फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bizarre News ›   a new walking shark was found in papua new guinea

उथले समुद्र में मिली चलने वाली शार्क की नई प्रजाति, पापुआ न्यू गिनी में आई नजर

Thu, 10 Sep 2026 05:25 PM IST
धर्मेंद्र कुमार सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: धर्मेंद्र कुमार सिंह Updated Thu, 10 Sep 2026 05:25 PM IST
सार
Register For Event

वैज्ञानिकों ने पापुआ न्यू गिनी के दक्षिण-पूर्वी तट के पास शार्क की एक ऐसी नई प्रजाति की खोज की है। इस प्रजाति की सबसे खास बात है कि यह नई प्रजाति तैरने के साथ समुद्र की तलहटी पर चल भी सकती है। 

विज्ञापन
a new walking shark was found in papua new guinea
उथले समुद्र में मिली चलने वाली शार्क की नई प्रजाति - फोटो : AI

विस्तार

समुद्र की गहराइयों में ही नहीं, उसकी उथली दुनिया में भी जीवों की अनदेखी विविधता छिपी है। पापुआ न्यू गिनी के दक्षिण-पूर्वी तट के पास वैज्ञानिकों ने शार्क की एक ऐसी नई प्रजाति की पहचान की है, जो तैरने के साथ समुद्र की तलहटी पर चल भी सकती है। हेमिसिलियम डजियोनाई नाम की यह शार्क अपने मजबूत पेक्टोरल और पेल्विक पंखों का इस्तेमाल पैरों की तरह करती है।इस नई प्रजाति के बारे में जर्नल ऑफ द ओशन साइंस फाउंडेशन में प्रकाशित अध्ययन में विस्तृत जानकारी दी गई है। 

विज्ञापन


वैज्ञानिकों के अनुसार यह वॉकिंग शार्क समूह में 2013 के बाद वर्णित पहली नई प्रजाति है। इसके साथ हेमिसिलियम वंश में ज्ञात प्रजातियों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है।नई प्रजाति की पहचान मार्च 2025 में उस समय हुई, जब ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ द सनशाइन कोस्ट की शोधकर्ता क्रिस्टीन डजियन और उनकी टीम मिल्ने बे क्षेत्र में वॉकिंग शार्क की एक ज्ञात प्रजाति की तलाश कर रही थी। रात के अंधेरे में डजियन को करीब एक मीटर लंबी शार्क दिखाई दी और उन्होंने उसे हाथ से पकड़ लिया। पहली नजर में लगा कि यह मिल्ने बे वॉकिंग शार्क हेमिसिलियम माइकेली है। लेकिन नाव पर रोशनी में जांच करने पर इसके शरीर के निशान अलग मिले। इसकी भूरी देह पर बड़े तेंदुए जैसे धब्बों के बजाय सफेद धारियां, छोटे भूरे धब्बे और डैश जैसे निशान थे। 
विज्ञापन


शोधकर्ताओं को ये निशान ब्रेल या मोर्स कोड जैसे दिखाई दिए।एक नमूने के आधार पर नई प्रजाति घोषित करना संभव नहीं था। इसलिए टीम ने अगले दो दिनों तक खोज जारी रखी और तीन अलग-अलग स्थानों से ऐसी 11 और शार्क पकड़ीं। इनमें नर-मादा दोनों और अलग-अलग उम्र की शार्क शामिल थीं। इससे वैज्ञानिकों को संकेत मिला कि वे किसी असामान्य अकेले जीव के बजाय एक अलग प्रजाति के सामने हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


झांसी: रील बनाने के चक्कर में शख्स ने 30 फीट की उंचाई से बांध में लगाई छलांग, फिर जो हुआ देखकर उड़ जाएंगे होश

जीनोम ने खोला प्रजाति का राज

शारीरिक बनावट और रंग-रूप के बाद वैज्ञानिकों ने आनुवंशिक जांच की। शुरुआती डीएनए विश्लेषण इस शार्क को अलग प्रजाति के रूप में स्पष्ट नहीं कर सका। इसके बाद पूरे जीनोम में हजारों आनुवंशिक संकेतकों की जांच की गई। इस विस्तृत विश्लेषण में नई शार्क अपनी निकट संबंधी हेमिसिलियम माइकेली से स्पष्ट रूप से अलग मिली।यह शार्क उथले समुद्री घास वाले क्षेत्रों और प्रवाल भित्तियों के आसपास पाई गई। दिलचस्प बात यह है कि स्थानीय समुदाय इसे लंबे समय से ‘कदेदेकेदेवा’ नाम से जानते हैं। यानी वैज्ञानिकों के लिए भले ही यह नई प्रजाति हो, स्थानीय लोगों की नजर में यह उनके समुद्री पर्यावरण का पुराना हिस्सा है।


वायरल वीडियो: ट्रेन में खाने के बड़े बर्तनों के साथ पहुंची महिला, बर्थ पर ही सजा दी चिकन-चावल की दावत

1970 का नमूना भी निकला नई प्रजाति

खोज के दौरान वैज्ञानिकों को एक और हैरान करने वाला तथ्य मिला। नई प्रजाति का एक छोटा नमूना वर्ष 1970 में पापुआ न्यू गिनी से एकत्र किया गया था और बाद में अमेरिका के नेशनल म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री में संरक्षित कर दिया गया। वर्ष 2010 में इसे युवा हेमिसिलियम माइकेली माना गया था। नई खोज के बाद पुराने नमूने की दोबारा जांच की गई तो पता चला कि वह भी हेमिसिलियम डजियोनाई ही था। यानी नई प्रजाति करीब पांच दशक से वैज्ञानिक संग्रह में मौजूद थी, लेकिन उसकी सही पहचान अब हो सकी।

हनुमान जी की मूर्ति के सामने दिखा अनोखा नजारा, मंदिर में भजन सुनते ही झूम उठा कुत्ता, देखें वीडियो

सीमित आवास, बढ़ता खतरा

वैज्ञानिकों के लिए चिंता की बात यह है कि इस शार्क का ज्ञात प्राकृतिक आवास महज करीब 7,000 वर्ग किलोमीटर है। तटीय निर्माण, मछली पकड़ना, ताड़ के बागान और प्रवाल भित्तियों का विरंजन इसके आवास पर दबाव बढ़ा रहे हैं।वैज्ञानिकों को अभी इसकी कुल आबादी का सटीक अनुमान नहीं है। इसलिए संरक्षण की औपचारिक स्थिति भी तय नहीं हुई है, लेकिन सीमित भौगोलिक फैलाव और बढ़ते पर्यावरणीय दबाव को देखते हुए भविष्य में इसे संकटग्रस्त श्रेणी में रखे जाने की आशंका है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Bizarre News in Hindi related to Weird News - Bizarre, Strange Stories, Odd and funny stories in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Bizarre and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed