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ड्राइविंग लाइसेंस: अब भारतीय व विदेशी नागरिकों के लिए होंगे अलग कलर कोड, जानें नियमों में और क्या बदलेगा

Fri, 23 Oct 2026 04:36 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 23 Oct 2026 04:36 PM IST
सार
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  • सड़क परिवहन मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में बड़े संशोधनों का मसौदा जारी किया है।
  • भारतीय और विदेशी नागरिकों के लिए अलग कलर-कोडेड ड्राइविंग लाइसेंस का प्रस्ताव है।
  • इसके अलावे डीएल पर ब्लड ग्रुप अनिवार्य करने और 15 दिनों में नाम-पता अपडेट करने समेत बड़े बदलावो की तैयारी है।

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Govt Plans Colour Coded Driving Licences for Citizens and Foreign Nationals; Proposes Major CMVR Rules Change
ड्राइविंग लाइसेंस के नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी - फोटो : amarujala.com

विस्तार

देश में ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) जारी करने और इसके नवीनीकरण की प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और सख्त बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़े नीतिगत बदलाव का खाका तैयार किया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएस) ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में संशोधन के लिए एक नया मसौदा प्रस्ताव जारी किया है।

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इस मसौदे के तहत भारतीय नागरिकों और विदेशी नागरिकों के लिए अलग-अलग रंग वाले ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की योजना बनाई गई है। इसके साथ ही, लाइसेंस बनवाने और उसमें सुधार की प्रक्रिया को पेपरलेस, तेज और बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के पूरा करने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार प्रस्तावित किए गए हैं। मंत्रालय ने इस मसौदे पर आम जनता और हितधारकों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं।

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कलर-कोडेड ड्राइविंग लाइसेंस की नई योजना क्या है?

सड़क परिवहन मंत्रालय के नए मसौदे के अनुसार, देश में जारी होने वाले या नवीनीकृत किए जाने वाले सभी ड्राइविंग लाइसेंस फॉर्म 7 में लैमिनेटेड या पॉलीविनाइल क्लोराइड (पीवीसी) कार्ड के रूप में होंगे। 

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इस नई व्यवस्था में मुख्य बदलाव इस प्रकार प्रस्तावित हैं:

  • अलग-अलग कलर फॉर्मेट: फॉर्म 7 के तहत भारतीय नागरिकों और विदेशी नागरिकों को दिए जाने वाले ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अलग-अलग कलर स्कीम और प्रारूप तय किए जाएंगे।
  • तीन नई जानकारियां अनिवार्य: प्रत्येक ड्राइविंग लाइसेंस पर अब कार्डधारक का रक्त समूह, मोबाइल नंबर और आपातकालीन संपर्क नंबर दर्ज होना अनिवार्य होगा।

कागजी झंझट को दूर करने के लिए क्या प्रस्ताव हैं?

डिजिटल गवर्नेंस और सरलीकरण को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय ने कार्यपालक मजिस्ट्रेट या नोटरी के समक्ष दिए जाने वाले हलफनामों की अनिवार्यता को समाप्त करने का प्रस्ताव रखा है। 

कागजी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए निम्नलिखित कदम प्रस्तावित हैं:

  • स्वीकार्य वैध दस्तावेज: आयु, पहचान और निवास के प्रमाण के रूप में आधार कार्ड, पासपोर्ट, मतदाता पहचान पत्र, ई-राशन कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र जैसे प्रामाणिक दस्तावेजों का उपयोग किया जा सकेगा। इसके अलावा दुरुपयोग रोकने के लिए शपथ पत्र और जीवन बीमा पॉलिसियों को भी वैध माना जाएगा।
  • व्यक्तिगत विवरण में बदलाव की समयसीमा: नाम या पता बदलने जैसे आवेदनों का निपटारा लाइसेंसिंग अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से करना होगा, और यदि कोई आवेदन खारिज किया जाता है तो उसका स्पष्ट कारण देना होगा।
  • निःशुल्क संशोधन और फीस माफी: व्यक्तिगत विवरण (नाम और पता) में बदलाव के लिए लगने वाले शुल्क को समाप्त करने का प्रस्ताव है। साथ ही, आधार प्रमाणीकरण के जरिए पूरी की जाने वाली चुनिंदा ऑनलाइन डीएल सेवाओं के लिए फीस माफ की जाएगी।

ड्राइविंग टेस्ट के मानकों में क्या सख्ती होगी?

सड़क सुरक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने और ड्राइवरों की दक्षता जांचने के लिए मंत्रालय ने टेस्ट और ट्यूटोरियल मूल्यांकन के कड़े मानक तय किए हैं:

  • क्वालीफाइंग मार्क्स में बढ़ोतरी: सेफ-ड्राइविंग ट्यूटोरियल मूल्यांकन पास करने के लिए न्यूनतम अर्हता अंक को 60 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया है।
  • ट्यूटोरियल की समयसीमा: सुरक्षित ड्राइविंग से जुड़ा यह ऑनलाइन ट्यूटोरियल कम से कम 30 मिनट की अवधि का होना अनिवार्य होगा।
  • मूल्यांकन में सख्ती: एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य ड्राइविंग टेस्ट प्रक्रिया और मूल्यांकन आवश्यकताओं को अधिक पारदर्शी और कड़ा बनाना है।

आम जनता और परिवहन क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय का यह मसौदा प्रस्ताव आम जनता के लिए प्रक्रिया को सुगम बनाने और फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने की दिशा में एक दोहरी रणनीति है। आधार आधारित ऑनलाइन सुविधाओं पर शुल्क छूट और 15 दिनों का निश्चित सर्विस लेवल एग्रीमेंट (एसएलए) नागरिकों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर काटने और अनावश्यक खर्चों से मुक्ति दिलाएगा। वहीं, 75 प्रतिशत का कड़ा क्वालीफाइंग स्कोर और इमरजेंसी कॉन्टैक्ट डिटेल्स की अनिवार्यता सड़क हादसों के वक्त तुरंत मदद पहुंचाने और सुरक्षित ड्राइविंग संस्कृति को बढ़ावा देने में अहम साबित होगी।

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