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एस्सेल ग्रुप दिवालिया समाधान: ₹22,000 करोड़ के दावों के बीच कर्ज निपटान पर बढ़ा ध्यान, जानिए अब क्या अपडेट

Mon, 31 Aug 2026 07:58 PM IST
कुमार विवेक पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Mon, 31 Aug 2026 07:58 PM IST
सार
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एस्सेल ग्रुप के प्रमोटर की 22,000 करोड़ रुपये की देनदारी और दिवालिया समाधान योजना पर बैंकों का विरोध। जानें क्या है नया कर्ज निपटान का नया रोडमैप।

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Essel Group Insolvency: Focus Shifts to Debt Settlement Amid Bank Objections Over Repayment Plan
सुभाष चंद्रा - फोटो : PTI

विस्तार

एस्सेल ग्रुप के कर्ज निपटान को लेकर जारी कानूनी प्रक्रियाओं में एक नया मोड़ आया है। ग्रुप के प्रमोटर सुभाष चंद्रा ने अपनी व्यक्तिगत दिवालियापन समाधान योजना के बचाव और बैंकों के साथ बकाया देनदारियों को सुलझाने को मुख्य प्राथमिकता बताया है। उन्होंने हाल ही में अंबानी परिवार और उनके व्यवसायों के खिलाफ दिए गए बयानों से पीछे हटते हुए अब पूरा ध्यान वित्तीय देनदारियों को निपटाने पर लगाया है।

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व्यक्तिगत दिवालिया समाधान योजना का विवाद क्या है?

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में प्रमोटर की व्यक्तिगत दिवालिया योजना को लेकर बैंकों और प्रमोटर के बीच असहमति बनी हुई है। इस योजना के तहत वित्तीय लेनदार केवल 6.5 करोड़ रुपये की ही वसूली कर सकेंगे, जबकि बैंकों का कुल दावा 22,006.57 करोड़ रुपये की व्यक्तिगत गारंटियों से जुड़ा हुआ है। एचडीएफसी बैंक और एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस जैसे प्रमुख वित्तीय संस्थानों ने इस योजना का कड़ा विरोध किया है।

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देनदारी चुकाने का क्या है नया रोडमैप?

प्रमोटर के अनुसार, हाल ही में एस्सेल ग्रुप से जुड़ी कर्जदार कंपनियों के साथ एक बैठक आयोजित की गई थी। इस चर्चा में हितधारकों ने बैंकों की करीब 990 करोड़ रुपये की बकाया देनदारियों को चुकाने पर आपसी सहमति व्यक्त की है। योजना के अनुसार, आपसी बातचीत और निपटान के जरिए इन गारंटियों से जुड़ी देयताओं को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है।

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कानूनी मोर्चे पर आगे क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

एनसीएलटी की बेंच में सदस्यों के बीच मतभेद के बाद बहुमत से इस समाधान योजना को मंजूरी दी गई थी। प्रमोटर की कुल निजी संपत्ति करीब 31 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें 25 करोड़ रुपये की आवासीय संपत्ति शामिल है। हालांकि, असंतुष्ट लेनदार बैंक इस मंजूरी के खिलाफ जल्द ही अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) का रुख करने की योजना बना रहे हैं।

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