरी को सेवा में कमी क्यों माना?
- आयोग के अध्यक्ष करनम किशोर कुमार और सदस्य एस. नजीमा कौसर की पीठ ने कहा कि इस बात पर विवाद नहीं था कि ग्राहक ने वाहन की पूरी रकम चुका दी थी। और लेनदेन वाहन की तैयारी तथा दस्तावेजों के सत्यापन के चरण तक पहुंच चुका था।
- आयोग ने यह भी पाया कि ग्राहक ने वाहन की डिलीवरी के लिए लगातार संपर्क किया। लेकिन ओला इलेक्ट्रिक कई महीनों तक वाहन की डिलीवरी न कर पाने की वजह से संबंधित पर्याप्त दस्तावेजी साक्ष्य पेश नहीं कर सकी।
- आयोग ने माना कि अनुमानित डिलीवरी तारीख से कुछ परिचालन संबंधी लचीलापन जरूर मिल सकता है। लेकिन पूरी रकम लेने के बाद कंपनी को अनिश्चित अवधि तक वाहन की डिलीवरी टालने का अधिकार नहीं मिल जाता।
- आयोग के अनुसार, केवल परिचालन संबंधी समस्याओं या सरकारी औपचारिकताओं का सामान्य हवाला कई महीनों की देरी को उचित नहीं ठहरा सकता। कंपनी ऐसा कोई ठोस आधार भी पेश नहीं कर सकी। जिससे यह साबित हो कि नियामकीय, निर्माण, परिवहन या किसी अन्य विशेष बाधा के कारण समय पर डिलीवरी संभव नहीं थी।
क्या वाहन का रजिस्ट्रेशन और इंश्योरेंस डिलीवरी माना जा सकता है?
- आयोग ने ओला इलेक्ट्रिक की इस दलील को भी स्वीकार नहीं किया कि वाहन का रजिस्ट्रेशन और इंश्योरेंस हो जाने का मतलब डिलीवरी हो गई थी।
- आयोग ने स्पष्ट किया कि रजिस्ट्रेशन और इंश्योरेंस अलग प्रक्रियाएं हैं। जबकि वाहन का वास्तविक कब्जा ग्राहक को देना ही लेनदेन का मुख्य उद्देश्य था।
- इस आधार पर आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि पूरी रकम लेने के बावजूद उचित अवधि में वाहन की डिलीवरी नहीं करना सेवा में कमी है।
ग्राहक को ओला इलेक्ट्रिक से कितनी रकम मिलेगी?
- आयोग ने ओला इलेक्ट्रिक को ग्राहक की पूरी भुगतान राशि 1,34,161 रुपये वापस करने का निर्देश दिया है। इस रकम पर 2 अक्तूबर 2025 से भुगतान होने तक सालाना 12 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा।
- इसके अलावा, ग्राहक को आजीविका के नुकसान, मानसिक परेशानी, असुविधा, उत्पीड़न और इससे हुए आर्थिक नुकसान के लिए 90,000 रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। इसमें यह भी ध्यान में रखा गया कि ग्राहक वाहन का इस्तेमाल अपनी आजीविका कमाने के लिए करना चाहता था और डिलीवरी में लंबे समय तक देरी हुई।
- मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में ओला इलेक्ट्रिक को 10,000 रुपये अतिरिक्त देने का आदेश दिया गया है।
कंपनी को भुगतान के लिए कितना समय मिला है?
आयोग के आदेश के अनुसार, ओला इलेक्ट्रिक को आदेश प्राप्त होने के 45 दिनों के भीतर संबंधित रकम का भुगतान करना होगा। इसमें 1,34,161 रुपये की मूल राशि, उस पर निर्धारित 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज, 90,000 रुपये मुआवजा और 10,000 रुपये मुकदमेबाजी खर्च शामिल हैं।