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बिहार: नालंदा में लगेंगी 8 बायोगैस इकाइयां, 1300 वर्मी कंपोस्ट पिट पर मिलेगा 50% अनुदान, ऑनलाइन आवेदन शुरू

Fri, 28 Aug 2026 07:49 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला,नालंदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,नालंदा Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Fri, 28 Aug 2026 07:49 AM IST
सार
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नालंदा जिले में किसानों को महंगी बिजली, एलपीजी और रासायनिक खादों के बढ़ते खर्च से राहत देने के लिए कृषि विभाग ने विशेष योजना शुरू की है। वित्तीय वर्ष में 8 बायोगैस प्लांट और 1300 वर्मी कंपोस्ट इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।

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nalanda biogas vermicompost subsidy 50 percent farmer online application
नालंदा में बायोगैस-वर्मी कंपोस्ट पर सरकार देगी सब्सिडी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महंगी बिजली, रसोई गैस और रासायनिक खादों के बढ़ते खर्च से किसानों को राहत देने के लिए कृषि विभाग ने नालंदा जिले में विशेष पहल शुरू की है। वित्तीय वर्ष में जिले में 8 बायोगैस प्लांट और 1300 वर्मी कंपोस्ट (केंचुआ खाद) इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। योजना के तहत पात्र किसानों को इकाइयों की लागत का 50 प्रतिशत तक सरकारी अनुदान दिया जाएगा। इसके लिए कृषि विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

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बिहारशरीफ और हिलसा में 3-3, राजगीर में लगेंगे 2 बायोगैस प्लांट

योजना के तहत बिहारशरीफ और हिलसा अनुमंडल में तीन-तीन तथा राजगीर अनुमंडल में दो बायोगैस प्लांट स्थापित किए जाएंगे। दो घनमीटर क्षमता वाले एक बायोगैस प्लांट की कुल निर्माण लागत 45 हजार रुपये निर्धारित की गई है। इस पर सरकार की ओर से 22,500 रुपये का अनुदान दिया जाएगा। इस योजना का लाभ ऐसे किसानों को मिलेगा, जो पशुपालन से जुड़े हैं और उनके पास बायोगैस प्लांट के निर्माण के लिए पर्याप्त निजी भूमि उपलब्ध है। बायोगैस से उत्पन्न ऊर्जा का इस्तेमाल घरेलू जरूरतों के लिए किया जा सकेगा। इससे किसानों के घरों में बिजली और एलपीजी सिलेंडर पर होने वाले खर्च में भी कमी आएगी।

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1300 वर्मी कंपोस्ट इकाइयां होंगी स्थापित

रासायनिक उर्वरकों पर किसानों की निर्भरता कम करने और खेतों की मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए जिले में 1300 वर्मी कंपोस्ट इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। ईंट, बालू और सीमेंट से बनने वाले एक पक्के वर्मी पिट की लागत 10 हजार रुपये निर्धारित की गई है। इस पर किसानों को 5 हजार रुपये की सरकारी सब्सिडी मिलेगी। एक किसान अधिकतम तीन वर्मी पिट बनवा सकता है। इस तरह एक किसान को अधिकतम 15 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि मिल सकती है। विभागीय मानकों के अनुसार वर्मी पिट का आकार 10 फीट लंबा, 3 फीट चौड़ा और 2.5 फीट ऊंचा होना चाहिए। बारिश से वर्मी पिट को बचाने के लिए उसके ऊपर शेड लगाना भी अनिवार्य होगा।

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एक पिट से सालाना तैयार होगी करीब 2500 किलो जैविक खाद

योजना का लाभ लेने वाले किसानों को कम से कम पांच वर्षों तक लगातार केंचुआ खाद का उत्पादन करने का शपथ पत्र देना होगा। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार उचित रखरखाव और प्रबंधन के जरिए एक वर्मी पिट से हर साल करीब 2500 किलोग्राम शुद्ध जैविक खाद तैयार की जा सकती है। वर्मी कंपोस्ट के इस्तेमाल से खेतों में यूरिया और डीएपी जैसे रासायनिक उर्वरकों की खपत कम करने में मदद मिलेगी। इससे खेती की लागत घटने के साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति में सुधार और फसल उत्पादन बेहतर होने की उम्मीद है।

ऑनलाइन आवेदन शुरू, पात्र किसान उठा सकते हैं लाभ

जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. नितेश कुमार ने बताया कि बायोगैस और वर्मी कंपोस्ट इकाइयों के लिए ऑनलाइन आवेदन लिए जा रहे हैं। पात्र किसान निर्धारित शर्तों को पूरा करते हुए इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि बायोगैस प्लांट से किसानों के ईंधन खर्च में कमी आएगी, जबकि वर्मी कंपोस्ट के इस्तेमाल से खेतों की उर्वरा शक्ति मजबूत होगी और किसानों को शुद्ध जैविक खाद उपलब्ध हो सकेगी।

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