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मोदी युग का भारत: नीतीश के बाद अब पीएम नरेंद्र मोदी पर किताब आई; बिहार के पत्रकार ने किन मुद्दों को उठाया?

Tue, 15 Sep 2026 11:02 PM IST
पटना ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: पटना ब्यूरो Updated Tue, 15 Sep 2026 11:02 PM IST
सार
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बक्सर के डुमरांव निवासी लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार मुरली मनोहर श्रीवास्तव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर अपनी पुस्तक ‘मोदी युग का भारत’ के जरिए बीते 12 वर्षों के भारत को देखने की कोशिश की है। किताब में विकास योजनाओं के साथ डिजिटल बदलाव, महिला सशक्तीकरण, विदेश नीति और 2047 के भारत की संभावित तस्वीर को जगह दी गई है।

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India in Modi Era Book Released on PM Narendra Modi After Nitish Kumar Key Issues Raised by Bihar Journalist
‘मोदी युग का भारत’ पर लिखी गई किताब - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन को यादगार बनाने के लिए बिहार के बक्सर जिले के डुमरांव निवासी प्रसिद्ध लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार मुरली मनोहर श्रीवास्तव ने उन्हें एक अनोखा साहित्यिक तोहफा दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन और उनकी सरकार के 12 वर्षों के विकासात्मक कार्यों को केंद्र में रखकर पुस्तक ‘मोदी युग का भारत’ लिखी है। यह पुस्तक महज जन्मदिन का उपहार नहीं, बल्कि बदलते भारत की विकास यात्रा को शब्दों में दर्ज करने का एक प्रयास है।
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मुरली मनोहर श्रीवास्तव ने इस पुस्तक के माध्यम से पिछले 12 वर्षों में देश में हुए बदलावों को अलग-अलग आयामों से देखने और समझने की कोशिश की है। पुस्तक में सरकारी योजनाओं और आंकड़ों को महज गिनाने के बजाय उनके प्रभाव, विस्तार और सामाजिक सरोकारों को सामने लाने का प्रयास किया गया है।
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लेखक ने ‘मोदी युग का भारत’ में यह बताने की कोशिश की है कि पिछले एक दशक से अधिक समय में भारत की विकास यात्रा किन क्षेत्रों से होकर गुजरी और इन नीतिगत फैसलों ने देश की तस्वीर को किस तरह प्रभावित किया।
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जन्मदिन पर पुस्तक के रूप में खास उपहार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर उन्हें दिए गए इस साहित्यिक तोहफे को लेकर मुरली मनोहर श्रीवास्तव का दृष्टिकोण स्पष्ट है। वे किसी व्यक्ति के बारे में लिखते समय केवल उसके राजनीतिक व्यक्तित्व तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि उसके कार्यों और उनके प्रभाव को भी समझने की कोशिश करते हैं।
इसी सोच के साथ ‘मोदी युग का भारत’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व के साथ-साथ उनके नेतृत्व में सरकार द्वारा लिए गए नीतिगत फैसलों और विकास कार्यों को विषय बनाया गया है। पुस्तक का उद्देश्य किसी एक योजना या उपलब्धि को अलग से प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि पिछले 12 वर्षों को एक व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखने का प्रयास करना है।

‘मेक इन इंडिया’ से गांवों की डिजिटल क्रांति तक
पुस्तक में ‘मेक इन इंडिया’ को भारत की उत्पादन क्षमता और आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों के रूप में देखा गया है। लेखक ने इसके व्यापक प्रभाव और देश की अर्थव्यवस्था से इसके जुड़ाव को समझाने की कोशिश की है।वहीं डिजिटल क्रांति को भी पुस्तक में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। लेखक का फोकस इस बात पर है कि डिजिटल तकनीक किस तरह महानगरों से निकलकर देश के सुदूर गांवों तक पहुंची और आम नागरिकों के जीवन में बदलाव का माध्यम बनी।डिजिटल सेवाओं, ऑनलाइन भुगतान, बैंकिंग और सरकारी सेवाओं की बढ़ती पहुंच को नए भारत के बदलते स्वरूप से जोड़कर देखा गया है।

महिला सशक्तीकरण भी पुस्तक का अहम हिस्सा
‘मोदी युग का भारत’ में महिला सशक्तीकरण को भी विकास की महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर शामिल किया गया है। लेखक ने जमीनी स्तर पर महिलाओं की बदलती भूमिका और उन्हें विकास की प्रक्रिया में अधिक भागीदारी देने वाली पहलों को रेखांकित किया है।
श्रीवास्तव का मानना है कि किसी भी देश के विकास की तस्वीर तब तक पूरी नहीं हो सकती, जब तक महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक भागीदारी को उसमें उचित स्थान न मिले। इसी नजरिए से पुस्तक में महिला सशक्तीकरण को व्यापक विकास यात्रा के हिस्से के रूप में देखा गया है।

दुनिया के मंच पर भारत की बदलती तस्वीर
पुस्तक में भारत की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की बढ़ती भूमिका को भी प्रमुखता दी गई है। लेखक ने यह समझने का प्रयास किया है कि पिछले वर्षों में भारत ने वैश्विक मंचों पर अपनी स्थिति को किस तरह मजबूत किया और दुनिया के सामने भारत की नई छवि किस प्रकार उभरी।‘मोदी युग का भारत’ में विदेश नीति को केवल कूटनीतिक गतिविधियों के रूप में नहीं बल्कि भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव और बदलते आत्मविश्वास से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है।

2047 का भारत-पुस्तक का सबसे खास हिस्सा
इस पुस्तक का सबसे खास और भविष्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण हिस्सा 2047 के भारत की परिकल्पना है। आजादी के 100 वर्ष पूरे होने पर भारत कैसा होगा और मौजूदा नीतियां देश को किस दिशा में ले जा रही हैं। लेखक ने इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश की है। पुस्तक में यह बताया गया है कि वर्तमान में बुनियादी ढांचे, तकनीक, विनिर्माण, महिला भागीदारी, आत्मनिर्भरता और वैश्विक कूटनीति जैसे क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयास आने वाले वर्षों में भारत के स्वरूप को प्रभावित कर सकते हैं। इस लिहाज से ‘मोदी युग का भारत’ केवल बीते 12 वर्षों की कहानी नहीं है। इसमें भविष्य के भारत की तस्वीर भी तलाशने का प्रयास किया गया है।

मुरली की कलम से पहले भी दर्ज हो चुकी हैं कई महत्वपूर्ण शख्सियतें
मुरली मनोहर श्रीवास्तव के लिए किसी महत्वपूर्ण व्यक्तित्व या विषय पर पुस्तक लिखना कोई नया प्रयोग नहीं है। इससे पहले वे भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां पर ‘शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खां’, 1857 के वीर सेनानी वीर कुंवर सिंह पर ‘वीर कुंवर सिंह की प्रेमकथा’ और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर ‘विकास पुरुष’ जैसी पुस्तकें लिख चुके हैं। उन्होंने राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत और बिहार गीत जैसे विषयों को केंद्र में रखते हुए ‘वंदेमातरम्’ पुस्तिका का संपादन भी किया है।उनके लेखन में इतिहास, संस्कृति, राजनीति और समकालीन विकास के विषय लगातार दिखाई देते हैं। उनका मानना है कि देश और समाज के विकास से जुड़े अनछुए पहलुओं को सामने लाना लेखक की जिम्मेदारी होनी चाहिए।

‘आलोचना करने से बेहतर है अच्छी बातों को आत्मसात करना’
मुरली मनोहर श्रीवास्तव के लेखकीय दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि वे केवल आलोचना को लेखन का आधार नहीं मानते। उनका मानना है कि किसी व्यक्ति की आलोचना करने से बेहतर है कि उसकी अच्छी विशेषताओं को समझा जाए और उनसे सीख ली जाए।वे कहते हैं कि उनकी प्राथमिकता ऐसे विषयों पर काम करना है, जिनसे आने वाली पीढ़ी, खासकर युवा, कुछ सीख सकें। यही कारण है कि उनके लेखन में ऐतिहासिक व्यक्तित्वों से लेकर समकालीन राजनीतिक और विकासात्मक विषयों तक का विस्तार दिखाई देता है।


जन्मदिन का उपहार, बदलते भारत का दस्तावेज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर मुरली मनोहर श्रीवास्तव की ओर से ‘मोदी युग का भारत’ को एक खास तोहफे के रूप में प्रस्तुत किया जाना इसे और भी विशेष बनाता है। एक लेखक ने अपने तरीके से देश के मौजूदा दौर को दर्ज करने की कोशिश की है।एक तरफ प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व और सरकार के 12 वर्षों के विकासात्मक कार्य हैं, तो दूसरी तरफ 2047 के विकसित भारत की परिकल्पना। इन दोनों को जोड़ते हुए यह पुस्तक वर्तमान से भविष्य की ओर बढ़ते भारत की कहानी कहने का प्रयास करती है।
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