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ड्रोन हमले से सऊदी की पाइपलाइन ठप: यूरोप को अक्तूबर में नहीं मिलेगा अरामको का कच्चा तेल; क्या है वजह?
Sat, 19 Sep 2026 12:21 AM IST
राकेश कुमार
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला।
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sat, 19 Sep 2026 12:21 AM IST
सऊदी अरामको ने कम से कम दो यूरोपीय रिफाइनिंग ग्राहकों को अक्तूबर में कच्चे तेल की डिलीवरी नहीं देने की जानकारी दी है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, यह फैसला ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर ड्रोन हमले के बाद लिया गया, जिसमें तीन पंपिंग स्टेशन क्षतिग्रस्त हुए। पोलैंड की ओर्लेन ने वैकल्पिक रूप से उत्तरी सागर का तेल खरीदा है। अरामको पाइपलाइन को कुछ दिनों में आंशिक और करीब छह सप्ताह में पूरी क्षमता पर लाने की कोशिश कर रही है।
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सऊदी तेल पाइपलाइन पर हमला
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
सऊदी अरब की तेल कंपनी अरामको ने कम से कम दो यूरोपीय रिफाइनिंग ग्राहकों को बताया है कि उन्हें अगले महीने यानी अक्तूबर में कच्चे तेल की डिलीवरी नहीं मिलेगी। समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग ने मामले से परिचित लोगों के हवाले से यह जानकारी दी है। यूरोपीय रिफाइनर आम तौर पर अरामको से दीर्घकालिक अनुबंध के तहत हर महीने सऊदी कच्चा तेल खरीदते हैं, लेकिन इस बार अक्तूबर की डिलीवरी रोक दी गई है।
पाइपलाइन पर हमले का क्या असर हुआ?
यह फैसला सऊदी अरब की अहम ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर ड्रोन हमले के बाद आया है। हमले के कारण पाइपलाइन को बंद करना पड़ा और तीन पंपिंग स्टेशन क्षतिग्रस्त हुए। इसके चलते लाल सागर के तट पर स्थित यानबू बंदरगाह से तेल की लोडिंग भी प्रभावित हुई। सऊदी अरब ने पहले ही यूरोपीय ग्राहकों को कुछ कच्चे तेल की खेप रद्द होने की जानकारी दी थी।
यूरोपीय रिफाइनर अब क्या कर रहे हैं?
तेल की आपूर्ति में आई इस रुकावट के बाद यूरोपीय रिफाइनरों ने दूसरे स्रोतों से कच्चा तेल जुटाना शुरू कर दिया है। पोलैंड की रिफाइनिंग कंपनी ओर्लेन भी वैकल्पिक आपूर्ति की तलाश में है। कारोबारियों के मुताबिक, कंपनी ने सऊदी तेल की जगह उत्तरी सागर का कच्चा तेल खरीदा है। इससे पता चलता है कि पाइपलाइन में आए व्यवधान का असर यूरोपीय रिफाइनरों की खरीद पर भी पड़ रहा है।
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अरामको पाइपलाइन को कब तक शुरू करेगी?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अरामको कुछ ही दिनों में पाइपलाइन को आंशिक रूप से फिर शुरू करने और करीब छह सप्ताह में इसे पूरी क्षमता पर वापस लाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, अमर उजाला इस जानकारी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करती है।
सऊदी अरब ने तेल की भरपाई के लिए क्या किया?
लाल सागर के रास्ते तेल की आपूर्ति में आई कमी को पूरा करने के लिए अरामको ने खाड़ी के रास्ते कच्चे तेल का निर्यात बढ़ाया है। कंपनी ओमान के सोहर बंदरगाह के पास समुद्र में एक जहाज से दूसरे जहाज में तेल स्थानांतरित कर रही है। इसका मकसद लाल सागर से कम हुई तेल की मात्रा की कुछ हद तक भरपाई करना है।
हमला किसने किया?
सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर हुए ड्रोन हमले को लेकर अब तक सबसे अहम जानकारी यह है कि ड्रोन इराक की जमीन से लॉन्च किए गए थे। सऊदी विदेश मंत्रालय ने बताया था कि कई ड्रोन ने रियाद और मदीना क्षेत्र में स्थित पाइपलाइन को निशाना बनाया। हमले के बाद पाइपलाइन को एहतियात के तौर पर बंद करना पड़ा और कई लोग घायल हुए। हालांकि, किस संगठन ने ये ड्रोन भेजे, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और किसी समूह ने हमले की जिम्मेदारी भी नहीं ली है।
यह भी पढ़ें: सर्राफा बाजार: कच्चे तेल की नरमी से चमका सोना, चांदी भी 5000 रुपये उछली; निवेशकों ने किया सर्राफा का रुख
इराक ने क्या किया?
हमले में इस्तेमाल ड्रोन के इराक से लॉन्च होने की जानकारी सामने आने के बाद इराक ने जांच शुरू कर दी। रॉयटर्स के मुताबिक, इराक ने जिम्मेदार लोगों का पता लगाने और उन्हें पकड़ने के लिए सुरक्षा अभियान भी शुरू किया। इस घटनाक्रम से साफ है कि हमले का स्रोत इराकी क्षेत्र बताया जा रहा है, लेकिन हमलावर संगठन की पहचान अभी अलग मुद्दा है।
ईरान समर्थित मिलिशिया पर क्यों नजर?
इस पूरे मामले को उस समय के व्यापक क्षेत्रीय तनाव से अलग करके नहीं देखा जा रहा है। रॉयटर्स ने बताया कि हमले के दौरान ईरान से जुड़े मिलिशिया और यमन के हूती समूह की गतिविधियां भी क्षेत्र में बढ़ी हुई थीं। हालांकि, केवल इस आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि पाइपलाइन पर हमला किसी खास ईरान समर्थित संगठन ने ही किया था। अभी तक किसी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है। यमन के हूती समूह ने इसी दौरान सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही थी, लेकिन इस खास ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन हमले की जिम्मेदारी हूतियों ने नहीं ली है।
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पाइपलाइन पर हमले का क्या असर हुआ?
यह फैसला सऊदी अरब की अहम ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर ड्रोन हमले के बाद आया है। हमले के कारण पाइपलाइन को बंद करना पड़ा और तीन पंपिंग स्टेशन क्षतिग्रस्त हुए। इसके चलते लाल सागर के तट पर स्थित यानबू बंदरगाह से तेल की लोडिंग भी प्रभावित हुई। सऊदी अरब ने पहले ही यूरोपीय ग्राहकों को कुछ कच्चे तेल की खेप रद्द होने की जानकारी दी थी।
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यूरोपीय रिफाइनर अब क्या कर रहे हैं?
तेल की आपूर्ति में आई इस रुकावट के बाद यूरोपीय रिफाइनरों ने दूसरे स्रोतों से कच्चा तेल जुटाना शुरू कर दिया है। पोलैंड की रिफाइनिंग कंपनी ओर्लेन भी वैकल्पिक आपूर्ति की तलाश में है। कारोबारियों के मुताबिक, कंपनी ने सऊदी तेल की जगह उत्तरी सागर का कच्चा तेल खरीदा है। इससे पता चलता है कि पाइपलाइन में आए व्यवधान का असर यूरोपीय रिफाइनरों की खरीद पर भी पड़ रहा है।
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अरामको पाइपलाइन को कब तक शुरू करेगी?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अरामको कुछ ही दिनों में पाइपलाइन को आंशिक रूप से फिर शुरू करने और करीब छह सप्ताह में इसे पूरी क्षमता पर वापस लाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, अमर उजाला इस जानकारी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करती है।
सऊदी अरब ने तेल की भरपाई के लिए क्या किया?
लाल सागर के रास्ते तेल की आपूर्ति में आई कमी को पूरा करने के लिए अरामको ने खाड़ी के रास्ते कच्चे तेल का निर्यात बढ़ाया है। कंपनी ओमान के सोहर बंदरगाह के पास समुद्र में एक जहाज से दूसरे जहाज में तेल स्थानांतरित कर रही है। इसका मकसद लाल सागर से कम हुई तेल की मात्रा की कुछ हद तक भरपाई करना है।
हमला किसने किया?
सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर हुए ड्रोन हमले को लेकर अब तक सबसे अहम जानकारी यह है कि ड्रोन इराक की जमीन से लॉन्च किए गए थे। सऊदी विदेश मंत्रालय ने बताया था कि कई ड्रोन ने रियाद और मदीना क्षेत्र में स्थित पाइपलाइन को निशाना बनाया। हमले के बाद पाइपलाइन को एहतियात के तौर पर बंद करना पड़ा और कई लोग घायल हुए। हालांकि, किस संगठन ने ये ड्रोन भेजे, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और किसी समूह ने हमले की जिम्मेदारी भी नहीं ली है।
यह भी पढ़ें: सर्राफा बाजार: कच्चे तेल की नरमी से चमका सोना, चांदी भी 5000 रुपये उछली; निवेशकों ने किया सर्राफा का रुख
इराक ने क्या किया?
हमले में इस्तेमाल ड्रोन के इराक से लॉन्च होने की जानकारी सामने आने के बाद इराक ने जांच शुरू कर दी। रॉयटर्स के मुताबिक, इराक ने जिम्मेदार लोगों का पता लगाने और उन्हें पकड़ने के लिए सुरक्षा अभियान भी शुरू किया। इस घटनाक्रम से साफ है कि हमले का स्रोत इराकी क्षेत्र बताया जा रहा है, लेकिन हमलावर संगठन की पहचान अभी अलग मुद्दा है।
ईरान समर्थित मिलिशिया पर क्यों नजर?
इस पूरे मामले को उस समय के व्यापक क्षेत्रीय तनाव से अलग करके नहीं देखा जा रहा है। रॉयटर्स ने बताया कि हमले के दौरान ईरान से जुड़े मिलिशिया और यमन के हूती समूह की गतिविधियां भी क्षेत्र में बढ़ी हुई थीं। हालांकि, केवल इस आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि पाइपलाइन पर हमला किसी खास ईरान समर्थित संगठन ने ही किया था। अभी तक किसी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है। यमन के हूती समूह ने इसी दौरान सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही थी, लेकिन इस खास ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन हमले की जिम्मेदारी हूतियों ने नहीं ली है।