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बिहार: नेपाल त्रासदी के बीच मोतिहारी में महोत्सव का आगाज, सभी प्राइवेट स्कूल बंद; 80 बसें भी मांगीं, उठे सवाल
Tue, 01 Sep 2026 04:22 PM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोतिहारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोतिहारी
Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
Updated Tue, 01 Sep 2026 04:22 PM IST
मोतिहारी में मंगलवार से तीन दिवसीय बापूधाम महोत्सव-2026 शुरू हुआ। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने महोत्सव का उद्घाटन किया। आयोजन के बीच नेपाल में त्रासदी और चंपारण में बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
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ट्रैफिक व्यवस्था के लिए 80 स्कूल बसें मांगी गईं
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
महात्मा गांधी की कर्मभूमि मोतिहारी का ऐतिहासिक गांधी मैदान एक बार फिर रोशनी, संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से गुलजार होने जा रहा है। मंगलवार से तीन दिवसीय बापूधाम महोत्सव-2026 का आगाज हो गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी महोत्सव का उद्घाटन करने आए हैं। प्रशासन ने आयोजन को भव्य बनाने में पूरी ताकत झोंक दी है। लेकिन इसी भव्य आयोजन के बीच कई सवाल भी खड़े हो गए हैं। जब महोत्सव का नाम और केंद्र बापू हैं, तो गांधी जयंती के महीने के बजाय सितंबर में ही आयोजन क्यों? और जब नेपाल त्रासदी के बाद चंपारण बाढ़ को लेकर हाई अलर्ट पर है, तब सरकारी मशीनरी का बड़ा हिस्सा महोत्सव की तैयारियों में क्यों लगा है?
गांधी मैदान में मंच से लेकर दर्शक दीर्घा, पार्किंग, बिजली, पेयजल और साफ-सफाई तक की व्यवस्था पूरी कर ली गई है। मुख्यमंत्री के आगमन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी चाक-चौबंद की गई है। मैदान और मुख्यमंत्री के गुजरने वाले मार्गों पर पुलिस बल की तैनाती, बैरिकेडिंग और ट्रैफिक नियंत्रण की व्यवस्था की गई है।
महोत्सव में तीन दिनों तक नामचीन कलाकारों की प्रस्तुतियां होंगी। पहले दिन मैथिली ठाकुर समेत कई कलाकार प्रस्तुति देंगे। दूसरे दिन बॉलीवुड गायक सलमान अली अपनी आवाज का जादू बिखेरेंगे, जबकि तीसरे दिन अजीत आनंद और उनकी टीम कार्यक्रम पेश करेगी। हास्य कवि सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा।
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बापू के नाम पर आयोजन, फिर गांधी जयंती से दूरी क्यों?
महोत्सव को लेकर सबसे बड़ा सवाल इसकी तारीख पर उठ रहा है। चंपारण की पहचान ही महात्मा गांधी के सत्याग्रह और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि गांधी जयंती 2 अक्टूबर के आसपास बापूधाम महोत्सव आयोजित किया जाता तो इसका संदेश और प्रभाव और अधिक व्यापक होता। आयोजन के उद्देश्य और खर्च को लेकर पारदर्शिता की मांग उठने लगी है।
नेपाल में त्रासदी, चंपारण में बाढ़ का खतरा, फिर महोत्सव क्यों?
दूसरा बड़ा सवाल मौजूदा हालात को लेकर है। पड़ोसी नेपाल इस समय भीषण त्रासदी का दंश झेल रहा है। बड़ी संख्या में लोगों की मौत और हजारों लोगों के लापता होने की खबरों के बीच सीमा से सटे चंपारण में भी बाढ़ का खतरा बना हुआ है। ऐसे समय में प्रशासन के सामने राहत, बचाव, तटबंधों की निगरानी और संभावित बाढ़ से निपटने की चुनौती है। लोग पूछ रहे हैं कि आपदा की आशंका के बीच प्राथमिकता बाढ़ की तैयारी होनी चाहिए या महोत्सव की भव्यता।
ये भी पढ़ें- बिहार: 75 हजार की रिश्वत लेते बीडीओ गिरफ्तार, हिरासत में मामा भी; एक दिन पहले पूर्व मुखिया को भेजा था जेल
स्कूल बंद, 80 बसें मैदान में; बच्चों की पढ़ाई पर भी सवाल
महोत्सव की व्यवस्था में निजी स्कूलों को शामिल किए जाने ने भी सवाल खड़े कर दिए हैं। निजी स्कूल संचालकों के अनुसार, जिला प्रशासन ने बैठक कर मंगलवार को विद्यालय बंद रखने को कहा। इसके अलावा स्कूल बसों को भी प्रशासन को उपलब्ध कराने के लिए कहा गया। जिला परिवहन पदाधिकारी निवेदिता कुमारी ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान ट्रैफिक की समस्या को देखते हुए निजी स्कूलों से 80 बसें मांगी गई थीं। इस संबंध में जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव का पक्ष जानने के लिए फोन और मैसेज के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
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गांधी मैदान में मंच से लेकर दर्शक दीर्घा, पार्किंग, बिजली, पेयजल और साफ-सफाई तक की व्यवस्था पूरी कर ली गई है। मुख्यमंत्री के आगमन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी चाक-चौबंद की गई है। मैदान और मुख्यमंत्री के गुजरने वाले मार्गों पर पुलिस बल की तैनाती, बैरिकेडिंग और ट्रैफिक नियंत्रण की व्यवस्था की गई है।
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महोत्सव में तीन दिनों तक नामचीन कलाकारों की प्रस्तुतियां होंगी। पहले दिन मैथिली ठाकुर समेत कई कलाकार प्रस्तुति देंगे। दूसरे दिन बॉलीवुड गायक सलमान अली अपनी आवाज का जादू बिखेरेंगे, जबकि तीसरे दिन अजीत आनंद और उनकी टीम कार्यक्रम पेश करेगी। हास्य कवि सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा।
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बापू के नाम पर आयोजन, फिर गांधी जयंती से दूरी क्यों?
महोत्सव को लेकर सबसे बड़ा सवाल इसकी तारीख पर उठ रहा है। चंपारण की पहचान ही महात्मा गांधी के सत्याग्रह और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि गांधी जयंती 2 अक्टूबर के आसपास बापूधाम महोत्सव आयोजित किया जाता तो इसका संदेश और प्रभाव और अधिक व्यापक होता। आयोजन के उद्देश्य और खर्च को लेकर पारदर्शिता की मांग उठने लगी है।
नेपाल में त्रासदी, चंपारण में बाढ़ का खतरा, फिर महोत्सव क्यों?
दूसरा बड़ा सवाल मौजूदा हालात को लेकर है। पड़ोसी नेपाल इस समय भीषण त्रासदी का दंश झेल रहा है। बड़ी संख्या में लोगों की मौत और हजारों लोगों के लापता होने की खबरों के बीच सीमा से सटे चंपारण में भी बाढ़ का खतरा बना हुआ है। ऐसे समय में प्रशासन के सामने राहत, बचाव, तटबंधों की निगरानी और संभावित बाढ़ से निपटने की चुनौती है। लोग पूछ रहे हैं कि आपदा की आशंका के बीच प्राथमिकता बाढ़ की तैयारी होनी चाहिए या महोत्सव की भव्यता।
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स्कूल बंद, 80 बसें मैदान में; बच्चों की पढ़ाई पर भी सवाल
महोत्सव की व्यवस्था में निजी स्कूलों को शामिल किए जाने ने भी सवाल खड़े कर दिए हैं। निजी स्कूल संचालकों के अनुसार, जिला प्रशासन ने बैठक कर मंगलवार को विद्यालय बंद रखने को कहा। इसके अलावा स्कूल बसों को भी प्रशासन को उपलब्ध कराने के लिए कहा गया। जिला परिवहन पदाधिकारी निवेदिता कुमारी ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान ट्रैफिक की समस्या को देखते हुए निजी स्कूलों से 80 बसें मांगी गई थीं। इस संबंध में जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव का पक्ष जानने के लिए फोन और मैसेज के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।