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एक्सप्लेनर: आरबीआई का बड़ा फैसला, एक जगह मिलेगा म्यूचुअल फंड, शेयर-एफडी का हिसाब; क्या बदलेगा?
Fri, 09 Oct 2026 06:33 AM IST
निर्मल कांत
बोनस डेस्क, नई दिल्ली।
बोनस डेस्क, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 09 Oct 2026 06:33 AM IST
आखिर क्यों केंद्र सरकार और आरबीआई को उठाना पड़ा यह कदम। क्या ग्राहकों की वित्तीय प्रोफाइलिंग होगी बेहतर। क्या बैंक या वित्तीय संस्थान सेवाओं को कर सकेंगे आपके अनुरूप।
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नई व्यवस्था से कैसे बदलेगा आपका वित्तीय जीवन?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
क्या आपके पास भी अलग-अलग बैंकों में कई खाते हैं? क्या अलग-अलग पोर्टल्स पर जाकर अपने डीमैट खातों, म्यूचुअल फंड्स और एफडी के बैलेंस को ट्रैक करते-करते थक चुके हैं? और क्या कभी ऐसा हुआ है कि किसी परिजन के जाने के बाद उनके खातों या अनक्लेमड डिपॉजिट्स का पता लगाने में एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ा हो?
अगर इन सवालों का जवाब हां है, तो आपके लिए बड़ी राहत भरी खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और वित्तीय नियामकों ने देश के आम निवेशकों और खाताधारकों की इन सभी परेशानियों को हमेशा के लिए खत्म करने का पुख्ता बंदोबस्त कर दिया है।
क्या है नया बदलाव?
एक जनवरी, 2027 से ग्राहकों को उनके बचत खातों और विभिन्न परिसंपत्ति वर्गों में किए गए निवेश का एक कंसोलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट (सीएएस) हर महीने एक ही जगह पर मिलना शुरू हो जाएगा। आरबीआई ने सेबी के नियमन वाले डिपॉजिटरी को एनबीएफसी-अकाउंट एग्रीगेटर्स के माध्यम से बैंक डिपॉजिट की जानकारी भी इस स्टेटमेंट में शामिल करने की अनुमति दे दी है।
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अभी तक म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार के निवेशकों को एक ही पैन के तहत सिर्फ सिक्योरिटीज और म्यूचुअल फंड का ही सिंगल स्टेटमेंट मिलता था। इसमें बैंक डिपॉजिट्स या बचत खातों की जानकारी शामिल नहीं होती थी, जिससे वित्तीय बचत का एक बड़ा हिस्सा इस दायरे से बाहर रहता था।
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) और सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (सीडीएसएल जैसी डिपॉजिटरी की ओर से भेजे जाने वाले इस स्टेटमेंट में अब आपके बैंक खातों की जमा राशि भी दिखने लगेगी।
अकाउंट एग्रीगेटर्स के बीच बेहतर होगा तालमेल
इस पूरी डिजिटल व्यवस्था की रीढ़ अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क है। अब अलग-अलग अकाउंट एग्रीगेटर्स आपस में आसानी से जुड़ सकेंगे और उनके बीच आपसी तालमेल बेहतर होगा, जिससे ग्राहक आसानी से एक ही जगह अपना डाटा देख सकेंगे। यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से ग्राहक की सहमति पर आधारित होगी, जिससे डाटा की गोपनीयता और सुरक्षा पूरी तरह सुरक्षित रहेगी।
ये भी पढ़ें: क्या 15 अक्टूबर से नहीं लगेगा यूपीआई चार्ज? एमडीआर की तारीख बढ़ा सकती है सरकार!
आम लोगों और निवेशकों को क्या फायदा होगा?
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अगर इन सवालों का जवाब हां है, तो आपके लिए बड़ी राहत भरी खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और वित्तीय नियामकों ने देश के आम निवेशकों और खाताधारकों की इन सभी परेशानियों को हमेशा के लिए खत्म करने का पुख्ता बंदोबस्त कर दिया है।
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क्या है नया बदलाव?
एक जनवरी, 2027 से ग्राहकों को उनके बचत खातों और विभिन्न परिसंपत्ति वर्गों में किए गए निवेश का एक कंसोलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट (सीएएस) हर महीने एक ही जगह पर मिलना शुरू हो जाएगा। आरबीआई ने सेबी के नियमन वाले डिपॉजिटरी को एनबीएफसी-अकाउंट एग्रीगेटर्स के माध्यम से बैंक डिपॉजिट की जानकारी भी इस स्टेटमेंट में शामिल करने की अनुमति दे दी है।
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अभी तक म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार के निवेशकों को एक ही पैन के तहत सिर्फ सिक्योरिटीज और म्यूचुअल फंड का ही सिंगल स्टेटमेंट मिलता था। इसमें बैंक डिपॉजिट्स या बचत खातों की जानकारी शामिल नहीं होती थी, जिससे वित्तीय बचत का एक बड़ा हिस्सा इस दायरे से बाहर रहता था।
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) और सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (सीडीएसएल जैसी डिपॉजिटरी की ओर से भेजे जाने वाले इस स्टेटमेंट में अब आपके बैंक खातों की जमा राशि भी दिखने लगेगी।
अकाउंट एग्रीगेटर्स के बीच बेहतर होगा तालमेल
इस पूरी डिजिटल व्यवस्था की रीढ़ अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क है। अब अलग-अलग अकाउंट एग्रीगेटर्स आपस में आसानी से जुड़ सकेंगे और उनके बीच आपसी तालमेल बेहतर होगा, जिससे ग्राहक आसानी से एक ही जगह अपना डाटा देख सकेंगे। यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से ग्राहक की सहमति पर आधारित होगी, जिससे डाटा की गोपनीयता और सुरक्षा पूरी तरह सुरक्षित रहेगी।
ये भी पढ़ें: क्या 15 अक्टूबर से नहीं लगेगा यूपीआई चार्ज? एमडीआर की तारीख बढ़ा सकती है सरकार!
आम लोगों और निवेशकों को क्या फायदा होगा?
- जैसा कि खुद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने चिंता जताई है कि कई बार लोगों की मृत्यु के बाद उनके बैंक डिपॉजिट्स लावारिस छूट जाते हैं या मिल नहीं पाते। इस सिंगल कंसोलिडेटेड व्यू से इस तरह की समस्याओं का स्थायी समाधान मिलेगा।
- इस स्टेटमेंट से लोगों को अपनी वित्तीय प्लानिंग करने और परिवारों को मृत निवेशकों की संपत्ति का पता लगाने में बहुत आसानी होगी।
- इस कदम से ग्राहकों की वित्तीय प्रोफाइलिंग बेहतर होगी और बैंक तथा वित्तीय संस्थान उनकी जरूरत के हिसाब से सेवाओं को और बेहतर ढंग से कस्टमाइज कर सकेंगे।