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सहरसा अस्पताल केस: जिस पद से सरकार ने खुद हटाया, उसी पर दूसरी बार नौकरी कैसे दी गई, जानिए कौन है वह चेहरा?
Wed, 16 Sep 2026 06:25 PM IST
आदित्य आनंद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: आदित्य आनंद
Updated Wed, 16 Sep 2026 06:25 PM IST
सहरसा में एक पत्रकार को बेरहमी से पीटने के बाद एक शख्स की चर्चा खूब हो रही है। आरोप यह भी लगाया जा रहा है कि उन्हीं के उकसावे पर यह घटना हुई। कुछ दिन पहले ही वह महत्वपूर्ण पद पर काम कर रही थी लेकिन एक खबर छपने के बाद उनका अस्पताल भेज दिया गया था। इसके बाद से वह आक्रोशित थीं। अब उनकी चर्चा फिर से इसलिए हो रही है कि 2017 और 2019 में उनके खिलाफ कई सवाल उठे थे। आइये जानते हैं पूरा मामला...
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डॉक्टर एसके आजाद के साथ सिंपी कुमारी और पीड़ित पत्रकार।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सहरसा मॉडल सदर अस्पताल में समाचार संकलन के दौरान पत्रकार अभिषेक कुमार के साथ मारपीट और अभद्रता के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस पूरे घटनाक्रम में अस्पताल प्रबंधक सिंपी कुमारी का नाम चर्चा के केंद्र में है। पत्रकार से बदसलूकी की घटना के बाद अब उनकी नियुक्ति, शैक्षणिक योग्यता, कार्यशैली और पूर्व में हुई विभागीय जांच से जुड़े मामले भी चर्चा में आ गए हैं। सिंपी कुमारी पूर्णिया जिले के मीरगंज-खगहा निवासी जदयू नेता प्रमोद चौधरी की पुत्री बताई जाती हैं। सहरसा में आने से पहले वह पूर्णिया सदर अस्पताल में प्रबंधक की भूमिका में थी।
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2017 में शव वाहन नहीं मिलने के मामले में हुई थी जांच
सिंपी कुमारी से जुड़ा एक पुराना मामला वर्ष 2017 का है। 2 जून 2017 को पूर्णिया सदर अस्पताल में एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण एक परिजन द्वारा बाइक पर महिला का शव ले जाने का मामला सामने आया था। घटना के बाद कटिहार और किशनगंज के सिविल सर्जन तथा डॉ. एसएनक्यू नसर, चिकित्सा पदाधिकारी, आईपीपी-07 की तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। बताया गया कि जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में अस्पताल प्रबंधक सिंपी कुमारी की कार्यशैली और लापरवाही पर सवाल उठाए थे। रिपोर्ट में कहा गया था कि उनकी कथित निष्क्रियता के कारण समय पर शव वाहन उपलब्ध नहीं कराया जा सका।
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जांच में शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी उठे थे सवाल
वर्ष 2017 में हुई जांच के दौरान सिंपी कुमारी के शैक्षणिक अभिलेखों की भी जांच की गई थी। जांच रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से मानव भारती विश्वविद्यालय, सोलन (हिमाचल प्रदेश) से एमबीए की डिग्री प्राप्त की थी। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया था कि यह नियमित पाठ्यक्रम नहीं था और डिग्री में हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन का उल्लेख नहीं था। इसके अलावा, संबंधित पद के लिए निर्धारित दो वर्ष के इंटर्नशिप अनुभव को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। जांच समिति ने कथित तौर पर यह राय दी थी कि पद के लिए निर्धारित योग्यता पूरी नहीं होने की स्थिति में सिंपी कुमारी का उक्त पद पर बने रहना उचित नहीं है।
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2019 में RTI के जरिए फिर उठा था मामला
वर्ष 2019 में जदयू नेता टुनटुन आलम ने सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से जानकारी प्राप्त कर स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा था। इसमें सिंपी कुमारी को पद से हटाने की मांग की गई थी।तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. कृष्ण मोहन पूर्वे और पूर्णिया की विभागीय जांच समिति की रिपोर्ट का भी इसमें उल्लेख किया गया था। दावा है कि विभागीय जांच रिपोर्ट की कंडिका-07 में शिकायतों को सही पाया गया था। तत्कालीन एसीएमओ, पूर्णिया की ओर से जांच रिपोर्ट की प्रति स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को भेजी गई थी और पद के लिए निर्धारित योग्यता से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के बावजूद चयन किए जाने के मामले में कार्रवाई की अनुशंसा की गई थी। टुनटुन आलम ने कहा कि शिकायत के बाद यहां से हटाकर सिंपी कुमारी का तबादला सहरसा कर दिया गया।
2017 और 2019 की जांच के बावजूद सहरसा में तैनाती पर सवाल
अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि 2017 और 2019 में सिंपी कुमारी की कार्यशैली और शैक्षणिक योग्यता को लेकर विभागीय स्तर पर सवाल उठाए गए थे, तो इसके बाद उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई? साथ ही, सहरसा मॉडल सदर अस्पताल में तैनाती से पहले उनकी शैक्षणिक योग्यता और अनुभव का दोबारा सत्यापन कराया गया था या नहीं? स्थानीय स्तर पर उनके कथित राजनीतिक संपर्कों को लेकर भी चर्चाएं हैं। ऐसे में यह भी महत्वपूर्ण है कि स्वास्थ्य विभाग इन आरोपों और नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट करे।
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पत्रकार से मारपीट के बाद निष्पक्ष जांच की मांग
सहरसा सदर अस्पताल में पत्रकार के साथ कथित मारपीट और अभद्रता की घटना के बाद स्थानीय बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और मीडियाकर्मियों में आक्रोश है। लोगों ने जिला स्वास्थ्य समिति, सहरसा और राज्य स्वास्थ्य विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। अब मांग की जा रही है कि पत्रकार से कथित मारपीट के मामले के साथ-साथ अस्पताल प्रबंधक की नियुक्ति, शैक्षणिक योग्यता और पूर्व की विभागीय जांच से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कराई जाए। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
पीड़ित पत्रकार ने क्या आरोप लगाया था?
पीड़ित अभिषेक कुमार ने आरोप लगाया कि दो महीना पहले सदर अस्पताल की प्रबंधक सिंपी कुमारी को सहरसा में डीपीएम का प्रभार मिला था लेकिन वह जिला स्वास्थ्य समिति के पॉलिसी के तहत इस पद के प्रभारी बनने के योग्य नहीं थीं। इसके बाद स्थानीय स्तर पर खबर चलाई गई। इसके बाद उन्हें हटा दिया गया। तब उन्होंने मुझे टारगेट कर दिया। बदले की भावना से उन्होंने सदर अस्पताल के डॉक्टर एसके आजाद को उकसाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पीड़ित पत्रकार ने कहा कि सिंपी कुमार एक महिला मंत्री का धौंस भी दिखाती है। वह खुद को उनकी करीबी भी बताती हैं। सरकार से अपील हैं कि इस मामले की गंभीरता से जांच करे और कार्रवाई करे।