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परिवर्तन योजना: क्या प्रदूषण पर लगेगी लगाम? 25 हजार वाहनों को हटाने का प्लान, जानिए फिर क्यों धीमी पड़ी रफ्तार

Sat, 29 Aug 2026 10:29 AM IST
जागृति शुक्ला ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति शुक्ला Updated Sat, 29 Aug 2026 10:29 AM IST
सार
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कमर्शियल व्हीकल स्क्रैपेज पॉलिसी: दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण कम करने के लिए शुरू की गई करोड़ों रुपये की परिवर्तन योजना के तहत पुराने कमर्शियल वाहनों को बदलने की तैयारी तेज हो गई है। सरकार ने अक्तूबर तक हजारों पुराने ट्रक और बस मालिकों के पंजीकरण का लक्ष्य रखा है, लेकिन क्या आपको मालूम है कि अब तक कुल कितने रजिस्ट्रेशन हो पाए हैं? आखिर योजना के तहत कुल कितने पुराने वाहनों को बदलने का लक्ष्य है? और अगर आपके पास भी पात्र पुराना कमर्शियल वाहन है, तो इस योजना का लाभ कैसे उठा सकते हैं? आइए जानते हैं योजना से जुड़ी पूरी जानकारी।
 

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Parivartan Yojana, Target 25,000 Registrations  October, Only 1,450 Units Enrolled
परिवर्तन योजना - फोटो : एआई जनरेटेड

विस्तार

दिल्ली-एनसीआर में पुराने व्यावसायिक वाहनों को हटाने की प्रक्रिया को तेज करने की तैयारी है। केंद्र सरकारी की परिवर्तन योजना के तहत अक्तूबर तक करीब 25 हजार पुराने ट्रक और बस मालिकों के पंजीकरण का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना की शुरुआत 14 जुलाई से हुई है, जिसके बाद से अब तक करीब 1450 वाहन मालिकों ने पंजीकरण करा लिया है। आने वाले महीनों में इसकी रफ्तार बढ़ने की उम्मीद है।

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इस योजना का मकसद पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले कमर्शियल वाहनों को कबाड़ में देकर उनकी जगह नए वाहन लाने को बढ़ावा देना है। इसके लिए वाहन मालिकों को टैक्स छूट, सस्ते लोन और अन्य आर्थिक फायदे दिए जा रहे हैं।
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अक्तूबर तक 25 हजार वाहनों का लक्ष्य

  • सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुमान के अनुसार, अक्तूबर तक करीब 25 हजार पुराने ट्रक और बस मालिक परिवर्तन योजना के तहत पंजीकरण करा सकते हैं। 14 जुलाई को योजना शुरू होने के बाद अभी तक 1,450 पुराने ट्रक और बस मालिक पंजीकरण करा चुके हैं।
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  • आने वाले महीनों में योजना में पंजीकरण की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद है। सरकार का फोकस खासतौर पर दिल्ली-एनसीआर में चलने वाले पुराने कमर्शियल वाहनों को नए और कम प्रदूषण वाले वाहनों से बदलने पर है।

एनसीआर में दो लाख से ज्यादा पुराने ट्रक-बस

  • मंत्रालय के अनुसार, दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी एनसीटी में भारत स्टेज-4 और उससे पुराने उत्सर्जन मानकों वाले दो लाख से ज्यादा ट्रक और बसें पंजीकृत हैं।
  • इन पुराने वाहनों से निकलने वाला धुआं सर्दियों के दौरान दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की समस्या को और बढ़ाता है। ऐसे में सरकार पुराने कमर्शियल वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर नए वाहनों को बढ़ावा देना चाहती है।

चार राज्यों ने दी टैक्स में राहत

  • परिवर्तन योजना को लागू करने के लिए दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की सरकारों ने पात्र नए वाहनों के लिए दस साल तक वाहन कर में रियायत और पंजीकरण शुल्क में छूट से जुड़ी अधिसूचना जारी की गई है।
  • इससे पुराने वाहन को कबाड़ में देकर नया कमर्शियल वाहन खरीदने वाले मालिकों की शुरुआती लागत कम करने में मदद मिलेगी।


कितने करोड़ रुपये की योजना है?
केंद्र सरकार ने तीन जून को 9,585 करोड़ रुपये की लागत वाली परिवर्तन योजना को मंजूरी दी थी। योजना में कमर्शियल वाहन बाजार के बड़े हिस्से को कवर करने की कोशिश की गई है। इसके तहत कमर्शियल वाहन बाजार में 95 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी रखने वाले 15 वाहन निर्माताओं को जोड़ा गया है।

पुराने वाहन कबाड़ में देने पर मालिकों को क्या फायदे मिलेंगे?

  • परिवर्तन योजना के तहत पुराने वाहन को कबाड़ में देकर नया वाहन खरीदने वाले मालिकों को कई तरह के आर्थिक प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। इसमें वाहन टैक्स में छूट, पंजीकरण शुल्क की माफी, वाहन ऋण पर पांच फीसदी ब्याज सब्सिडी, एक्स-शोरूम कीमत पर आठ फीसदी छूट और इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर 2.56 लाख रुपये तक का नकद प्रोत्साहन शामिल है।
  • यानी योजना का मकसद सिर्फ पुराने वाहनों को सड़कों से हटाना नहीं है, बल्कि वाहन मालिकों को नया वाहन खरीदने के लिए आर्थिक रूप से आकर्षित करना भी है।


ईवी खरीदने वालों को ज्यादा फायदा
इसके अलावा परिवर्तन योजना में इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। पात्र ईवी खरीदने पर 2.56 लाख रुपये तक का नकद प्रोत्साहन मिल सकता है। इसके साथ टैक्स और पंजीकरण शुल्क में राहत तथा लोन पर ब्याज सब्सिडी जैसे फायदे भी वाहन बदलने की कुल लागत को कम कर सकते हैं।

योजना से क्या बदल सकता है?

  • सरकार के अनुसार, योजना का लक्ष्य पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले ट्रक और बसों को धीरे-धीरे हटाकर नए वाहनों को सड़कों पर लाना है। दिल्ली-एनसीआर में बड़ी संख्या में पुराने कमर्शियल वाहन होने के कारण इस योजना को प्रदूषण नियंत्रण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
  • फिलहाल अक्तूबर तक 25 हजार पंजीकरण का लक्ष्य है, जबकि योजना शुरू होने के बाद अब तक 1450 पंजीकरण हो चुके हैं। आने वाले महीनों में अगर पंजीकरण की रफ्तार बढ़ती है, तो पुराने कमर्शियल वाहनों को हटाने की प्रक्रिया भी तेज हो सकती है।
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