बिहार: सीयूएसबी में पीएचडी स्कॉलर का धरना, शोध पूरा कराने और यौन उत्पीड़न मामले की जांच रिपोर्ट देने की मांग
सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार (सीयूएसबी), गया में एक पीएचडी शोधार्थी अपनी पीएचडी पूरी कराने और वर्ष 2023 में दर्ज शिकायत की जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने की मांग को लेकर दो अन्य छात्रों के साथ धरने पर बैठी हैं। शोधार्थी ने अपने सुपरवाइजर पर उत्पीड़न और बहाली के बाद परेशान करने के आरोप लगाए हैं।
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बिहार के गया स्थित सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार (सीयूएसबी) में एक पीएचडी शोधार्थी ने अपना शोध पूरा कराने और वर्ष 2023 में दर्ज यौन उत्पीड़न की शिकायत की जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने की मांग को लेकर धरना शुरू किया है। शोधार्थी के साथ दो अन्य छात्र भी विश्वविद्यालय परिसर में धरने पर बैठे हैं। शोधार्थी ने अपने सुपरवाइजर पर यौन उत्पीड़न और बहाली के बाद परेशान करने के आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर विश्वविद्यालय प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है।
दाखिला रद्द होने के बाद हाईकोर्ट पहुंची थीं शोधार्थी
शोधार्थी के मुताबिक, उन्होंने वर्ष 2023 में अपने सुपरवाइजर के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। उनका दावा है कि इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनका दाखिला रद्द कर दिया। उन्होंने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके बाद वर्ष 2026 में उन्हें दोबारा बहाल किया गया।
शोधार्थी ने यह भी दावा किया कि शिकायत के बाद उनके सुपरवाइजर को एक महीने के भीतर निलंबित कर दिया गया था। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े न्यायिक आदेशों और विश्वविद्यालय के अभिलेखों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
पीएचडी पूरी कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की मांग
शोधार्थी का कहना है कि उन्होंने पीएचडी पूरी करने के लिए निर्धारित न्यूनतम शैक्षणिक आवश्यकताएं पूरी कर ली हैं। उनके अनुसार, शोधपत्रों और सम्मेलनों से जुड़ी जरूरी शर्तें पूरी करने के बाद अब विश्वविद्यालय को उनकी पीएचडी पूरी कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ानी चाहिए।
जांच रिपोर्ट नहीं मिलने का आरोप
शोधार्थी ने आरोप लगाया कि बहाली के बाद उनके नाम से एक पत्र जारी किया गया था, जिसमें प्रयोगशाला से वर्कस्टेशन ले जाने का उल्लेख था। उनके अनुसार, बाद में यह पत्र वापस ले लिया गया। शोधार्थी ने इसे अपनी छवि प्रभावित करने की कोशिश बताया है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यौन उत्पीड़न की शिकायत पर गठित समिति की जांच रिपोर्ट अब तक उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई है। वह जांच के निष्कर्षों और मामले में की गई कार्रवाई की जानकारी चाहती हैं।
महिला और मानवाधिकार आयोग में शिकायत का दावा
शोधार्थी के मुताबिक, उन्होंने इस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में भी शिकायत दर्ज कराई है। उनका कहना है कि यदि उन्हें जवाब नहीं मिलता है, तो वह न्यायालय का रुख करेंगी।
मामले में विश्वविद्यालय का पक्ष जानने के लिए सीयूएसबी के जनसंपर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मुदस्सिर आलम से मोबाइल फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन लगातार व्यस्त आने के कारण बात नहीं हो सकी। ऐसे में फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।